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तमिलनाडु की गद्दी

तमिलनाडु में एडाप्पडी पलनीसामी के विश्वासमत जीतने के बाद फिलहाल राजनीतिक अस्थिरता समाप्त हो गई है।

Author February 20, 2017 2:50 AM
शशिकला को AIADMK के महासचिव के पद से हटा दिया गया है। ( Photo Source: PTI)

तमिलनाडु में एडाप्पडी पलनीसामी के विश्वासमत जीतने के बाद फिलहाल राजनीतिक अस्थिरता समाप्त हो गई है। मगर जिन हालात में पलनीसामी ने अधिसंख्य विधायकों का समर्थन हासिल किया, उसे देखते हुए दावा करना मुश्किल है कि उनके लिए मुख्यमंत्री रहते काम करना आसान होगा। फिर वे तमिलनाडु के लोगों का कितना समर्थन हासिल कर पाएंगे, यह भी संदेह के दायरे में है। विश्वासमत के दौरान डीएमके के नेताओं को हंगामा करने की वजह से सदन से बाहर करना पड़ा। इसके अलावा कांग्रेस और मुसलीम लीग ने सदन का बहिष्कार किया। विधानसभा अध्यक्ष के साथ विपक्ष ने धक्कामुक्की की। दरअसल, जयललिता की मृत्यु के बाद शशिकला मुख्यमंत्री बनना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने अन्नाद्रमुक के विधायकों को अपने पक्ष में भी कर लिया था। जयललिता द्वारा नियुक्त कार्यकारी मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम को गद्दी छोड़नी पड़ी। मगर पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने शशिकला के विरोध में आवाज बुलंद कर दी, जिसके चलते उनके मुख्यमंत्री पद की शपथ खटाई में पड़ गई। तभी अदालत का फैसला आ गया और उन्हें आय से अधिक संपत्ति रखने के जुर्म में जेल जाना पड़ा।

मगर जेल जाने से पहले शशिकला ने अपने विश्वासपात्र पलनीसामी को मुख्यमंत्री की गद्दी सौंप दी और अपने भतीजे दिनाकरण को पार्टी का महासचिव नियुक्त कर दिया। इस तरह जेल में रहते हुए भी उनका पार्टी और सत्ता पर नियंत्रण बना रहेगा। शशिकला के विरोध में इसलिए भी आवाजें उठीं कि उन्हें न तो कोई राजनीतिक अनुभव है और न प्रशासनिक। वे कभी चुनाव नहीं लड़ीं। फिर गैरकानूनी रूप से अथाह संपत्ति जमा करने की वजह से तमिलनाडु के लोगों में उनके प्रति नकारात्मक संदेश गया है। डीएमके इ सी बात को भुनाने की कोशिश कर रही है कि शशिकला ने पार्टी को बंधक बना लिया है और वे असंवैधानिक तरीके से सत्ता पर काबिज रहने की कोशिश कर रही हैं। अगर वह तमिलनाडु में पलनीसामी और शशिकला के विरोध में लगातार माहौल बनाए रखने और लोगों का मन बदलने में कामयाब रहती है, तो मौजूदा सरकार के लिए काम करना कठिन होगा। इसके साथ ही अन्नाद्रमुक से अलग हुए पन्नीरसेल्वम जैसे वरिष्ठ और जयललिता के करीबी रहे नेता भी पलनीसामी के लिए चुनौती पेश कर सकते हैं।

अब देखना है कि पलनीसामी कितना अपने विवेक से काम करते हैं और जयललिता के प्रति लोगों के मन में पैदा सम्मान को कितना बचाए रख पाते हैं। जैसा कि कहा जा रहा है, वे शशिकला की कठपुतली के तौर पर काम करेंगे, अगर ऐसा हुआ तो जल्दी ही राज्य में उनके खिलाफ माहौल बनेगा और उनके लिए देर तक सत्ता में टिके रहना मुश्किल होगा। फिर दिनाकरण के सामने भी चुनौती है कि वे पार्टी के लोगों को किस तरह साथ लेकर चलते हैं। अभी जो विधायक पलनीसामी के साथ खड़े हैं, उनमें पार्टी के प्रति निष्ठा हो सकती है, मगर पार्टी का संचालन मनमानी तरीके से होने पर वे विरोध में जा सकते हैं। मगर यह तभी संभव है जब पलनीसामी और दिनाकरण शशिकला के प्रभाव से मुक्त होकर और जयललिता के दिखाए रास्तों पर चलते हुए काम करें। माना तो यहां तक जा रहा है कि शशिकला ने इसलिए पलनीसामी को मुख्यमंत्री बनाया कि जब वे जेल से वापस आएं तो पलनीसामी उनके लिए मुख्यमंत्री की गद्दी छोड़ दें। अगर ऐसे तदर्थ भाव से वे काम करेंगे, तो न सरकार का कामकाज ठीक होगा और न पार्टी की साख बचेगी।

 

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