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अब तक जहां एक मोबाइल कंपनी को दूसरी कंपनी से इंटरकनेक्ट करने पर प्रति मिनट चौदह पैसे चुकाने पड़ते थे, नए फैसले के बाद यह महज छह पैसे प्रति मिनट रह जाएगा।

Author Published on: September 21, 2017 1:32 AM
भारती एयरटेल और रिलायंस जियो। (Logo picture)

भारतीय दूरसंचार नियामक अधिकरण (ट्राइ) का ताजा फैसला मोबाइल ग्राहकों के लिए एक तोहफे की तरह है, क्योंकि एक अक्तूबर से इसके अमल में आने के बाद कॉल दरों और इंटरनेट डाटा के शुल्क में काफी गिरावट आने की संभावना है। लेकिन मोबाइल कंपनियों के बीच शायद इससे नया टकराव खड़ा होगा। दरअसल, ट्राइ ने ज्यादातर मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों को एक बड़ा झटका देते हुए इंटरकनेक्ट शुल्क की दरों में भारी कटौती की है, जिसका सीधा असर कुछ कंपनियों के राजस्व पर पड़ने वाला है। अब तक जहां एक मोबाइल कंपनी को दूसरी कंपनी से इंटरकनेक्ट करने पर प्रति मिनट चौदह पैसे चुकाने पड़ते थे, नए फैसले के बाद यह महज छह पैसे प्रति मिनट रह जाएगा। अगले दो साल में इस शुल्क को पूरी तरह खत्म करने की योजना है। जाहिर है, मोबाइल का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए ट्राइ का फैसला फायदेमंद साबित होगा। लेकिन देखने की बात यह होगी कि मोबाइल सेवा देने वाली कंपनियों पर इस फैसले का क्या असर पड़ेगा और वे इसका सामना कैसे करेंगी।

पिछले कुछ सालों के दौरान मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियां नए ग्राहकों को जोड़ने के लिए उनके सामने ज्यादा आकर्षक योजनाएं पेश करती रही हैं। मोबाइल पर कॉल और इंटरनेट डाटा की दरों में कमी उनमें सबसे अहम पेशकश रही है। इस बीच कॉल की दरों में तेजी से गिरावट आई तो इसकी वजह से अलग-अलग मोबाइल कंपनियों के बीच प्रतियोगिता में जबर्दस्त बढ़ोतरी ही थी। इसके लिए कुछ कंपनियों ने शहरों से लेकर दूरदराज तक के इलाकों में मोबाइल नेटवर्क की आसान पहुंच के मकसद से अपने टावर लगाए। इससे विस्तृत इलाकों में मजबूत नेटवर्क वाली एयरटेल और वोडाफोन जैसी कंपनियों के न केवल ग्राहकों की तादाद में बढ़ोतरी हुई, बल्कि दूसरी कंपनियों के नेटवर्क से कॉल जोड़ने के एवज मिलने वाली रकम उनके राजस्व का एक बड़ा हिस्सा हो गई। लेकिन कुछ समय पहले मुफ्त कॉल और इंटरनेट डाटा की पेशकश के बाद रिलायंस जियो के ग्राहकों की संख्या में अचानक बहुत तेजी से इजाफा हुआ। दूसरी ओर, खबरों के मुताबिक भारती एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया सेल्युलर के ग्राहकों की संख्या करीब पचास लाख घट गई।

जाहिर है, इससे इन कंपनियों के सामने एक नई चुनौती खड़ी हुई है। जबकि आमतौर पर इन कंपनियों के नेटवर्क क्षेत्र का विस्तार ज्यादा है और जियो की मुफ्त कॉल उन्हीं के जरिए ग्राहकों तक पहुंचती हैं। दरअसल, अपने बढ़ते ग्राहकों के अनुपात में रिलायंस के टावर सभी इलाकों में नहीं थे और उसे दूसरी कंपनियों के नेटवर्क का सहारा लेना पड़ता था। रिलायंस के लिए यह फिलहाल एक महंगा सौदा था। यानी ट्राइ ने जिस तरह इंटरकनेक्ट दरों में कमी की है, उसका सबसे ज्यादा फायदा रिलायंस को ही मिलने वाला है और नुकसान बाकी दूसरी कंपनियों को उठाना पड़ेगा। शायद यही वजह है कि पुरानी मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों और रिलायंस जियो के बीच इंटरकनेक्ट शुल्क टकराव का मुद्दा बना हुआ था। भारती एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया सेल्युलर ने इस शुल्क में या तो इजाफा करने या फिर मौजूदा स्तर पर बरकरार रखने, जबकि जियो इसे खत्म करने की मांग कर रही थी। अब ज्यादा संभावना यही है कि ये कंपनियां ट्राइ की इस कवायद को चुनौती दें। जो हो, ट्राइ के ताजा फैसले से आम ग्राहकों को सस्ती कॉल दरों और इंटरनेट डाटा का फायदा मिलेगा। लेकिन सवाल है कि क्या इसमें लंबे समय तक स्थिरता बनी रहेगी या फिर इस बाजार पर वर्चस्व के बाद ग्राहकों को कई स्तरों पर राहत देने वाली कोई कंपनी नई शर्तों के साथ ग्राहकों के लिए फिक्र पैदा करेगी!

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