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धुंध का कहर

पिछले साल की धुंध के बारे में वैज्ञानिकों का अनुमान था कि वह दिवाली के मौके पर दिल्ली की भयंकर आतिशबाजी और पंजाब-हरियाणा में जलाई जाने वाली पराली की देन थी।

Author November 8, 2017 5:17 AM
इंडिया गेट पर कोहरे का नजारा। (फाइल फोटो)

राजधानी दिल्ली और इससे सटे राज्यों यानी हरियाणा-पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तमाम हिस्सों में जिस तरह से पिछले चौबीस घंटों के भीतर वायुमंडल को धूम्रजनित कुहासे ने ढंक लिया है, वह सचमुच गहरी चिंता की बात है। पिछले साल दिवाली के बाद आसमान में तीन-चार दिनों तक छाए धुएं और धुंध के अंधकार को हम भूले नहीं हैं। ऐसे लग रहा था जैसे समूचे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) पर किसी ने विराट काला कंबल तान दिया हो। कुछ-कुछ वैसी ही स्थिति इस बार भी बनती दिख रही है। दिन में सूरज के दर्शन नहीं हो रहे हैं और रात का आलम तो कुछ ज्यादा ही संगीन हो गया है। हाइवे और एक्सप्रेस-वे पर दुर्घटना होने की कई खबरें आई हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग-एक यानी दिल्ली-चंडीगढ़ मार्ग पर तो सोमवार को एक के बाद एक कई वाहनों की भिड़ंत हुई, और सबकी वजह एक ही थी-‘सूझ न आपन हाथ पसारा।’ यानी धुंध का कहर। यह स्थिति तब है जब इस बार सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में आतिशबाजी को हतोत्साहित करने के लिए पटाखों की बिक्री पर ही रोक लगा दी थी, जिससे धुएं और शोर के स्तर को कम किया जा सके।

पिछले साल की धुंध के बारे में वैज्ञानिकों का अनुमान था कि वह दिवाली के मौके पर दिल्ली की भयंकर आतिशबाजी और पंजाब-हरियाणा में जलाई जाने वाली पराली की देन थी। विचित्र स्थिति यह भी है कि मौसम विज्ञानी अब भी कोई सटीक कारण प्रस्तुत नहीं कर पा रहे हैं। इस बारे में जरूर कमोबेश सहमति है कि इसकी वजह प्रदूषण ही है। इनमें वाहन प्रदूषण, कारखाना प्रदूषण, पराली का धुआं, धूल आदि का समुच्चय शामिल है। अनुमान है कि दिल्ली और उसके आसपास यही स्थिति अगले बहत्तर घंटों तक बनी रहेगी। इसकी एक वजह यह बताई जा रही है कि बंगाल की खाड़ी में हवा का रुख अभी उत्तर-पश्चिम की ओर बना हुआ है और उसकी रफ्तार भी मद्धिम है। इसके बाद हवा का रुख पूरब की ओर होगा तो हवा तेज होगी। तब शायद, निर्लज्ज अतिथि की तरह वायुमंडल में पसरा यह कुहासा दफा हो।

फिलहाल दिल्ली और उसके आसपास न सिर्फ सांस के रोगियों बल्कि स्वस्थ लोगों के लिए भी यह धुंध मुसीबत का सबब बन गई है। वातावरण में विषैले कणों (पर्टिकुलेट मैटर) की मात्रा निरापद मानी जाने वाली सीमा से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। इससे सांस लेने में मुश्किलें हो रही हैं। दृश्यता घट जाने से हर तरफ यातायात में बाधा आई है और रास्तों में जगह-जगह जाम की स्थिति हो रही है। प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए दिल्ली सरकार ने प्राथमिक स्कूलों को बुधवार को बंद रखने का एलान किया है। ‘सफर’ (सिस्टम आॅफ एअर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च) ने दिशा-निर्देश जारी कर सेहत की दृष्टि से नाजुक स्थिति वाले लोगों को घरों से बाहर निकलने से मना किया है और सुबह-शाम गतिविधि कम करने तथा अच्छी गुणवत्ता के मॉस्क लगाने की भी सलाह दी है। इस धुंध की वजह प्रदूषण हो या नहीं, इसमें दो राय नहीं कि दिल्ली में प्रदूषण एक बड़ी समस्या है और यह आपदा की शक्ल लेती जा रही है। इसलिए यहां प्रदूषण से निपटना एक ऐसा अनिवार्य तकाजा है जिसे अब टाला नहीं जा सकता।

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