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संपादकीय : बीच बहस में

टीवी कार्यक्रमों में इस तरह की घटनाएं कोई नई नहीं हैं। कुछ साल पहले जॉर्डन में एक कार्यक्रम में सीरिया के मुद्दे पर बहस के दौरान दो मेहमान भिड़ गए थे और हाथापाई पर उतर आए। मामला इतना बिगड़ गया कि एक ने दूसरे पर मेज पटक डाली। इसी तरह काहिरा में एक टीवी कार्यक्रम में एक मौलवी पर जूता फेंकने की घटना सामने आई।

Author May 25, 2018 3:03 AM
पाकिस्तान के निजीकरण मंत्री दानियाल अजीज और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के वरिष्ठ नेता नईम उल हक के बीच अप्रिय शब्दों का इस्तेमाल किया गया।(फोटो सोर्स- यूट्यूब)

पाकिस्तान में बुधवार को एक टीवी चर्चा के दौरान सरकार के एक मंत्री को चांटा खाना पड़ गया। जिओ न्यूज की वेबसाइट ने आधे मिनट के वीडियो में दिखाया है कि किस तरह से बहस झगड़े में तब्दील हो गई, माहौल बिगड़ा और सामने वाले नेता ने मंत्री को चांटा रसीद कर दिया। ‘आपस की बात’ नाम से चल रहे शो में पाकिस्तान के निजीकरण मंत्री दानियाल अजीज और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के वरिष्ठ नेता नईम उल हक के बीच जिस तरह का संवाद हुआ और जिन अप्रिय शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जाहिर है मारपीट की नौबत आनी ही थी। मंत्री महोदय ने नईम उल हक को ‘चोर’ कह दिया था। बस, फिर जो होना था वही हुआ। हक ने उन्हें थप्पड़ जड़ दिया। लेकिन अप्रिय संवाद नहीं थमा। इससे पहले भी वर्ष 2011 में एक बार तहरीक-ए-इंसाफ के इस नेता ने टीवी शो के दौरान पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता जमील सुमरो पर पानी भरा गिलास फेंक दिया था।

टीवी कार्यक्रमों में इस तरह की घटनाएं कोई नई नहीं हैं। कुछ साल पहले जॉर्डन में एक कार्यक्रम में सीरिया के मुद्दे पर बहस के दौरान दो मेहमान भिड़ गए थे और हाथापाई पर उतर आए। मामला इतना बिगड़ गया कि एक ने दूसरे पर मेज पटक डाली। इसी तरह काहिरा में एक टीवी कार्यक्रम में एक मौलवी पर जूता फेंकने की घटना सामने आई। भारत में भी इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं, जब चर्चा के दौरान लोग आपा खो बैठते हैं। कुछ साल पहले एक चर्चा के दौरान हिंदू महासभा के नेता और एक साध्वी के बीच हुई मारपीट की घटना को लोग अभी तक भूले नहीं हैं। चर्चा एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप में बदल गई और फिर दोनों मेहमान मारपीट पर उतर आए। मामला पुलिस तक पहुंचा और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ रपट दर्ज कराई। कई बार ऐसे मौके भी आते हैं जब कार्यक्रम का संचालन करने वाले एंकर और मेहमानों के बीच सामान्य चर्चा भी अप्रिय नोंकझोंक का रूप ले लेती है। एक बार एक एंकर ने मेहमान को कार्यक्रम से ही निकाल दिया। टीवी पर चर्चाएं अकसर तूतू-मैंमैं में बदल जाती हैं। यही नहीं, यह तनातनी और भी अप्रिय शक्ल कभी भी अख्तियार कर सकती है।

ज्यादातर चैनल रोजाना ‘प्राइम टाइम’ में जो कार्यक्रम पेश करते हैं उनमें राजनीतिक दलों के प्रवक्ता और विशेषज्ञ ही अधिक होते हैं। अधिकांश कार्यक्रमों की हालत यह है कि बहस जल्दी ही मूल मुद््दे से भटक कर आरोप-प्रत्यारोप के दायरे में चली जाती है और उत्तेजनापूर्ण माहौल बन जाता है। कई बार तो यह समझना भी मुश्किल हो जाता है कि कौन क्या कह रहा है। विडंबना है कि जिस कार्यक्रम में उत्तेजना, आवेश जितना अधिक हो, जितना ही झौं-झौं किया जाए, एक-दूसरे पर जितना ही कीचड़ उछाला जाए, उतना ही वह हिट माना जाता है। लगता है जैसे पैनल चर्चा की जगह जुबानी जंग छिड़ी हो। ज्यादातर टीवी बहसों में संजीदगी और शालीनता का अभाव नजर आता है। टीवी एक सशक्त माध्यम है और यह समाज पर गहरा असर छोड़ता है। इसलिए यह सवाल उठना ही चाहिए कि टीवी पर कैसी और किस ढंग से बहस हो रही है!

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