मध्य प्रदेश में जबलपुर के बरगी बांध में एक क्रूज नाव के पलटने से हुए हादसे की त्रासदी ने एक बार फिर नागरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे ने नाव पर सवार होकर रोमांच महसूस करने के कई लोगों के उत्साह को मातम में बदल दिया। हैरानी इस बात की है कि दुर्घटना के बाद प्रशासन के पास नाव में सवार कुल लोगों की सटीक जानकारी तक नहीं थी। अधिकारियों ने टिकटों की संख्या के आधार पर आंकड़ा जारी कर दिया, जबकि कई लोगों के साथ उनके बच्चे भी नाव पर सवार थे।

सवाल है कि नौकाओं के संचालकों के लिए क्या यह नियम जरूरी नहीं होना चाहिए कि टिकट लेने वाले लोगों के साथ उनके बच्चों की संख्या भी दर्ज की जाए, ताकि आपात स्थिति में सुरक्षा बंदोबस्त में कोई कमी न रहे? दूसरी ओर ऐसी खबरें भी आई हैं कि दुर्घटना की शिकार हुई नौका पर पहले से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे और न ही स्थानीय मौसम के पूर्वानुमान की कोई व्यवस्था थी। ऐसे में इसे व्यवस्थागत लापरवाही नहीं तो और क्या कहा जाएगा।

गौरतलब है कि गुरुवार को बरगी बांध में एक क्रूज नौका तेज आंधी की चपेट में आकर पलट गई थी। इस दुर्घटना में अब तक नौ लोगों के शव बरामद हो चुके हैं, जबकि कुछ लोग अब भी लापता हैं। हादसे में जीवित बचे लोगों का दावा है कि नौका पर सवार किसी भी यात्री ने जीवन रक्षक जैकेट नहीं पहनी थी। जब आपात स्थिति महसूस हुई, तभी वे यात्रियों में वितरित करने की कोशिश की गई, लेकिन कुछ लोगों को इन्हें पहनने का मौका ही नहीं मिला।

सवाल है कि जो नियम नौका चालकों को प्रशिक्षण के दौरान अनिवार्य रूप से सिखाए जाते हैं, अगर उन्हें ही नजरअंदाज कर दिया जाए, तो यह सीधे तौर पर लापरवाही को उजागर करता है। यही नहीं, जल पर्यटन के इस क्षेत्र में मौसम पूर्वानुमान की व्यवस्था न होना भी सवाल खड़े करती है। राज्य सरकार ने हादसे के बाद क्रूज नावों के संचालन पर प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन क्या सिर्फ इस कदम से ऐसी दुर्घटनाओं पर पूरी तरह रोक पाएगी। ऐसे में सभी राज्यों को चाहिए कि इस हादसे से सबक लेकर तमाम व्यवस्थाओं में सुधार किया जाए।