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इस बारिश में

हम सारी परेशानी मानवजनित होती है। हमारी उत्तरदायी संस्थाएं यानी नगर निगम, नगरपालिकाएं और नगर पंचायतें, समय रहते न जल निकासी का उचित प्रबंध करती हैं और न ही सड़कों-गड्ढों को ठीक कराती हैं।

मानसून ने केरल में दस्तक दे दी है।

कुछ इंतजार के बाद दिल्ली और उसके पड़ोसी राज्यों में जब रविवार को मानसून ने अपनी जोरदार दस्तक दी तो लोगों की बांछें खिल उठीं। मौसम विभाग की भविष्यवाणी और मानसून के बीच हफ्ते भर से मानो लुकाछिपी का खेल चल रहा था।  के साथ-साथ राजस्थान, हिमाचल, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को भी तर-बतर कर दिया। पंजाब जरूर अभी इंतजार में है। जबकि मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ तक बादल धावा मार आए हैं। इस बारिश का इंतजार सभी को था। सभी गरमी से बेहाल थे। लेकिन जैसा कि हर साल होता है, बरसात राहत के साथ कुछ परेशानी भी लाती है। इस बारिश ने भी राजधानी समेत कई राज्यों के शहरों में जलभराव कर किया। हालांकि इसमें बारिश को दोष देने से ज्यादा निरर्थक कुछ भी नहीं हो सकता। इस मौसम में सैलाब आए या जलजमाव हो, यह सारी परेशानी मानवजनित होती है। हमारी उत्तरदायी संस्थाएं यानी नगर निगम, नगरपालिकाएं और नगर पंचायतें, समय रहते न जल निकासी का उचित प्रबंध करती हैं और न ही सड़कों-गड्ढों को ठीक कराती हैं। बल्कि हर साल देखा यह जाता है कि इस मौसम को आबंटित धनराशि को खपाने का एक ‘सुनहरा अवसर’ मान लिया जाता है।

लापरवाही और चूक के नतीजे कितने भयावह हो सकते हैं, इसका एक उदाहरण राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में देखा गया, जहां के गंगापुर क्षेत्र में उफनते बरसाती नाले में नहाने के लिए उतरे तीन किशोरों की डूब कर मौत हो गई। इसी राज्य के जोधपुर इलाके में एक अधेड़ की भी मौत हो गई। उत्तर-पश्चिम रेलखंड में भारी बारिश के कारण अमदाबाद, अजमेर वगैरह की रेल लाइनों पर पानी भर गया, जिससे कई गाड़ियों के मार्गों में परिवर्तन करना पड़ा। बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है पूर्वोत्तर। मणिपुर में दो दिनों से हुई मूसलाधार बारिश ने इंफल घाटी में जनजीवन ठप कर दिया है। इंफल नदी का तटबंध टूट गया है, जिससे बाढ़ आ गई और कई सौ परिवार इसमें घिर गए हैं। सरकार उन्हें राहत शिविरों में पनाह दे रही है।

दिल्ली-एनसीआर में भी शनिवार और रविवार यानी दो दिनों को मिलाकर बीस से सैंतीस मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो कि अच्छी बारिश की पहचान है। निजी मौसम एजेंसी स्काइमेट ने अगले चौबीस घंटे में पूरे उत्तर भारत में तेज बारिश का अनुमान व्यक्त किया है। देश में मानसून का प्रदर्शन अभी तक अच्छा रहा है। एक जून से बीस जून तक अपेक्षया पांच फीसद अधिक बारिश दर्ज की गई। इसके बाद बारिश की मात्रा और रफ्तार दोनों में कमी आई, लेकिन फिर मानसून ने गति पकड़ ली और अब फिर छह फीसद की अधिकता दिखाई दे रही है। पिछले एक महीने में औसतन 180.7 मिलीमीटर सामान्य बारिश के मुकाबले 190.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। मौसम विज्ञानियों ने इस साल देश में मानसून के सामान्य रहने और 98 फीसद बारिश होने की संभावना जताई है। उत्तर-पश्चिम भारत में पूरे देश की तुलना में सबसे कम यानी 96 फीसद बारिश की होने की संभावना है। लेकिन कई राज्य आज भी सूखे की चपेट में हैं। हम उम्मीद करेंगे कि वहां भी बारिश हो जाए।

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