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संपादकीयः पाकिस्तान का पैंतरा

जाधव को पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने भारतीय जासूस करार देकर फांसी की सजा सुनाई थी। उस मुकदमे में किस कदर एकतरफा कार्यवाही चलाई गई, किसी से छिपा नहीं है। उस दौरान न तो जाधव को किसी राजनयिक मदद की इजाजत दी गई और न कोई वकील तय करने दिया गया।

Author Published on: July 10, 2020 12:57 AM
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भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के मामले में पाकिस्तान किस कदर झूठ और पैंतरेबाजी का सहारा लेता रहा है, यह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उजागर हो चुका है। मगर वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा। पिछले साल अंतरराष्ट्रीय अदालत ने आदेश दिया था कि कुलभूषण जाधव की फांसी पर तुरंत रोक लगाई और राजनयिक पहुंच उपलब्ध कराई जाए। उस आदेश का पालन करने से बचने के लिए पाकिस्तान ने नया पैंतरा चला है। उसका कहना है कि जाधव ने पाकिस्तानी सैन्य अदालत के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान सरकार ने बीस मई को एक अध्यादेश जारी कर जाधव या उनके प्रतिनिधि को साठ दिन के भीतर पुनर्विचार याचिका दायर करने को कहा था। वह अवधि इस महीने की उन्नीस तारीख को समाप्त हो जाएगी। यानी इस बीच पुनर्विचार याचिका दायर नहीं हुई, तो जाधव की दया याचिका पर ही विचार करना विकल्प बचेगा। फिर पाकिस्तान के हाथ में होगा कि वह जाधव की फांसी रद्द करे या नहीं। पाकिस्तान पहले से इस बात पर अड़ा हुआ है कि फांसी दी जाएगी। यह फांसी रोकने के लिए ही जाधव ने अंतरराष्ट्रीय अदालत में गुहार लगाई थी, जिसके आधार पर उसने पाकिस्तान को फटकार लगाते हुए जाधव के पक्ष में फैसला सुनाया था।

गौरतलब है कि जाधव को पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने भारतीय जासूस करार देकर फांसी की सजा सुनाई थी। उस मुकदमे में किस कदर एकतरफा कार्यवाही चलाई गई, किसी से छिपा नहीं है। उस दौरान न तो जाधव को किसी राजनयिक मदद की इजाजत दी गई और न कोई वकील तय करने दिया गया। इस तरह पाकिस्तानी सैन्य न्यायालय अपने ढंग से उससे जुड़े सबूतों को वैध या अवैध ठहराता रहा। भारत सरकार लगातार मांग करती रही कि जाधव को कानूनी मदद मुहैया कराई जाए, पर उसे ठुकरा दिया गया। आखिरकार जाधव को फांसी की सजा मुकर्रर कर दी गई। अंतरराष्ट्रीय अदालत ने भी माना कि पाकिस्तानी अदालत ने मनमानी बरती है। दरअसल, जाधव को फांसी देकर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने यह साबित करना चाहता है कि भारत उसकी सीमा में जासूसी कराता और आतंकवाद को बढ़ावा देता है। हालांकि इस मामले में उसका झूठ पूरी तरह उजागर हो चुका है, पर वह अपने पैंतरों से बाज नहीं आ रहा।

इस पर स्वाभाविक ही भारत सरकार ने कहा है कि पाकिस्तान पहले की तरह ही स्वांग कर रहा है। छिपी बात नहीं है कि इससे पहले पाकिस्तान जासूसी के आरोप में पकड़े गए भारतीय नागरिकों के साथ कैसा बर्ताव करता रहा है। जेलों में उन्हें यातना देकर मनचाहा बयान उगलवाता रहा है। हैरानी की बात नहीं कि जाधव पर भी पुनर्विचार याचिका दायर न करने का दबाव बनाया होगा। अगर वह सचमुच अंतरराष्ट्रीय अदालत के अदेशों का सम्मान करता, तो जाधव को राजनयिक मदद उपलब्ध कराने से न रोकता। यह समझ से परे है कि जाधव क्यों पुनर्विचार याचिका दायर करने से इनकार करेंगे। पाकिस्तान आतंकवाद रोकने को लेकर कितना संजीदा है, यह सब जानते हैं। अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद अब तक उसने आतंकी प्रशिक्षण शिविरों को बंद करने के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई है। हाफिज सईद जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के कुख्यात आतंकवादी को संरक्षण देता रहा है। वही पाकिस्तान जाधव मामले को तूल देकर अपने को आतंकवाद के प्रति सख्त साबित करने पर तुला है। इस तरह वह अंतरराष्ट्रीय अदालत के आदेश की अवहेलना कर शायद ही अपने मंसूबे में कामयाब हो पाए।

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