पारदर्शिता की पिच

सुप्रीम कोर्ट ने खेल मंत्रालय के सचिव को प्रशासनिक समिति में शामिल करने की केंद्र सरकार की अर्जी ठुकरा दी।

Vinod Rai BCCI, Vinod Rai Supreme Court, Lodha panel BCCI, CAG Vinod Rai, Vinod Rai latest news, BCCI latest newsपूर्व महालेखानिरीक्षक (कैग) विनोद राय। (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को चार सदस्यीय प्रशासक समिति के हवाले करके साफ संकेत दे दिया है कि क्रिकेट सुधार के लिए लोढ़ा समिति की सिफारिशों को अब नहीं टाला जा सकता। अदालत ने महीने भर पहले यानी 2 जनवरी को बीसीसीआई के अध्यक्ष और भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर तथा सचिव अजय शिर्के को इसलिए पद से हटा दिया था कि वे साल भर से लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने में टालमटोल कर रहे थे। लोढ़ा समिति ने अदालत से अनुरोध किया था कि बीसीसीआई का कामकाज देखने के लिए प्रशासक समिति का गठन कर दिया जाए। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को साफ-सुथरी छवि के चार सदस्यों की एक समिति गठित कर दी। इसकी कमान पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक विनोद राय को सौंपी गई है, जिन्हें यूपीए-दो की सरकार के दौरान हुए कोयला घोटाले का पर्दाफाश करने का श्रेय दिया जाता है। उनके अलावा समिति में मशहूर इतिहासकार रामचंद्र गुहा, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्वकप्तान डायना एडुलजी और इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट फाइनेंस कंपनी के प्रबंध निदेशक विक्रम लिमये को शामिल किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने खेल मंत्रालय के सचिव को प्रशासनिक समिति में शामिल करने की केंद्र सरकार की अर्जी ठुकरा दी। अदालत ने कहा कि इससे पहले जो आदेश दिया गया था, उसमें साफ कहा गया है कि बीसीसीआई को मंत्रियों और नौकरशाहों से बचाने की जरूरत है। अदालत ने कहा है कि प्रशासकीय समिति एक हफ्ते के भीतर बीसीसीआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी से रिपोर्ट मांगेगी और चार हफ्ते में खुद स्टेटस रिपोर्ट पेश करेगी। इसी महीने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की बैठक भी होनी है। इसमें हिस्सा लेने के लिए भी सुप्रीम कोर्ट ने तीन नामों को मंजूरी दी है, जिनमें रामचंद्र गुहा के अलावा बोर्ड के संयुक्त सचिव अमिताभ चौधरी और कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी शामिल होंगे। अगली सुनवाई मार्च में होगी। गौरतलब है कि मौजूदा प्रशासकीय समिति के सामने मुख्य रूप से लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने की चुनौती है। इसमें राज्य क्रिकेट संघों में फैले भ्रष्टाचार को निर्मूल करना और बीसीसीआई के कामकाज में पारदर्शिता लाना सबसे खास है। जहां तक राज्यों में भ्रष्टाचार की बात है तो वह अब कोई छिपी गाथा नहीं रह गई है। इस बारे में न्यायमित्र (एमीकस क्यूरी) गोपाल सुब्रह्मण्यम अदालत को रिपोर्ट सौंप चुके हैं।

विडंबना यह रही कि इस रिपोर्ट के बावजूद क्रिकेट राज्य संघों के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया। असल में इस मामले में अदालत को हस्तक्षेप करना तब जरूरी लगा, जब बार-बार भ्रष्टाचार और मैच फैक्सिंग आदि की खबरें आने लगीं। लेकिन यह मामला अदालत में भी साल भर से ज्यादा समय से घिसट रहा है। पिछले महीने अध्यक्ष और सचिव के हटने के बाद अब यह माना जा रहा है कि कामकाज की गति में तेजी आएगी। बीसीसीआई की प्रशासकीय समिति के अध्यक्ष विनोद राय ने कहा है कि उनकी भूमिका महज एक पहरेदार की होगी। उनका काम यह सुनिश्चित करना होगा कि नए पदाधिकारियों के चुनाव में कोई परेशानी न होने पाए। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि क्रिकेट के लिए सुशासन, अच्छी व्यवस्था और बेहतर ढांचा तैयार करने की जरूरत है। यह खेल और खेल के दीवानों, दोनों के लिए जरूरी है।

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