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मेक्सिको में भूकम्प

उत्तरी अमेरिका के देश मेक्सिको में बारह दिन के भीतर दूसरी बार आए भीषण भूकम्प में ढाई सौ लोगों की मौत हुई है, जिनमें इक्कीस स्कूली बच्चे शामिल हैं।

Author September 21, 2017 1:25 AM
मलबे में दबे बच्चों को बाहर निकालने की कोशिश करते बचावकर्मी। (Photo Source: AP)

उत्तरी अमेरिका के देश मेक्सिको में बारह दिन के भीतर दूसरी बार आए भीषण भूकम्प में ढाई सौ लोगों की मौत हुई है, जिनमें इक्कीस स्कूली बच्चे शामिल हैं। मृतकों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। बड़ी संख्या में लोग चोटिल हैं, जिनका इलाज चल रहा है। सैकड़ों निजी और सरकारी इमारतें ध्वस्त हो गई हैं। भूकम्प की तीव्रता 7.1 आंकी गई है। इस भूकम्प से ठीक बारह दिन पहले देश के दक्षिण हिस्से में आए एक दूसरे शक्तिशाली भूकम्प में भी नब्बे लोग मारे गए थे। हालिया भीषण भूकम्प में मची तबाही ने 1985 के शक्तिशाली भूकम्प की काली यादों को ताजा कर दिया है। इसे एक दुर्योग ही कहा जाएगा कि 1985 में इसी तारीख को एक भयानक भूकम्प मेक्सिको की धरती को डावांडोल कर गया था, जिसमें हजारों लोग मारे गए थे। वह इस देश का अब तक का सबसे भयावह भूकम्प था। मंगलवार को आए भूकम्प में अकेले राजधानी में चौवालीस इमारतें ध्वस्त हुई हैं।

सबसे ज्यादा दिल दहला देने वाला दृश्य एक प्राइमरी स्कूल का था। राजधानी मेक्सिको सिटी के दक्षिणी हिस्से में स्थित इस स्कूल की तीन मंजिलें ढह गर्इं और छात्र तथा शिक्षक इसके नीचे फंसे रह गए। इसमें इक्कीस छात्रों के मरने की खबर है। राहत कार्य में भारी संख्या में सैनिक, पुलिस, असैन्य स्वयंसेवी और खोजी कुत्ते लगाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है और जगह-जगह से मलबे में फंसे हुए लोगों की जानकारियां आ रही हैं। कुछ चश्मदीदों ने पत्रकारों को बताया कि भूकम्प की वजह से दहशत में आए लोग सड़कों पर निकल आए। मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। घनी आबादी वाली मेक्सिको सिटी और आसपास के राज्यों में भूकम्प की वजह से देखते ही देखते कई इमारतें ध्वस्त हो गर्इं और हर ओर मलबा ही मलबा नजर आने लगा। देश के संघीय गृहमंत्री मिगुएल एंजेल ओसोरियो चोंग ने बताया कि अधिकारियों को अब भी मलबे में फंसे हुए लोगों की जानकारियां मिल रही हैं। इस देश की मुसीबत की घड़ी में दुनिया के तमाम देशों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाने का एलान भी किया है।

मगर लाख टके का सवाल है कि चांद और मंगल जैसे सितारों की खाक छान लेने और पाताल की गहराइयों को नाप लेने के बावजूद आखिर हमारा ज्ञान-विज्ञान धरती की सतह के नीचे की हलचलों को पढ़ने में अभी तक क्यों नाकाम है! वैज्ञानिक इस दिशा में लंबे समय से कार्यरत हैं। पिछले दिनों अमेरिका ने एक ऐसा उपग्रह भी छोड़ा था जो संभावित भूकम्प के बारे में बता सके। कई बार ऐसा हुआ भी है कि कुछ जगहों पर भूकम्प की भविष्यवाणी सही भी निकली और लोगों के जानमाल की सुरक्षा भी हुई। लेकिन ज्यादातर मामलों में यही देखने को मिला कि भूकम्प आज भी एक दुखद पहेली बना हुआ है। इंडोनेशिया, जापान जैसे देशों में, जहां नियमित भूकम्प आते हैं, वहां तो कुछ हद तक पूर्वानुमान कर लिया जाता है लेकिन दूसरी जगहों पर यह संभव नहीं पा हो रहा है। वास्तव में देखा जाए तो भूकम्प हमारी समस्त खोजों और आविष्कारों के सामने एक कठिन चुनौती बने हुए हैं। यह एक ऐसी प्राकृतिक आपदा है, जिसके सामने मनुष्य बिल्कुल लाचार नजर आने लगता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि जैसे विज्ञान ने दुनिया के तमाम रहस्यों पर से परदा उठाया है, वैसे ही इस पर भी वह एक दिन काबू पा लेगा। वैज्ञानिकों को चाहिए एक बार मिल कर वे कुछ ऐसा प्रयास करें जिससे इस ‘आकस्मिक दानव’ से निजात मिल सके।

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