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आत्मघाती करतब

हाल के दिनों में सेल्फी लेते हुए या स्टंटबाजी करते हुए मौत की घटनाओं में इजाफा हुआ है।

Author January 18, 2017 4:25 AM
भारतीय रेलवे।

दिल्ली में अपनी स्टंटबाजी का वीडियो बनाते वक्त दो किशोर छात्रों की टेÑन से कट कर मौत हो गई। यह स्टंट वे अपनी वीडियो क्लिपिंग फेसबुक पर डालने के मकसद से कर रहे थे। इसे सामान्य दुर्घटना इसलिए नहीं कहा जा सकता, क्योंकि इसमें दोनों छात्र जानते-बूझते एक जोखिम-भरे करतब में खुद शामिल थे। यह असल में एक ऐसा हादसा है जो समाज में पसर रही एक ऐसी आदत या मनोवृत्ति की देन है जो यों तो खेल-खिलवाड़ की तरह दिखती है, पर कई बार खतरनाक शक्ल अख्तियार कर लेती है। गौरतलब है कि दुनिया में सेल्फी और स्टंटबाजी के चक्कर में मरने वालों की संख्या भारत में सबसे ज्यादा है। एक अध्ययन में यह पाया गया है कि सोशल मीडिया पर ‘लाइक्स’ और ‘कमेंट्स’ की भूख ऐसे कारनामों की पृष्ठभूमि में होती है।

हाल के दिनों में सेल्फी लेते हुए या स्टंटबाजी करते हुए मौत की घटनाओं में इजाफा हुआ है। जनवरी 2015 में मथुरा में तीन छात्रों की चलती टेÑन के सामने बाइक पर सवार होकर सेल्फी लेने के चक्कर में मौत हो गई थी। कानूनी तौर पर इस तरह के करतब करने या उसकी शूटिंग करने आदि की मनाही है। लेकिन जब कोई व्यक्ति खुद ऐसी हरकतें करने पर आमादा हो तो भले उसे कौन रोक सकता है। यह एक तरह की आत्मघाती प्रवृत्ति ही कही जाएगी। ताजा घटना के बारे में खबर है कि शनिवार की शाम अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन के बगल से गुजरने वाली रेलवे लाइन पर पड़ोस में रहने वाले क्रमश: चौदह और पंद्रह साल के दो छात्र टेÑन के सामने पटरियों पर खड़े होकर एक-दूसरे का वीडियो बना रहे थे। उनके साथ चार-पांच बच्चे दर्शक की भूमिका में थे। दोनों की योजना थी कि स्टंट शूट करने के बाद वे इसे फेसबुक पर डालेंगे। लेकिन वीडियो बनाते वक्त सामने से आ रही टेÑन से बचने के लिए दोनों बगल में दूसरे रेलवे ट्रैक पर कूदे। उन्हें यह ध्यान नहीं रहा कि दूसरे ट्रैक पर भी ईएमयू टेÑन आ रही थी। यही लापरवाही उन दोनों की मौत की वजह बनी।

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यह भी ध्यान देने योग्य है कि दोनों में से एक बच्चा अपने घर से ट्यूशन पढ़ने का बहाना बना कर निकला था और उसने कहीं किराए पर कैमरे का भी जुगाड़ किया था। यह घर-परिवार में बढ़ती झूठ की संस्कृति की तरफ भी इशारा करता है। चाहे फिल्में हों या टीवी धारावाहिक, या माता-पिता और अन्य बड़ों का व्यवहार, बच्चों के लिए ईमानदारी और सच्चाई का पाठ पढ़ने के मौके लगातार कम होते जा रहे हैं। जहां तक स्टंटबाजी या सेल्फी के सम्मोहन का सवाल है तो इसे सोशल मीडिया पर मिलने वाली वाहवाही ने बढ़ावा दिया है। फिल्मों, सर्कसों या धारावाहिकों में स्टंटबाजी देख कर किशोरों और बच्चों में उत्सुकता और जिज्ञासा भाव प्रबल हो उठता है। वे इसकी नकल करने की कोशिश करते हैं। लेकिन घरों के बड़े-बूढ़ों की तरफ से अक्सर उन्हें खबरदार भी किया जाता है। इस घटना का कोई सबक हो सकता है तो यही कि इसे कानून-व्यवस्था के मसले में न उलझा कर अपने घरेलू वातावरण को दुरुस्त करने, बच्चों की हरकतों पर नजर रखने और मां-बाप को अपना आचरण बेहतर करने की जरूरत है।

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