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सफाई और सियासत

निगम पार्षदों का कहना है कि दिल्ली सरकार ने चूंकि चौथे वेतन आयोग के मुताबिक पैसा जारी नहीं किया है, इसलिए वेतन और भत्तों को लेकर कर्मचारियों में रोष है।

Author January 12, 2017 3:27 AM
आप का अगला लक्ष्य 2017 का दिल्ली नगर निगमों का चुनाव है। (फ़ाइल फ़ोटो- रॉयटर्स)

पूर्वी दिल्ली नगर निगम के कर्मचारियों की हड़ताल के चलते पिछले एक हफ्ते से पूरा इलाका कचराघर जैसा बन गया है, पर राजनीतिक दलों को इस समस्या से पार पाने के उपायों पर विचार करने के बजाय राजनीतिक रोटी सेंकना ज्यादा मुफीद जान पड़ रहा है। ऐसे में राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने दखल देते हुए केंद्र, दिल्ली सरकार और मान्यता प्राप्त कर्मचारी संघों से जवाब तलब किया है। निगम के कर्मचारी पिछले तीन महीने से वेतन और भत्तों का भुगतान न हो पाने के कारण हड़ताल पर चले गए हैं। दिल्ली सरकार का कहना है कि उसने कर्मचारियों के वेतन और भत्तों का भुगतान कर दिया है, मगर निगम के पार्षद वह पैसा कर्मचारियों को नहीं दे रहे हैं। चूंकि पूर्वी दिल्ली नगर निगम में भाजपा के पार्षदों की संख्या अधिक है, इसलिए आम आदमी पार्टी सरकार के लिए यह आरोप लगाना ज्यादा आसान हो गया है। निगम पार्षदों का कहना है कि दिल्ली सरकार ने चूंकि चौथे वेतन आयोग के मुताबिक पैसा जारी नहीं किया है, इसलिए वेतन और भत्तों को लेकर कर्मचारियों में रोष है।

दिल्ली में आम आदमी पार्टी और केंद्र की भाजपा सरकार के बीच शुरू से टकराव की स्थिति बनी रहती है। अक्सर ये दोनों एक-दूसरे पर दोषारोपण करते रहते हैं। इसलिए स्वाभाविक रूप से कुछ लोग पूर्वी नगर निगम के कर्मचारियों की हड़ताल और उससे उपजी समस्या को भी इसी तनातनी का नतीजा मान रहे हैं। पहले भी कई बार वेतन और भत्तों का भुगतान न होने के कारण नगर निगमों के कर्मचारी हड़ताल पर जा चुके हैं, जिसके चलते लोगों को परेशानी उठानी पड़ी है। पूर्वी दिल्ली नगर निगम के इलाके में हर दिन करीब ढाई हजार मीट्रिक टन कचरा निकलता है, जिसे निगम के कर्मचारी ढलाव तक पहुंचाने का काम करते हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि पिछले एक हफ्ते से कचरा न उठाए जाने के कारण उस इलाके का क्या हाल होगा। कचराघर भरे हुए हैं। रिहाइशी कॉलोनियों के लोगों की चिंता बढ़ गई है कि अगर यह हड़ताल और लंबी चली तो उन्हें गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।

यह स्थिति तब है जब केंद्र सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत साफ-सफाई पर बल दे रही है। मगर दिल्ली में ही नगर निगम कर्मियों के विरोध के चलते स्वच्छता अभियान पर सवालिया निशान लग रहा है। दिल्ली सरकार का कहना है कि वह पूर्वी दिल्ली नगर निगम को एक सौ उन्नीस करोड़ रुपए अग्रिम भुगतान कर चुकी है, पर कर्मचारियों को वह पैसा नहीं मिल पा रहा है तो कहां गड़बड़ी हो रही है, इसकी जांच के लिए कोई उपाय तलाशने की जरूरत क्यों नहीं समझी जा रही। दिल्ली नगर निगम के कामकाज को लेकर अक्सर अंगुलियां उठती रही हैं। उसमें इस कदर भ्रष्टाचार व्याप्त है कि सफाई कर्मियों की भर्ती से लेकर उनके भुगतान आदि में अनियमितताएं उजागर हैं। इससे दिल्ली में साफ-सफाई, कचरा निपटान आदि की चुनौती लगातार बनी रहती है। तिस पर विचित्र है कि इन तमाम कमजोरियों को दुरुस्त करने और साफ-सफाई की व्यवस्था चुस्त बनाने की दिशा में प्रयास करने के बावजूद दिल्ली सरकार और नगर निगमों के पार्षद राजनीतिक नफे-नुकसान में उलझे हुए हैं। अगर निगम पार्षदों को स्वच्छ भारत अभियान और दिल्ली सरकार को बीमारियों से निपटने की चिंता है तो उन्हें आपसी टकराव के बजाय कोई व्यावहारिक और स्थायी समाधान निकालने की तरफ कदम बढ़ाना चाहिए।

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