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संपादकीयः सुरक्षा और सवाल

हमारे स्मार्टफोन, हमसे जुड़ी जानकारियां और आंकड़े यानी डाटा लगता है अब वाकई सुरक्षित नहीं रह गए हैं। इसकी पोल शुक्रवार को एक बार फिर उस वक्त खुल गई जब एंड्रॉयड फोन इस्तेमाल करने वालों को नई समस्या का सामना करना पड़ा।

Author August 6, 2018 2:42 AM
अगर फोन में नंबर अपने आप सेव हो जा रहा है तो समझिए कि आपके फोन में रखे फोटो, वीडियो या चैटिंग तक कोई भी पहुंच बना लेगा!

हमारे स्मार्टफोन, हमसे जुड़ी जानकारियां और आंकड़े यानी डाटा लगता है अब वाकई सुरक्षित नहीं रह गए हैं। इसकी पोल शुक्रवार को एक बार फिर उस वक्त खुल गई जब एंड्रॉयड फोन इस्तेमाल करने वालों को नई समस्या का सामना करना पड़ा। कई लोगों के मोबाइल फोन में आधार कार्ड बनाने वाले प्राधिकरण- यूआइडीएआइ का हेल्पलाइन नंबर अपने आप सेव हो गया। इससे लोगों में सनसनी फैल गई। सवाल था कि जब फोन में कोई नंबर सेव नहीं कर रहा, तो वह अपने आप संपर्क सूची में कैसे सुरक्षित हो गया। सोशल मीडिया के जरिए यह खबर आग की तरह फैल गई और तमाम एजंसियां और मोबाइल ऑपरेटर कंपनियां हरकत में आ गर्इं। मामला तूल पकड़ते देख यूआइडीएआइ को बचाव में उतरना पड़ा और सफाई देनी पड़ी। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि इस तरह का कोई भी नंबर सेव करने के बारे में उसने किसी ऑपरेटर या संस्था को निर्देश नहीं दिया है। यूआइडीएआइ ने साफ किया कि उसका एक ही हेल्पलाइन नंबर है, जो पिछले दो साल से काम कर रहा है। जो पुराना नंबर लोगों के मोबाइल में अपने आप सेव हुआ वह पुराना था और अब बंद हो चुका है। यह घटना निजता की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे की आहट है।

प्रश्न इस बात का नहीं है कि नंबर पुराना था या बंद है, बल्कि मामला सीधा-सीधा एंड्रॉयड फोनों में सेंध लगाने का है। फिलहाल लोगों को इस बात का डर सता रहा है कि अपने मोबाइल को कैसे सुरक्षित बनाएं। सबसे बड़ा खतरा तो यह खड़ा हो गया है कि फोन आपके हाथ में है और कोई भी उस तक पहुंच बना कर इस्तेमाल कर ले, जिसका आपको पता नहीं चलेगा। देश में लंबे समय से डाटा सुरक्षा को लेकर बहस चल रही है, खासकर आधार की सुरक्षा लेकर। देश की शीर्ष अदालत तक इस बारे में सवाल खड़े कर चुकी है और हर बार संबंधित प्राधिकरण ने इसे सुरक्षित ही करार दिया है। लेकिन यूआइडीएआइ का हेल्पलाइन नंबर अपने आप सेव होने की घटना ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब आसान नहीं है। इससे स्मार्ट डिवाइसों की सुरक्षा आशंकाओं के घेरे में आ गई है। पहला सवाल तो यही उठ रहा है कि कहीं आधार नंबर लीक हो गया और किसी के हाथ लग गया तो क्या होगा। आज पैन नंबर, मोबाइल नंबर, बैंक खाते सब आधार से जुड़ रहे हैं। यानी सारी संवेदनशील जानकारियां आधार से जुड़ी हैं। अगर फोन में नंबर अपने आप सेव हो जा रहा है तो समझिए कि आपके फोन में रखे फोटो, वीडियो या चैटिंग तक कोई भी पहुंच बना लेगा!

हालांकि इस प्रसंग में गूगल ने सफाई दी है कि ऐसा उसकी चूक की वजह से हुआ। गलती से फोनबुक में यूआइडीएआइ का पुराना हेल्पलाइन नंबर दर्ज हो गया। गूगल ने किसी भी तरह के खतरे की आशंका से इनकार किया है। लेकिन सवाल घूम-फिर कर वहीं आ जाता है कि गूगल, फेसबुक आदि में हमारे निजी डाटा कितने सुरक्षित हैं। कुछ महीने पहले फेसबुक के करोड़ों ग्राहकों के डाटा लीक हो गए थे। हाल में ट्राइ के अध्यक्ष ने अपना आधार नंबर सार्वजनिक कर उसकी सुरक्षा को चुनौती दी थी और हैक करने वाले ने उनके बैंक खाते तक पहुंच बना कर दिखा दी थी। तो फिर कैसे माना जाए कि हमारे डाटा या मोबाइल पूरी तरह सुरक्षित है!

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