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संपादकीय: स्वच्छता की मिसाल

इंदौर शहर से सीखा जाना चाहिए कि कैसे वहां वर्षों से मौजूद कचरे के पहाड़ को खत्म कर दिया गया और यह इंदौर नगर निगम के प्रयास और इच्छाशक्ति का ही परिणाम था। प्रशासन के इन अथक प्रयासों ने नागरिकों को स्वच्छता के बारे में सोचने को मजबूर किया और इस तरह दोनों के समन्वय से अब इंदौर कचरा प्रबंधन के एक बेहतर मॉडल के रूप में भी सामने आया है। इसमें कोई संदेह नहीं कि देश के ज्यादातर शहरों के नगर निगमों की माली हालत भी अच्छी नहीं है।

प्रधानमंत्री ने स्वच्छता अभियान की शुरुआत की थी तो काफी लोगों ने इसके प्रति उत्साह दिखाया, लेकिन अब वे थोड़े सुस्त हो गए हैं। (फाइल फोटो)

स्वच्छता को लेकर देश में जिस तरह की जागरूकता और जिम्मेदारी पिछले कुछ सालों में देखने को मिली है, उसी का परिणाम है कि आज सिर्फ इंदौर ही नहीं, कई शहर साफ-सफाई के मामले में अव्वल साबित हो रहे हैं। देश के चार हजार दो सौ बयालीस शहरों और एक करोड़ सतासी लाख लोगों के बीच किए गए स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर एक बार फिर शीर्ष पर रहा है। यह लगातार चौथा साल है जब मध्य प्रदेश के इस शहर ने यह कीर्तिमान बनाया।

इंदौर ही नहीं, देश के जितने भी शहरों ने स्वच्छता के मामले में जो उपलब्धि हासिल की है, वह इस हकीकत को और पुष्ट करती है कि शहरों को साफ रखना कोई मुश्किलों भरा काम नहीं है, न नागरिकों के लिए, न स्थानीय प्रशासन के लिए। अगर हम चाहें तो अपने शहरों की किस्मत खुद बदल सकते हैं। लेकिन भारत के ज्यादातर शहरों की हालत देख कर यह काम जरा चुनौती भरा लगता है। शहरों को कैसे साफ-सुथरा रखा जाए, इस गंभीर समस्या और सवाल से देश के ज्यादातर शहर जूझ रहे हैं। पर अब हमें इसे किसी संकट के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि उन शहरों से प्रेरणा और सबक लेना चाहिए, जो ऐसा करके दिखा रहे हैं।

शहरों में साफ-सफाई के स्तर को मापने के लिए कई मानक तैयार किए जाते हैं। इनमें रिहायशी इलाकों और परिसरों से लेकर कार्यस्थलों की सफाई तक का संज्ञान लिया जाता है। शहरों को साफ रखने में आज सबसे ज्यादा समस्या कचरा प्रबंधन को लेकर है। हर शहर और महानगर इस संकट का सामना कर रहा है और इसीलिए कई बड़े शहरों में कचरे के पहाड़ देखने को मिल जाते हैं।

राजधानी दिल्ली भी इससे मुक्त नहीं है जहां सालों से कचरे के तीन बड़े पहाड़ हैं और इनकी वजह से शहर की हवा प्रदूषित हो रही है। पिछले कुछ सालों से जब भी दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची बनती है तो उसमें शीर्ष दस-बीस शहरों में भारत के कई शहर आ जाते हैं। शहरों की गंदगी भी वायु प्रदूषण का बड़ा कारण है। ऐसे में घूम-फिर कर बात शहरों की सफाई पर आ जाती है। जो शहर आज भी गंदगी और कचरे की समस्या से उबर नहीं पा रहे हैं, वहां कहीं न कहीं नागरिकों और स्थानीय निकायों दोनों में जिम्मेदारी का अभाव एक बड़े कारण के रूप में सामने आता है।

अगर राजधानी दिल्ली को देखें तो इस महानगर के कुछ हिस्से जिन्हें वीआइपी इलाके कहा जाता है, स्वच्छता के मामले में काफी आगे हैं, और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) को दस लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में तीसरा स्थान मिला है, जबकि इसी राजधानी के पूर्वी और उत्तरी दिल्ली को देश के दस गंदे शहरों में शामिल किया गया है। यह स्थिति देश के कई शहरों और राजधानियों में देखने को मिलेगी और समाज, प्रशासन व सरकारों के सामने बड़ा सवाल भी कड़ा करती है।

इंदौर शहर से सीखा जाना चाहिए कि कैसे वहां वर्षों से मौजूद कचरे के पहाड़ को खत्म कर दिया गया और यह इंदौर नगर निगम के प्रयास और इच्छाशक्ति का ही परिणाम था। प्रशासन के इन अथक प्रयासों ने नागरिकों को स्वच्छता के बारे में सोचने को मजबूर किया और इस तरह दोनों के समन्वय से अब इंदौर कचरा प्रबंधन के एक बेहतर मॉडल के रूप में भी सामने आया है। इसमें कोई संदेह नहीं कि देश के ज्यादातर शहरों के नगर निगमों की माली हालत भी अच्छी नहीं है।

इनको मजबूत बनाने के प्रयास करने होंगे। अपने घर, इलाके और शहर को हम तभी साफ रख सकते हैं, जब भीतर एक नागरिक जिम्मेदारी का भाव पैदा हो।

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