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संपादकीय: फिर डोकलाम

पिछले साल के डोकलाम विवाद के बाद हाल में पहली बार चीन ने भूटान के साथ सीमा विवाद पर चर्चा की है। चीन के उपविदेश मंत्री ने कुछ दिन पहले भूटान की यात्रा की और उसके साथ कई समझौते भी किए। भूटान ने डोकलाम में चीनी गतिविधियों का विरोध किया था और भारत के साथ एकजुटता दिखाई थी।

Author July 28, 2018 12:45 AM
चीन, भूटान व भारत की सीमा डोकलाम में मिलती है।

चीन द्वारा डोकलाम में फिर से गतिविधियां शुरू करने की खबरें अगर सही हैं तो यह भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है। पिछले साल डोकलाम विवाद को लेकर करीब ढाई महीने तक दोनों देशों के बीच जिस तरह का गतिरोध चला था, उसके बाद से ही यह मुद्दा और क्षेत्र भारत के लिए संवेदनशील हो गया है। इसलिए डोकलाम में अगर चीन की किसी भी तरह की हलचल या गतिविधि की भनक मिलती है तो भारत के लिए चौंकना और सतर्क होना स्वाभाविक है। दरअसल, एक अमेरिकी सांसद ने यह दावा करते हुए चौंकाने वाला खुलासा किया है कि चीन डोकलाम में गुपचुप ढंग से अपना काम कर रहा है। इस सांसद ने यह भी कहा कि चीनी गतिविधियों को न तो भारत रोक रहा है और न भूटान। ऐसे में हिमालयी क्षेत्र में उसके बढ़ते कदम चिंता का विषय हैं। बात में दम और गंभीरता इसलिए नजर आती है क्योंकि अमेरिकी सांसद ने यह बयान कोई चलते-फिरते या हल्के में नहीं दिया है, बल्कि एशिया प्रशांत मामलों से जुड़ी सदन की समिति के सामने उन्होंने यह बात कही है। अमेरिकी सांसद का कहना है कि चीन के ये कदम वैसे ही हैं जैसे दक्षिण चीन सागर में वह करता आ रहा है।

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हालांकि भारत ने अमेरिकी सांसद के इस बयान को खारिज कर दिया है। सरकार ने साफ किया कि डोकलाम और उसके आसपास जिस जगह चीन के साथ तनातनी हुई थी, वहां कोई नया घटनाक्रम नहीं हुआ है और पूरे इलाके में यथास्थिति बनी हुई है। सरकार के इस भरोसे से राहत महसूस की जा सकती है। लेकिन चीन जिस तरह गुपचुच तरीके से, धोखेसे अपने कदम बढ़ाता आया है, उससे उपजे विवाद जगजाहिर रहे हैं। इसलिए चीन की गतिविधियों के बारे में कोई भी सूचना संशय पैदा करती है। कहने की जरूरत नहीं कि पिछले साल डोकलाम में चीन ने यही किया था। इस क्षेत्र में वह सड़क निर्माण गतिविधियां चलाता हुआ आगे तक बढ़ आया था। लेकिन जब भारत ने इसका विरोध किया तो उसने विवाद खड़ा कर दिया। भारतीय सैनिकों के विरोध पर चीनी सैनिक हाथापाई पर उतर आए थे। ढाई महीने तक वार्ताओं के दौर के बाद यथास्थिति बनाए रखने की शर्त पर ही उस क्षेत्र से फौजें हटीं। लेकिन डोकलाम को एक विवादित क्षेत्र बनाने में चीन ने कोई कसर नहीं छोड़ी।

पिछले साल के डोकलाम विवाद के बाद हाल में पहली बार चीन ने भूटान के साथ सीमा विवाद पर चर्चा की है। चीन के उपविदेश मंत्री ने कुछ दिन पहले भूटान की यात्रा की और उसके साथ कई समझौते भी किए। भूटान ने डोकलाम में चीनी गतिविधियों का विरोध किया था और भारत के साथ एकजुटता दिखाई थी। इसमें कोई शक नहीं कि डोकलाम विवाद पर चीन भूटान को अपनी तरफ करने के लिए सारे कदम उठाएगा। इसलिए चीनी मंत्री की हाल की भूटान यात्रा के बाद की गतिविधियों पर भारत को नजर रखने की जरूरत है। चीन इस समय चारों ओर तेजी से अपना दबदबा बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। पाकिस्तान के साथ उसके बढ़ते रिश्ते और चीन-पाक आर्थिक गलियारा भारत के लिए पहले ही चिंता का करण हैं। इसमें संदेह नहीं कि सरकार देश की सुरक्षा को प्रभावित करने वाली घटनाओं पर नजर रखती है और इसकी सुरक्षा के लिए सभी जरूरी उपाय करती है। लेकिन तब भी हमें डोकलाम जैसे विवाद का सामना करना पड़ा है। ऐसे में अमेरिकी सांसद के बयान से निकली आशंकाओं पर गौर करना वक्त की जरूरत है।

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