LPG Crisis in India: दुनिया भर में युद्ध सैन्य मोर्चों पर लड़े जाते रहे हैं, लेकिन उसकी आंच में आम लोग झुलसते हैं। ईरान पर इजराइल और अमेरिका के साझा हमले के बाद इस युद्ध का दायरा जिस स्वरूप में फैला है, उसका असर अब आशंका के अनुरूप सामने आना शुरू हो चुका है।
समस्या यह है कि दुनिया के ज्यादातर देश आमतौर पर हर समय इतनी पूर्व-सावधानी नहीं बरतते हैं कि युद्ध से उपजी आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी उपायों को लेकर अपनी ओर से अगले कई महीनों के लिए पूरी तैयारी रखें। कई बार अचानक पैदा होने वाले हालात में पहले आपूर्ति का मोर्चा बाधित होता है।
उसके बाद आम लोगों के जीवन-बसर के लिए अनिवार्य चीजों की कमी शुरू हो जाती है और फिर उसका असर बाहर भी दिखने लगता है, जिसमें लोगों के बीच रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की समस्या को लेकर चिंता ज्यादा बढ़ जाती है। इजराइल और अमेरिका के ईरान पर हमले के दस दिन बाद कई देशों में लगभग यही स्थिति बन रही है।
जहां तक भारत का सवाल है, तो जब से ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते को रोका है, तब से तेल टैंकरों की आवाजाही और गैस की आपूर्ति भी व्यापक रूप से बाधित हुई है। इसके अलावा, ईरान ने जवाबी हमले के तौर पर जिस तरह खाड़ी के कई देशों के तेल रिफाइनरियों पर हमले किए, उसके बाद कच्चे तेल का संकट ज्यादा गहरा गया है।
हालांकि होर्मुज मार्ग पर ईरान के रुख के बाद यह साफ हो गया था कि अगर यह युद्ध थोड़ा लंबा खिंचा, तो दुनिया के कई देश इससे बुरी तरह प्रभावित होंगे। तेल और गैस के अभाव की वजह से न सिर्फ आम जनजीवन में अफरा-तफरी पैदा होगी, बल्कि बड़े पैमाने पर आर्थिक संकट खड़ा होगा। इसी क्रम में भारत में अब यह साफ दिखने लगा है कि अगर सरकार की ओर से जल्दी ही कोई उपयुक्त कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति जटिल हो सकती है।
दरअसल, युद्ध की आंच अब भारत में रसोईघरों और व्यापार तक पहुंचनी शुरू हो गई है। एलएनजी यानी तरल प्राकृतिक गैस और एलपीजी यानी तरल पेट्रोलियम गैस के मामले में भारत आमतौर पर आयात पर निर्भर रहा है। यही वजह है कि होर्मुज समुद्री रास्ते से तेल टैंकरों की आवाजाही बाधित होने के बाद भारत में अब एलपीजी की किल्लत का खतरा मंडराने लगा है और कई राज्यों में रेस्तरां तथा होटलों को वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति में मुश्किल शुरू हो गई है।
साथ ही बाजार में खाने-पीने की चीजों से लेकर अन्य सामान की कीमतों में इजाफे की रफ्तार तेज हो गई है। असली समस्या रसोई गैस और अन्य सामान की आपूर्ति है, जिसमें भारी कमी की वजह से लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन रहा है। हालत यह है कि आने वाले दिनों में संकट गहराने की आशंका से ज्यादातर लोग एहतियातन एलपीजी सहित अन्य सामान लेने के लिए कतारों में खड़े दिखने लगे हैं।
एक ओर, जरूरत से ज्यादा खरीदारी और दूसरी ओर कारोबारियों की अवैध जमाखोरी या भंडारण की वजह से कालाबाजारी और महंगाई जैसे संकट के मद्देनजर सरकार को आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू करना पड़ा है। मगर यह सुनिश्चित करना भी सरकार की जिम्मेदारी है कि रसोई गैस या परिवहन इस हद तक नियंत्रित न हों कि इससे रोजमर्रा की अनिवार्य गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।
यह भी देखने की जरूरत होगी कि अगर जरूरी वस्तुओं की कमी का संकट गहराया, तो वैकल्पिक स्रोतों से उसे कैसे पूरा किया जाएगा।
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पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने बुधवार को कहा है कि घबराहट में एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग करने की जरूरत नहीं है। मंत्रालय ने कहा है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए करीब 2.5 दिन का सामान्य आपूर्ति चक्र बरकरार है। पढ़िए पूरी खबर
