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आतंक के अड््डे

सलाहुद््दीन ने पाकिस्तान के एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कई दावे किए हैं। कबूल किया है कि उसने भारत पर कई आतंकी हमले कराए, और खासकर भारतीय सुरक्षा बल उसके निशाने पर रहे हैं।
Author July 5, 2017 04:01 am
वैश्विक आतंकवादी सैयद सलाहुद्दीन (File Photo)

हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाहुद््दीन की टिप्पणियों ने पाकिस्तान को एक बार फिर बेनकाब कर दिया है। सलाहुद््दीन ने पाकिस्तान के एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कई दावे किए हैं। कबूल किया है कि उसने भारत पर कई आतंकी हमले कराए, और खासकर भारतीय सुरक्षा बल उसके निशाने पर रहे हैं। साथ ही उसने यह भी कहा है कि आतंकी हमलों के लिए उसे पाकिस्तान में बड़ी आसानी से हथियार हासिल हो जाते हैं। इस खुलासे से शायद ही किसी को हैरानी हुई हो, पर इससे सीमापार आतंकवाद को लेकर भारत के आरोपों की एक बार फिर पुष्टि हुई है। भारत यह कहता आया है कि उसके खिलाफ सक्रिय आतंकी संगठनों को पाकिस्तान में संरक्षण मिलता है। यह सलाहुद््दीन के बयान से भी जाहिर है। सलाहुद््दीन को हाल में ट्रंप प्रशासन ने वैश्विक आतंकी घोषित किया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के दौरे पर थे। ट्रंप प्रशासन की इस घोषणा को स्वाभाविक ही मोदी की अमेरिका यात्रा की एक खास कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा गया। मूल रूप से क श्मीर के बडगाम का सलाहुद््दीन 1989 में सीमापार चला गया और पिछले सत्ताईस वर्षों से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियां चलाता रहा है। भारत में बहुत सारे आतंकी हमलों के पीछे उसका हाथ रहा है। इन आतंकी वारदातों में सैकड़ों नागरिक और सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं। सलाहुद््दीन ने पिछले साल सितंबर में कहा था कि वह कश्मीर समस्या के शांतिपूर्ण समाधान की कोशिश को रोक देगा। उसने कश्मीर में फिदायीन हमलावरों को प्रशिक्षण देने की भी धमकी दी थी।

जैसा कि कई रणनीतिक विश्लेषकों ने संकेत किया है, सलाहुद््दीन के कुछ दावे अतिरंजित या शेखी बघारने के लिए किए गए हो सकते हैं। जैसे ताजा बयान में उसने यह भी कहा है कि वह भारत में कहीं भी किसी भी वक्त आतंकी हमला करवाने में सक्षम है। पर पाकिस्तान से मदद मिलने के उसके दावे पर किसी को तनिक शक नहीं है। उसके खुलासे के बाद पाकिस्तान सरकार को चाहिए था कि सलाहुद््दीन को गिरफ्तार कर लिया जाता और भारत को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती। इससे यह संदेश जाता कि पाकिस्तान आतंकी गतिविधियों के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल कतई नहीं होने देगा, और जो ऐसा करेगा उसे बख्शा नहीं जाएगा। पर पाकिस्तान का रवैया इससे उलट, सलाहुद््दीन के बचाव का है। जैसे ही ट्रंप प्रशासन ने सलाहुद््दीन को वैश्विक आतंकी घोषित किया, पाकिस्तान ने कहा कि जो व्यक्ति कश्मीरियों के आत्म-निर्णय के अधिकार का समर्थन करते हैं उन्हें आतंकी कहना सर्वथा अनुचित है। सलाहुद््दीन के संदर्भ में ऐसा तर्क वही दे सकता है जो शांतिपूर्ण संघर्ष और आतंकवाद का फर्क न जानता हो, या वास्तविकता पर परदा डालना चाहता हो। पाकिस्तान की प्रतिक्रिया परोक्ष रूप से सलाहुद््दीन को महिमामंडित करने की कोशिश है।

एक दफा मुशर्रफ ने यह स्वीकार किया था कि उनके कार्यकाल में कश्मीर को लेकर आतंकवादी गतिविधियां चलाने वाले संगठनों को मदद मिलती रही। अन्य हुक्मरानों के समय भी यह हुआ होगा। जब मुशर्रफ की स्वीकारोक्ति सामने आई, तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चेत जाना चाहिए था। पर कहीं कोई हरकत नहीं हुई। अमेरिका भी खामोश रहा। अब अमेरिका पाकिस्तान-समर्थित आतंकवाद को लेकर पहले से सख्त नजर आता है, मगर पाकिस्तान को सामरिक, गैर-सामरिक, दोनों मदों में अमेरिकी मदद, थोड़े-बहुत कतर-ब्योंत के साथ, अब भी जारी है। अमेरिका समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद केखिलाफ ज्यादा संजीदा होना पड़ेगा।

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