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जीएसटी की राह

कपड़ा व्यापारियों ने तो जीएसटी का खुलकर विरोध करते हुए पंद्रह जून को देश भर में हड़ताल भी की थी। दूसरी तरफ ये अटकलें भी लगाई जा रही थीं कि जीएसटी को लागू करने की खुद सरकार की तैयारी अभी पूरी नहीं हो पाई है।
Author June 20, 2017 05:45 am
प्रतीकात्मक फोटो। (फाइल)

हालांकि जीएसटी के क्रियान्वयन की तारीख पहले से तय थी, पर कुछ समय से इस बारे में संशय का माहौल था। व्यापार जगत खासकर छोटे व मझोले कारोबारियों की तरफ से इसे एक जुलाई के बजाय एक सितंबर से लागू करने की मांग की जा रही थी। इस मांग से जाहिर था कि उनमें से बहुत-से लोग जीएसटी के प्रावधानों और प्रक्रियाओं को ठीक से समझ नहीं पाए हैं। कपड़ा व्यापारियों ने तो जीएसटी का खुलकर विरोध करते हुए पंद्रह जून को देश भर में हड़ताल भी की थी। दूसरी तरफ ये अटकलें भी लगाई जा रही थीं कि जीएसटी को लागू करने की खुद सरकार की तैयारी अभी पूरी नहीं हो पाई है। लेकिन रविवार को वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सारी अटकलों और अनिश्चितता पर विराम लगा दिया। जीएसटी परिषद की सत्रहवीं बैठक के बाद उन्होंने एलान किया कि जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवा कर एक जुलाई से ही लागू होगा। यह आजादी के बाद अप्रत्यक्ष कर-ढांचे में सबसे बड़ा बदलाव है। जीएसटी के वजूद में आते ही वस्तुओं तथा सेवाओं पर लगने वाले अलग-अलग ढेर सारे कर विदा हो जाएंगे, और जीएसटी उन सबकी जगह लेगा। लेकिन शुरू में जैसी इसकी परिकल्पना पेश की जा रही थी, उसके विपरीत जीएसटी के कई स्तर हैं, शून्य से लेकर अट्ठाईस फीसद तक। कर-राजस्व के दो बड़े मद फिलहाल जीएसटी के दायरे में नहीं हैं, पेट्रोलियम और शराब।

जाहिर है, जीएसटी की जैसी अवधारणा और परिकल्पना थी उसमें काफी कतर-ब्योंत के साथ यह लागू होने जा रहा है। जीएसटी से कई लाभ होने की बात शुरू से कही जाती रही है तो कुछ अंदेशे भी जताए गए हैं। लाभ वाले अनुमान देखें। माना जा रहा है कि पूरे देश में जिन्सों तथा सेवाओं पर एक ही कर प्रणाली होने से व्यापार में सुगमता होगी, माल ढुलाई में सुविधा होगी, जीडीपी में बढ़ोतरी होगी। कर-आधार बढ़ेगा। जीडीपी के अनुपात में राजकोषीय घाटा कम होगा। निर्यात में भी बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन दूसरी तरफ व्यापारियों को कुछ शंकाएं और आशंकाएं हैं। उन्हें नई कर-व्यवस्था के जटिल होने का भी भय सता रहा है और इंस्पेक्टर राज के लौटने का भी। बहुतों को लग रहा है कि उन्हें पहले से ज्यादा फॉर्म भरने पड़ेंगे, और कोई छोटी-मोटी चूक भी पता नहीं किस दंड का पात्र बना दे! यों जीएसटी परिषद ने रविवार को उद्यमियों तथा व्यापारियों को राहत देने के भी कुछ फैसले किए। पहले दो महीने कारोबारियों को कर-भुगतान एक सामान्य रिटर्न फॉर्म (जीएसटीआर-3बी) के आधार पर करना होगा। उन्हें खरीद-बिक्री का ब्योरा देना होगा। संशोधित फैसले के मुताबिक अब जुलाई का ब्योरा पांच सितंबर तक और अगस्त का ब्योरा बीस सितंबर तक जमा कराया जा सकेगा।

जीएसटी परिषद ने तैयारियों में रही कसर को देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक वे-बिल पर फैसला टाल दिया। ई-वे बिल नियमों के तहत कोई व्यक्ति पचास हजार रुपए से अधिक का सामान ढुलाई से कहीं ले जाता है तो उसे जीएसटीएन से ई-वे बिल लेना होगा। हमारे देश में ज्यादातर कारोबारी कॉरपोरेट की दुनिया से बाहर के लोग हैं। यह दावा नहीं किया जा सकता कि तमाम छोटे व्यापारी और उद्यमी जीएसटी की बारीकियों से वाकिफ हो चुके होंगे। सच तो यह है कि उनमें से ज्यादातर लोग जीएसटी के प्रावधानों को लेकर अब भी उलझन में हैं। फिर-फिर टुकड़े-टुकड़े में तय होने वाली बहुत-सी बातें उनकी उलझनों को और बढ़ाती ही हैं। यह हालत तब है जब जीएसटी को लागू होने में सिर्फ दस दिन बचे हैं।

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