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संपादकीय: समावेशी ऊर्जा

सरकार के आंकड़े बताते हैं कि 31 मार्च 2015 तक देश के 97 फीसद गांवों का विद्युतीकरण हो चुका था। यानी जब प्रधानमंत्री ने बिजली से वंचित गांवों तक एक हजार दिनों के भीतर बिजली पहुंचा देने का वायदा किया, तब सिर्फ तीन फीसद गांव ही रह गए थे जहां बिजली नहीं पहुंची थी।

Author May 1, 2018 04:15 am
पीएम मोदी ने ट्वीट कर बताया कि भारत के हर गांव तक बिजली पहुंच चुकी है। (image source-PTI)

भारत के सभी गांवों तक बिजली की पहुंच हो जाना निश्चय ही एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। देश के विकास के सफर में यह मुकाम हासिल हुआ अट्ठाईस अप्रैल की शाम को, जब मणिपुर के सेनापति जिले में आने वाला लाइसंग गांव नेशनल पॉवर ग्रिड से जुड़ने वाला आखिरी गांव बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर जहां इसे भारत की विकास यात्रा में एक ऐतिहासिक दिन कहा, वहीं गांवों तक बिजली पहुंचाने का काम करने वाली नोडल एजेंसी आरईसी यानी ग्रामीण विद्युतीकरण निगम ने एलान किया कि देश के सभी गांवों तक बिजली पहुंचा दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में स्वाधीनता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए एक हजार दिनों के भीतर संपूर्ण ग्राम विद्युतीकरण का वादा किया था। तब कोई 18,450 गांव ही रह गए थे जहां बिजली नहीं पहुंची थी। उन तक बिजली पहुंचाने के लिए सरकार ने दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत 75,893 करोड़ रुपए आबंटित किए। बाद में पता चला कि कोई बारह सौ गांव और भी हैं, जहां बिजली नहीं पहुंची थी। इस तरह इस योजना ने अपनी मंजिल पा ली है, और इसमें वैसी देरी या ढीलमढाल भी नहीं हुई जो कि अमूमन सारी सरकारी योजनाओं में दिखती है।

शायद प्रधानमंत्री की दिलचस्पी के कारण संबंधित महकमों ने इस योजना को लेकर एक मिशन की तरह काम किया। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि पहले हुए कामों को नजरअंदाज कर दिया जाए। जब देश आजाद हुआ तब विद्युतीकरण के दायरे में केवल पंद्रह हजार गांव थे। वर्ष 1991 तक विद्युतीकृत गांवों की संख्या 4 लाख 81 हजार से ज्यादा हो गई। सरकार के आंकड़े बताते हैं कि 31 मार्च 2015 तक देश के 97 फीसद गांवों का विद्युतीकरण हो चुका था। यानी जब प्रधानमंत्री ने बिजली से वंचित गांवों तक एक हजार दिनों के भीतर बिजली पहुंचा देने का वायदा किया, तब सिर्फ तीन फीसद गांव ही रह गए थे जहां बिजली नहीं पहुंची थी। अगर राज्यों के हिसाब से देखें, तो बहुत-से राज्यों ने पहले ही संपूर्ण ग्राम विद्युतीकरण का लक्ष्य पा लिया था। लेकिन विद्युतीकरण का यह बचा-खुचा दौर काफी चुनौतियों भरा था, क्योंकि विद्युतीकृत होने से रह गए गांव काफी दूरदराज के और दुर्गम इलाकों के थे; उन तक साज-सामान और कर्मचारियों को पहुंचाना आसान नहीं था। लेकिन समग्र ग्राम विद्युतीकरण का लक्ष्य दोनों तरीकों से हासिल किया गया- नेशनल ग्रिड से जोड़ कर भी, और उसके बगैर भी। ग्राम विद्युतीकरण का यह अर्थ नहीं है कि गांव के हरेक घर में बिजली पहुंच गई।

ग्राम विद्युतीकरण का अर्थ है कि गांव के कम से कम दस फीसद घर और स्कूल, पंचायत कार्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसे सार्वजनिक स्थल बिजली से जुड़ गए। जाहिर है, हर घर तक बिजली कनेक्शन पहुंचाने का काम अभी पूरा नहीं हो पाया है। अलबत्ता संपूर्ण ग्राम विद्युतीकरण का ढांचागत लक्ष्य पूरा हो जाने से, अब कनेक्शन की मांग को पूरा करना मुश्किल नहीं होगा। इसी के साथ भारत की प्रतिव्यक्ति ऊर्जा खपत बढ़ने के आसार हैं, जो कि दुनिया में काफी कम है। बहरहाल, सभी गांवों तक बिजली के आधारभूत ढांचे की पहुंच होना ही काफी नहीं है। ट्रांसफार्मर और बिजली के कनेक्शन होते हुए भी उत्तर प्रदेश, बिहार समेत अनेक राज्यों के ग्रामीण इलाकों में बिजली उपलब्धता कैसी है, यह किसी से छिपा नहीं है। लिहाजा, अब सरकार को पारेषण क्षति को न्यूनतम करने, बिजली-चोरी रोकने और आपूर्ति सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।

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