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घाटी में घुसपैठ

कश्मीर में घुसपैठ और हिंसा का सिलसला जारी है। नियंत्रण रेखा पर तनाव का माहौल है।

Author Published on: May 22, 2017 5:53 AM
जम्मू और कश्मीर।

घाटी में घुसपैठ

कश्मीर में घुसपैठ और हिंसा का सिलसला जारी है। नियंत्रण रेखा पर तनाव का माहौल है। शनिवार को बड़ी संख्या में सीमा पार से आतंकियों ने घुसपैठ करने की कोशिश की, जिसमें मुठभेड़ के दौरान तीन सुरक्षाकर्मी और तीन आतंकी मारे गए। जब भी ऐसी घटना होती है, पाकिस्तान उसमें अपना हाथ होने से साफ इनकार कर देता है। मगर हकीकत है कि वह लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन करता आ रहा है। वहां पनाह और प्रशिक्षण पाए आतंकी पाकिस्तानी सेना की मदद से भारत के हिस्से वाले कश्मीर में घुसने का प्रयास करते और सुरक्षाबलों को निशाना बनाते हैं। पठानकोट और उड़ी के सैन्य ठिकानों पर हुए आतंकी हमलों के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की मुहिम चलाई। अनेक देशों ने पाकिस्तान को चेतावनी भी दी, मगर फिर भी वह आतंकवाद रोकने का कोई प्रयास करता नजर नहीं आ रहा। बल्कि इसके उलट उसने कश्मीर में अस्थिरता और आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देना तेज कर दिया है।

भारत सरकार हर आतंकी घटना के बाद पाकिस्तान को सबक सिखाने का दम भरती है, कुछ वादे किए और इरादे जताए जाते हैं। मगर कोई संतोषजनक नतीजा नहीं निकल पाता। दोनों देशों के बीच शांति प्रयासों पर विराम लगा हुआ है। किसी मसले पर कोई बातचीत नहीं हो पाती। भारत की शर्त है कि पाकिस्तान पहले अपने यहां आतंकवाद पर लगाम लगाए और पाकिस्तान शर्त रखता है कि भारत पहले कश्मीर मसले को हल करे फिर बाकी मुद्दों पर बातचीत हो। इस तनातनी का असर नियंत्रण रेखा पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच दिखाई देता है। पाकिस्तान को लगता है कि वह कश्मीर घाटी में तनाव बनाए रख कर भारत को परेशान कर सकता है। इसके लिए वह अलगाववादी नेताओं को उकसाता और अपने यहां प्रशिक्षण पाए आतंकियों को सीमा पार भेजने की कोशिश करता है। इस पर लगाम लगाने का भारत के पास कोई उपाय नहीं है। कश्मीर में शांति के लिए जो प्रयास होने चाहिए, वे भी रुके हुए हैं।

छिपी बात नहीं है कि पाकिस्तानी हुक्मरान वहां की सेना, कट्टरपंथी ताकतों और खुफिया एजंसी के दबाव के चलते कोई व्यावहारिक फैसला नहीं कर पाते। फिर यह भी कि गरीबी, अशिक्षा और विकास कार्यों की तरफ से अवाम का ध्यान हटाने के लिए उसे भारत के साथ तनाव का माहौल बनाए रखना ज्यादा मुफीद नजर आता है। भारत अनेक बार वहां चल रहे आतंकी प्रशिक्षण शिविरों, पनाह पाए कुख्यात आतंकियों और भारत में हुए आतंकी हमलों में उनके हाथ होने के पुख्ता सबूत सौंप चुका है, पर वह उन्हें खारिज करता रहा है। अभी कुलभूषण जाधव के जरिए अंतरराष्ट्रीय मंचों के सामने यही जाहिर करने की कोशिश कर रहा है कि भारत उसे अस्थिर बनाने का प्रयास कर रहा है। इस तनातनी के माहौल में सीमा पर सीधा भले न चल रहा हो, पर एक अघोषित युद्ध का-सा माहौल बना हुआ है। आए दिन सुरक्षाबलों के लोग मारे जा रहे हैं। ऐसे में भारत सरकार से कोई स्पष्ट और व्यावहारिक पाकिस्तान नीति बनाने की अपेक्षा स्वाभाविक है। जहां तक हो सके दोनों देशों के बीच राजनीतिक स्तर पर संवाद बने रहना चाहिए और जहां जरूरत हो, सेना को मुकाबले के लिए तैयार रहना चाहिए। कश्मीर घाटी में भी लोगों का मन बदलने का प्रयास होते रहना चाहिए, ताकि वे आतंकियों और घुसपैठियों को समर्थन देना बंद करें।

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