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संपादकीय: हिंसा का दायरा

पिछले कुछ सालों से सामने आ रही ऐसी घटनाएं गंभीर सवाल खड़े करती हैं। बच्चों के बीच बढ़ता हिंसा का दायरा समाज, प्रशासन, सरकार सबके लिए चुनौती है। स्कूल में बच्चों के बीच छोटी-छोटी बातों पर होने वाले झगड़े इस हद तक कैसे बढ़ जाते हैं कि उनकी परिणति चाकूबाजी और हत्या तक के रूप में सामने आने लगी है? ये घटनाएं भावी पीढ़ी में बढ़ती असहिष्णुता की ओर भी इशारा करती हैं।

Author August 4, 2018 1:42 AM
प्रतिकात्मक तस्वीर।

दिल्ली के एक सरकारी स्कूल में गुरुवार सुबह प्रार्थना सभा के दौरान हुई चाकूबाजी की वारदात दहलाने वाली है। एक छात्र ने दूसरे छात्र पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए और उसे गंभीर रूप से जख्मी कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी ने वारदात को छात्रों और शिक्षकों की मौजूदगी में अंजाम दिया। कोई कुछ समझ पाता, उससे पहले ही उसने अपना काम कर डाला। जाहिर है, उसके मन में जरा भी कोई खौफ नहीं रहा होगा। इससे पता चलता है कि छात्र घटना को अंजाम देने का मन पहले ही बना चुका था और इसके लिए उसने किसी ऐसे मौके का इंतजार नहीं किया जब पीड़ित छात्र अकेले में हो। शुरुआती जांच में जो बातेंसामने आई हैं, वे इस घटना के पीछे पीड़ित और हमलावर छात्र की आपसी लड़ाई की ओर इशारा करती हैं। दोनों के बीच एक दिन पहले किसी बात को लेकर मारपीट हुई थी और पीड़ित ने अपने दोस्तों के साथ मिल कर इस छात्र की पिटाई कर दी थी। इसके बाद से ही वह प्रतिशोध की भावना से भर गया था और उसने बदला लेने का फैसला कर लिया था।

चिंता की बात यह है कि पहले जहां इस तरह की घटनाओं के बारे में सुनने में भी नहीं आता था, वहां अब ऐसे मामले अक्सर सामने आने लगे हैं। स्कूलों में छात्रों के बीच होने वाले मामूली झगड़े गंभीर रूप धारण कर लेते हैं। इसी साल फरवरी में दिल्ली के करावल नगर में एक छात्र की उसके साथियों ने चाकू घोंप कर स्कूल में ही हत्या कर दी थी। पिछले साल नवंबर में एक छात्र स्कूल के बाहर मारा गया था। वह भी अपने साथ पढ़ने वालों का शिकार बना। देश के दूसरे शहरों से भी इस तरह की वारदात की खबरें आती रही हैं। कुछ समय पहले हरियाणा के जींद जिले के एक निजी स्कूल में बारहवीं कक्षा के छात्रों के बीच हुए झगड़े में जम कर चाकूबाजी हुई और पांच छात्र घायल हो गए थे। चार छात्र अपने बैग में चाकू रख कर लाए थे। इनमें किसी बात को लेकर विवाद चल रहा था। कई बार शिक्षकों पर भी छात्रों ने ऐसे हमले किए हैं। पिछले साल दिल्ली के नांगलोई इलाके में एक स्कूल में दो छात्रों ने एक शिक्षक पर चाकुओं से हमला कर दिया था।

पिछले कुछ सालों से सामने आ रही ऐसी घटनाएं गंभीर सवाल खड़े करती हैं। बच्चों के बीच बढ़ता हिंसा का दायरा समाज, प्रशासन, सरकार सबके लिए चुनौती है। स्कूल में बच्चों के बीच छोटी-छोटी बातों पर होने वाले झगड़े इस हद तक कैसे बढ़ जाते हैं कि उनकी परिणति चाकूबाजी और हत्या तक के रूप में सामने आने लगी है? ये घटनाएं भावी पीढ़ी में बढ़ती असहिष्णुता की ओर भी इशारा करती हैं। सवाल उठता है कि आखिर हम बच्चों को किस तरह का माहौल दे रहे हैं! ऐसी घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि नौजवान होते बच्चों की ओर न शायद घर-परिवार ध्यान दे रहे हैं, न ही उनके शिक्षक। इसलिए किसी को पता नहीं चल पाता कि बच्चे आखिर कर क्या रहे हैं, किस दिशा में जा रहे हैं। बच्चों से सरोकार नहीं के बराबर रह गया है और उनकी घोर उपेक्षा ही उन्हें ऐसे रास्ते पर ले जाती है। इस तरह की घटनाएं यह भी बताती हैं कि स्कूलों में सुरक्षा नाम की कोई चीज नहीं है। शिक्षक खुद छात्रों के झमेले में पड़ने से बचते हैं। अगर शिक्षक और अभिभावक मिल कर प्रयास करें और बच्चों के प्रति सरोकार बढ़ाएं तो ऐसी घटनाओं पर काबू पाया जा सकता है।

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