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संपादकीय: संघर्ष अविराम

पिछले साल जुलाई में रूस के उफा शहर में नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ की मुलाकात में सरहद पर अमन बनाए रखने का मसला ही सबसे प्रमुख था।

Author September 21, 2016 12:01 AM
भारतीय सेना का जवान।

एक बार फिर पाकिस्तान ने संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है। यों इस तरह की सैकड़ों घटनाएं पिछले दो-तीन साल में हुई हैं। लेकिन मंगलवार को पाकिस्तान की तरफ से संघर्ष विराम का ताजा उल्लंघन ऐसे समय हुआ जब दोनों देशों के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। जम्मू-कश्मीर के उड़ी सेक्टर में सेना के शिविर पर हुए आतंकी हमले में सत्रह सैनिक शहीद हो गए। इस हमले को लेकर स्वाभाविक ही देश में आक्रोश का माहौल है। पाकिस्तान को कूटनीतिक तौर पर घेरने से लेकर उसके विरुद्ध सीधी कार्रवाई करने तक की मांग उठी है। ऐसे समय नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सैनिकों का गोलीबारी करना उकसाने वाली कार्रवाई ही कहा जाएगा। आखिर इसके पीछे इरादा क्या हो सकता है? ऐसा लगता है कि बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कश्मीर में बढ़े तनाव को पाकिस्तान कायम रखना चाहता है। फिर, कई बार नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी का मकसद भारतीय सैनिकों को उलझा कर घुसपैठियों का काम आसान करना होता है। गौरतलब है कि करीब उसी वक्त उड़ी सेक्टर के लच्छीपुरा क्षेत्र में सेना से मुठभेड़ में आठ आतंकवादी मारे गए। संघर्ष विराम की पिछली घटना इसी महीने के पहले सप्ताह में हुई थी, जब पाकिस्तानी सैनिकों ने पुंछ में भारतीय सेना के ठिकानों पर मोर्टार से गोले दागे थे।

ऐसी घटनाओं से यह सवाल उठता है कि आखिर संघर्ष विराम समझौते का हासिल क्या है। पर 2003 में वाजपेयी सरकार के समय हुए इस समझौते की, दो तीन-तीन साल पहले तक, सीमा पर शांति कायम रखने में अहम भूमिका रही। नवंबर 2003 से पहले सरहद पर होने वाली झड़पों से तुलना करने पर स्थिति में फर्क साफ नजर आता था। मगर दो-तीन साल से संघर्ष विराम समझौते के उल्लंघन के आंकड़े लगातार बढ़ते गए हैं। पिछले साल संघर्ष विराम उल्लंघन की 253 घटनाएं अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हुर्इं और 152 घटनाएं नियंत्रण रेखा पर। इनमें सोलह नागरिक मारे गए और इकहत्तर घायल हुए।

विडंबना यह है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए शीर्ष स्तर हुई बैठकों और रजामंदियों के बावजूद यह सिलसिला जारी रहा है। पिछले साल जुलाई में रूस के उफा शहर में नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ की मुलाकात में सरहद पर अमन बनाए रखने का मसला ही सबसे प्रमुख था। इसके बाद दोनों तरफ के सुरक्षा से जुड़े आला अफसरों की बैठकें हुर्इं और यह तय किया गया कि गलती या गलतफहमी से भी ऐसी कोई घटना न होने दी जाए। और इसके लिए अवांछित गतिविधि की शंका होने पर फौरन एक दूसरे को सूचित करने, स्पष्टीकरण करने और कोई अप्रिय स्थिति पैदा होने से पहले ही उसे रोकने के एहतियाती कदम उठाने की सहमति बनी।

इसका असर कुछ समय तक जरूर रहा, मगर संघर्ष विराम के उल्लंघन की घटनाएं फिर होने लगीं। दरअसल, दोनों देशों के बीच जब-तब तनाव उभरने के साथ ही सीमापार से होने वाली घुसपैठ से भी इनका संबंध है। और इस तरह, कश्मीर घाटी में होने वाली घुसपैठ तथा भारत को निशाने पर रख कर चलने वाली आतंकवादी गतिविधियों को पाकिस्तानी सेना की मदद या प्रोत्साहन का ही संकेत मिलता है। घुसपैठ की कई घटनाएं पंजाब से लगती सीमा की तरफ से भी हुई हैं। बहरहाल, ऐसे समय जब पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई के विकल्पों पर भारत सोच रहा है, संघर्ष विराम के उल्लंघन की घटना पाकिस्तान की सीनाजोरी को ही दर्शाती है। भारत जो भी कार्रवाई करे, मगर जाहिर है कि सरहद पर मुस्तैदी बढ़ाना एक अनिवार्य तकाजा है।

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