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खौफ की कड़ियां

उत्तर प्रदेश के आगरा में गिरजाघर में हुई तोड़-फोड़ के पीछे किसका हाथ है, यह अभी साफ नहीं हो पाया है। पर यह सामान्य अपराध की घटना नहीं लगती। बदमाश कुछ लूट कर या चोरी कर नहीं ले गए। गुरुवार को तड़के वे आगरा के प्रतापपुरा में स्थित सेंट मैरी चर्च में घुसे और मैरी […]

उत्तर प्रदेश के आगरा में गिरजाघर में हुई तोड़-फोड़ के पीछे किसका हाथ है, यह अभी साफ नहीं हो पाया है। पर यह सामान्य अपराध की घटना नहीं लगती। बदमाश कुछ लूट कर या चोरी कर नहीं ले गए। गुरुवार को तड़के वे आगरा के प्रतापपुरा में स्थित सेंट मैरी चर्च में घुसे और मैरी की एक प्रतिमा तोड़ दी, एक दूसरी प्रतिमा पर जानवर की जंजीर डाल दी। वहां रखे सामान तोड़-फोड़ दिए। गिरजाघर के शीशों को क्षतिग्रस्त करने के साथ वहां खड़ी कारों को भी नहीं बख्शा। फिर दीवार फांद कर भाग गए। इस घटना को लेकर स्वाभाविक ही ईसाई समुदाय में रोष व्याप्त है। राज्य के पुलिस महानिदेशक ने जिले के पुलिस अधिकारियों से घटना का पूरा ब्योरा मांगा है और अपराधियों को जल्द से जल्द पकड़ने के निर्देश दिए हैं। हो सकता है जल्दी ही इसमें कामयाबी मिल जाए। पर यह कानून-व्यवस्था का सामान्य मामला नहीं लगता।

पिछले कुछ महीनों में ईसाई समुदाय को निशाना बनाने की एक के बाद एक कई घटनाएं हुई हैं। आगरा का वाकया इसी सिलसिले की ताजा कड़ी है। पिछले महीने पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में इकहत्तर वर्षीय नन के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ था। इस घटना के खिलाफ ईसाई समुदाय का रोष-प्रदर्शन चल ही रहा था कि हरियाणा के हिसार में एक निर्माणाधीन गिरजाघर को ध्वस्त करने की खबर आई। फिर नवी मुंबई में एक गिरजाघर के परिसर में पत्थर फेंके गए। मध्यप्रदेश के जबलपुर में हिंदू धर्म सेना और बजरंग दल के कुछ लोगों ने एक गिरजाघर में घुस कर वहां तोड़-फोड़ की, प्रार्थना के लिए जुटे लोगों से बदसलूकी की और जाते-जाते उन्हें धमकियां दे गए। और पीछे जाएं, तो दिल्ली में एक के बाद एक कई गिरजाघरों पर हमले हुए थे।

पिछले कुछ महीनों में ऐसी घटनाओं का यह सिलसिला कोई संयोग नहीं हो सकता। ऐसा लगता है कि अल्पसंख्यकों को आतंकित करने की सुनियोजित कोशिश चल रही है। यह अल्पसंख्यक समुदायों के लिए तो बेहद चिंताजनक है ही, सामाजिक सौहार्द और देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के लिए भी खतरा है। क्या इसी तरह सबका साथ सबका विकास का नारा फलीभूत होगा? ऐसे मामलों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए।

जब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ऐसी घटनाओं को लेकर चिंता जाहिर की तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लगा कि देश की अंतरराष्ट्रीय छवि पर आंच आ रही है। फिर मोदी ने ईसाई समुदाय के एक समारोह को संबोधित करते हुए धार्मिक असहिष्णुता की कड़ी निंदा की और सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। गृहमंत्री भी जब-तब ऐसी चेतावनी देते रहते हैं। लेकिन क्या कारण है कि गिरजाघरों पर हमले का सिलसिला फिर भी जारी है और वे एक राज्य तक सीमित नहीं हैं।

क्या धर्मांतरण का विवाद खड़ा करने की कोशिशों से इन घटनाओं का कोई वास्ता नहीं है? अपने सेवा-काल में आतंकवाद-विरोधी कार्रवाई के कारण मशहूर हुए पूर्व आइपीएस अधिकारी जूलियो रिबेरो का कहना है कि मोदी को जनता ने इतनी ताकत दी है कि वे चाहें तो ऐसी घटनाओं पर एक दिन में विराम लग सकता है। पर केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकारें भी अपनी जवाबदेही से पल्ला नहीं झाड़ सकतीं।

 

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