indian women cricket team won t-20 women aisa cup - Jansatta
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जीत का जज्बा

फाइनल तक पहुंचने के पहले भारतीय टीम ने इन सबको पीछे छोड़ते हुए अपने पांचों मैचों में जीतहासिल की।

Author December 6, 2016 3:46 AM
एशिया कप टी20 खिताब के साथ भारतीय महिला टीम के सभा खिलाड़ी। (फोटो सौजन्य बीसीसीआई)

एशिया कप में यह छठी बार है जब खिताब भारतीय महिला क्रिकेट टीम के नाम रहा। जाहिर है कि इसके लिए टीम की खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में भाग ले रही बाकी सभी टीमों से खुद को सबसे बेहतर साबित किया। 2004 में शुरू हुई इस प्रतियोगिता में पहले पचास ओवरों के मैच होते थे। लेकिन 2014 से इसे बीस ओवरों में समेट दिया गया। तो इस बार के फाइनल में भारत की महिला क्रिकेट टीम ने बीस ओवरों में एक सौ इक्कीस रन बनाए और इसके बाद पाकिस्तान को छह विकेट पर एक सौ चार रन पर समेट दिया। सत्रह रनों की जीत कोई बड़ा फासला नहीं है। लेकिन जब जीत का अंतर कम होता है, तभी खेल के दौरान किसी मैच का रोमांच बना रहता है। इससे पहले सेमी फाइनल में भारतीय टीम ने श्रीलंका को बावन रनों से मात देकर फाइनल में जगह बनाई थी। श्रीलंका की महिला क्रिकेट टीम को भी काफी मजबूत माना जाता रहा है। यह भी गौरतलब है कि फाइनल में पहुंचने वाली पाकिस्तान की टीम ने भी एक मजबूत चुनौती पेश की थी। लेकिन फाइनल तक पहुंचने के पहले भारतीय टीम ने इन सबको पीछे छोड़ते हुए अपने पांचों मैचों में जीतहासिल की।

मगर एक बड़ी विडंबना यह है कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम की बड़ी उपलब्धियों या खिताबी जीत को भी जनसामान्य के बीच उतनी अहमियत नहीं मिल पाती, जितनी कि पुरुष टीम की किसी भी जीत को मिल जाती है। जबकि महिला टीम की कामयाबी भी देश की शान में उतना ही इजाफा करती है और खेल की दुनिया में अपनी क्षमता और काबिलियत दर्ज करती है। बीसीसीआइ अगर महिला टीम की उपलब्धियों और उनके महत्त्व को कमतर नहीं मानती है तो जनसामान्य के बीच प्रचार-प्रसार के लिहाज से उसे और सक्रिय दिखना चाहिए था। यह जीत सिर्फ पाकिस्तान पर बढ़त नहीं है, बल्कि यह खिताबी जीत है। लेकिन इस जीत के वक्त इसी साल मार्च में घरेलू मैदान पर विश्व टी-20 कप में पाकिस्तान से हुई हार की याद स्वाभाविक है। यानी एक तरह से ताजा जीत हिसाब चुकता करने जैसी भी है।इसके बावजूद, इस मैच की अहमियत इस बात में निहित है कि जब राजनीतिक परिदृश्य पर भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध बेहद कटुता भरे चल रहे हैं, उस समय भी प्रतियोगिता में आखिर खेल भावना की जीत हुई।

हालांकि कुछ समय पहले ऐसी नौबत आ गई थी कि महिला क्रिकेट टीम के पाकिस्तान के साथ एक अगस्त से इकतीस अक्तूबर तक द्विपक्षीय सिरीज नहीं खेलने के कारण शृंखला में आइसीसी ने छह अंक काट लिये थे। दरअसल, कुछ मैचों में हिस्सेदारी के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी होती है, और उसी के चलते यह असुविधाजनक स्थिति पैदा हुई थी। लेकिन उसके बाद एशिया कप में भारत और पाकिस्तान के बीच मैच सहज रहे तो इसे एक सकारात्मक संकेत माना जाना चाहिए। दो देशों के बीच तनाव का असर कई बार उनके बीच होने वाले खेल मुकाबलों पर भी दिखता रहा है। लेकिन गीत-संगीत, कला माध्यमों या सांस्कृतिक आयोजनों के अलावा खेल भी एक ऐसा क्षेत्र है जो दो देशों के आपसी संबंधों में जमी बर्फ को पिघलाता है।

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