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संपादकीय: मजाक नहीं तंज

बारिश के बावजूद जॉन कैरी ने विद्यार्थियों को संबोधित करने का अपना कार्यक्रम रद्द नहीं किया और जाम का सामना करते हुए देर से सही, आइआइटी पहुंच गए।

Author August 31, 2016 11:13 PM
अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी। (Source- ANI)

अमेरिका के विदेश मंत्री भारत की यात्रा पर आए हों तो उम्मीद यही होती है कि वे द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मसलों पर बात करेंगे। मगर वे दिल्ली की सड़कों पर बरसात की वजह से ‘नाव चलने’ की जिज्ञासा जाहिर करें, तो यह विचित्र लगता है। उनकी बातों का संदर्भ देखा जाए तो यह दिल्ली सरकार और इसके संबंधित महकमों पर एक सख्त टिप्पणी है, जो यहां की समूची व्यवस्था को आईना दिखाती है। दरअसल, जॉन कैरी जब दिल्ली के आइआइटी के विद्यार्थियों को संबोधित करने निकले तो उन्हें कई घंटे तक सड़क पर जाम की वजह से फंसे रहना पड़ा, क्योंकि भारी बरसात की वजह से सड़कों पर चारों तरफ पानी भरा था और वाहन लगभग ठहरे हुए थे।

बारिश के बावजूद जॉन कैरी ने विद्यार्थियों को संबोधित करने का अपना कार्यक्रम रद्द नहीं किया और जाम का सामना करते हुए देर से सही, आइआइटी पहुंच गए। वहां उन्हें हैरान करने वाली बात यह थी कि जिस जाम ने उन्हें घंटों सड़क पर फंसाए रखा, वहां भारी संख्या में विद्यार्थी उन्हें सुनने कैसे पहुंचे! इसलिए उन्होंने थोड़ा विनोद करते हुए विद्यार्थियों से कहा कि ‘पता नहीं, आप लोग यहां तक कैसे पहुंचे! जरूर ही आप लोगों को नाव की जरूरत पड़ी होगी!’ पहली नजर में कोई भी इस बात को सुन कर हंस पड़ेगा और इसे महज मजाक बताएगा। जॉन कैरी की मंशा थी भी यही। लेकिन मजाक में कही गई कोई बात कभी-कभी बड़े सवाल छोड़ जाती है।

हर साल बरसात में दिल्ली या दूसरे बड़े शहरों की क्या हालत रहती है, यह किसी से छिपा नहीं है। घंटे या आधे घंटे की बरसात के बाद सड़कों पर पानी भर जाता है और भारी जाम में लोग घंटों फंसे रहते हैं। इससे न सिर्फ उत्पादन के मोर्चे पर बहुत सारी श्रम-शक्ति बर्बाद होती है, बल्कि कितने ही लोगों को अनेक तरह के नुकसान उठाने पड़ते हैं। दफ्तरों में या काम की जगहों पर देर से पहुंचने के चलते कंपनियों की ओर से लोगों की छुट्टियां या मजदूरी काट लिया जाना आम बात है। बीमार लोग जान जाने तक का जोखिम उठा कर सड़कों पर निकलते हैं। यह समूची स्थिति सिर्फ इसलिए होती है कि जल निकासी के इंतजाम में भारी लापरवाही बरती जाती है। हो सकता है कि कई बार भारी बारिश के पानी का दबाव संभालना मुश्किल होता है, लेकिन क्या यह समस्या इतनी गंभीर होनी चाहिए कि थोड़ी देर की बरसात समूचे शहर में बाढ़ जैसी स्थिति बना दे और सब कुछ स्थिर कर दे? बिना बरसात के भी जाम नालों का पानी सड़कों पर बहने से उपजी समस्या पहले ही एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

सामान्य दिनों के अलावा खासतौर पर बरसात के पानी की वजह से जाम लगने वाले ठिकानों की पहचान का अच्छा मौका मुहैया कराता है। शहरी नियोजन का यह कौन-सा स्वरूप है कि बरसात या दूसरी वजहों से सड़कों का ठहर जाना लंबे समय से एक आम समस्या बना हुआ है? मगर सरकारों या संबंधित महकमों को आधुनिक तकनीकी या योजनाबद्ध विकास के जरिए इस समस्या का हल करना जरूरी नहीं लगता है। उम्मीद है कि अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी के विनोद को तंज के तौर पर लिया जाएगा और एक ठोस कार्यक्रम के जरिए दिल्ली और दूसरे तमाम शहरों की सड़कों को बरसात की बाढ़ और जाम से निजात दिलाई जाएगी।

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