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हादसा दर हादसा

इससे पहले 19 अगस्त को मुजफ्फरनगर में उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। उसमें बाईस यात्रियों की मौत हो गई थी और डेढ़ सौ से ज्यादा घायल हो गए थे।
Author August 24, 2017 00:29 am
उत्तर प्रदेश: मुजफ्फरनगर में बड़ा ट्रेन हादसा हुआ है।

हादसों के लिए बदनाम भारतीय रेल की स्थिति बदतर होती जा रही है। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से दिल्ली जा रही कैफियत एक्सप्रेस बीती रात करीब पौने तीन बजे औरैया जिले के एक मानवरहित रेल फाटक पर फंसे बालू भरे डंपर से टकरा गई, जिससे टेÑन का एक डिब्बा पलट गया और दस पटरी से उतर गए। नतीजतन सौ से अधिक लोग घायल हो गए, जिनमें चार-पांच यात्रियों की हालत गंभीर है। पिछले चार दिनों के भीतर इस राज्य में यह दूसरी टेÑन दुर्घटना है। इससे पहले 19 अगस्त को मुजफ्फरनगर में उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। उसमें बाईस यात्रियों की मौत हो गई थी और डेढ़ सौ से ज्यादा घायल हो गए थे। एक तरफ प्रधानमंत्री देश में बुलेट टेÑन का सपना संजोए हुए हैं और दूसरी तरफ स्थिति यह है कि देश में छह हजार से ज्यादा मानवरहित रेल फाटक हैं। कई लाइनें और पुल कब की अपनी मियाद पूरी कर चुके हैं। सोचनेवाली बात यह है कि सरकार बदहाली का बहाना करके अपने दायित्व से भाग नहीं सकती और न ही इसे निजीकरण का बहाना बनाना चाहिए। 1956 में नेहरू सरकार में रेल मंत्री रहे लालबहादुर शास्त्री ने एक दुर्घटना होने पर मिसाल कायम करते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे नेहरूजी ने स्वीकार भी कर लिया था।

गौरतलब है कि भारतीय रेल दुनिया में चौथी सबसे बड़ी परिवहन सेवा है। देश में लाखों लोग प्रतिदिन इससे सफर करते हैं। मगर विडंबना यह है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी, धनाभाव और भ्रष्टाचार की वजह से इसकी सुरक्षा प्रणाली और सुरक्षा मानक निरंतर काफी कमजोर हो चुके हैं। यही वजह है कि आए दिन दुर्घटनाएं इस विशाल महकमे की नियति हो गई हैं। 2012 में तैयार एक सरकारी रिपोर्ट बताती है कि भारत में करीब पंद्रह हजार लोग हर साल रेल दुर्घटनाओं के शिकार हो जाते हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने इसके आधुनिकीकरण और उच्चीकरण के लिए निजी कंपनियों से हाथ मिलाया है। रेलवे में सुधार करने की दलील देकर ही रेलवे बजट को आम बजट के साथ जोड़ा गया है। लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक नतीजा दिखाई नहीं पड़ रहा है। इस सरकार के तीन साल के कार्यकाल में सत्ताईस बड़े रेल हादसे हो चुके हैं। दुर्घटनाएं होती हैं, कुछ अधिकारी-कर्मचारी हटाए जाते हैं, जांच बैठती है, सुझाव आते हैं, भविष्य में और सतर्क रहने की चेतावनियां जारी होती हैं मगर नतीजा वही ढाक के तीन पात ही रहता है।

ज्यादातर दुर्घटनाओं में पाया गया कि वे मानवीय चूक का नतीजा थीं। यानी अगर बेहतर तालमेल हो तो हादसों से बचा जा सकता है। ताजा मामले में भी जाहिर हो गया है कि यह मानवीय भूल थी। बालू का डंपर जिस मानवरहित रेल फाटक पर फंसा हुआ था, उसकी जानकारी कैफियत एक्सप्रेस के चालक को नहीं दी गई थी। अगर समय रहते उस तक यह जानकारी पहुंचा दी जाती तो दुर्घटना होने का सवाल ही नहीं उठता था। हालांकि इसके बाद रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एके मित्तल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसके फौरन बाद एअर इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अश्वनी लोहानी को उनका कार्यभार सौंप दिया गया है। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने भी ट्वीट करके कहा है कि उन्होंने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर दुर्घटना की पूर्णरूप से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश की है। प्रधानमंत्री ने उन्हें इंतजार करने के लिए कहा है। लेकिन यह देखना अभी बाकी है कि रेल मंत्री का यह कदम महज दिखावा है या सचमुच किसी दायित्वबोध से उपजा गहन-गंभीर वास्तविक पश्चात्ताप।

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