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संपादकीयः हत्या और सवाल

हाल के कुछ वर्षों में अमेरिका में भारतीयों के प्रति बदलता बर्ताव चिंता का विषय बना हुआ है। इस दौरान कई भारतीय विद्यार्थी भी जानलेवा हमले के शिकार हुए।

Author July 10, 2018 3:55 AM
कंसास शहर में आंध्र प्रदेश के रहने वाले शरद कोप्पुला नाम के भारतीय छात्र की लुटेरों ने गोली मार कर हत्या कर दी।

हाल के कुछ वर्षों में अमेरिका में भारतीयों के प्रति बदलता बर्ताव चिंता का विषय बना हुआ है। इस दौरान कई भारतीय विद्यार्थी भी जानलेवा हमले के शिकार हुए। आलोचना के घेरे में आई अमेरिकी सरकार ने इस पर काबू पाने का भरोसा दिया था। लेकिन शनिवार को फिर से कंसास शहर में आंध्र प्रदेश के रहने वाले शरद कोप्पुला नाम के भारतीय छात्र की लुटेरों ने गोली मार कर हत्या कर दी। ऐसा लगता है कि अमेरिका में भारतीयों के प्रति एक खास तरह का पूर्वग्रह का भाव पल रहा है, जो अकसर हिंसक रूप में सामने आ रहा है। शरद कंसास में अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ-साथ अतिरिक्त समय में एक रेस्तरां में काम भी कर रहे थे। शरद की हत्या की घटना दुखद और निंदनीय तो है ही, साथ ही चिंता का विषय भी है। अमेरिका के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और दूसरे संस्थानों में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में जिस तरह से भारतीय छात्र लूटपाट और घृणा अपराधों के शिकार हुए हैं, वह चौंकाने वाला है। इस तरह की घटनाओं से तो यह नतीजा निकलता है कि अमेरिका जैसे देश में भी भारतीय छात्र सुरक्षित नहीं हैं।

भारत से जो युवा अमेरिका में पढ़ने जाते हैं, उनमें बहुत सारे डिपार्टमेंटल स्टोर, पेट्रोल पंप, रेस्तरां जैसी जगहों पर अपने अतिरिक्त समय में काम भी कर लेते हैं, ताकि पढ़ाई का खर्च आसानी से निकल सके। लेकिन इस तरह की घटनाओं से भारतीयों की सुरक्षा सवालों के घेरे में आ जाती है। अमेरिका में भारतीय मूल के नागरिक और विद्यार्थी अकसर लुटेरों का निशाना बनते रहते हैं। बीते कुछ सालों के दौरान ऐसी जितनी भी घटनाएं हुई हैं उनमें यही देखा गया है कि हमले के बाद पुलिस की सक्रियता से अपराधी पकड़े जाते हैं, सजा भी होती है लेकिन फिर भविष्य में ऐसी घटना न होने की गारंटी अमेरिकी प्रशासन या पुलिस नहीं दे पाती। जबकि अमेरिका जैसे देश से यह उम्मीद इसलिए भी की जाती है कि वह दुनिया की अत्याधुनिक सुरक्षा-सुविधाओं वाला और सबसे सुरक्षित देश माना जाता है। अमेरिका जाकर पढ़ाई करना बहुत सारे युवकों का सपना होता है। लेकिन जब इस तरह के हादसे होते हैं तो वहां जाकर पढ़ाई करने की खुशियां सदमे में बदल जाती हैं।

पिछले साल आंध्र प्रदेश के रहने वाले श्रीनिवास कुचिभोटला घृणा अपराध का शिकार हो गए थे। उन्हें अमेरिकी नौसेना के जिस कर्मी ने मारा था उसने कहा था- ‘मेरे देश से निकल जाओ!’ इसी तरह, कुछ साल पहले ड्यूक विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले इंजीनियरिंग के एक शोध छात्र अभिजीत महतो की उत्तरी कैरोलिना में गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। उससे पहले लुसियाना प्रांत में दो भारतीय छात्रों की हत्या हो गई थी। फिर 2012 में बोस्टन विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले भारतीय छात्र शेषाद्रि राव संदिग्ध हालात में घर के बाहर मृत मिले थे, जबकि वे कड़ी सुरक्षा वाले इलाके में रहते थे। लेकिन अगर कई घटनाएं अपनी प्रकृति में एक ही होती हैं तो चिंता स्वाभाविक है। यों अमेरिका में जिस तरह से विद्यार्थी या विदेशी नागरिक लूटपाट जैसी घटनाओं के शिकार बन रहे हैं, वह खुद अमेरिकी समाज के भी चरमराते तानेबाने की ओर भी इशारा करता है। अमेरिकी स्कूलों में अकसर होने वाली गोलीबारी की घटनाएं बताती हैं कि अमेरिकी समाज किस कदर हिंसा में जकड़ता जा रहा है। ऐसे में अमेरिका को यह सोचने की जरूरत है कि वहां के नौजवान कैसा समाज बनाने की ओर बढ़ रहे हैं।

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