Retail Inflation: जब किसी भी तरह के रोजगार से आय का स्तर ठहरा हुआ हो, जरिया सीमित हो, तो आम आदमी की उम्मीद यही होती है कि बाजार में जरूरी वस्तुओं की कीमतें उसकी पहुंच में हों या फिर कम से कम स्थिर रहें। मगर पिछले कुछ वर्षों से आमदनी की तुलना में रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए लोगों को जितना खर्च करना पड़ रहा है, वह कई बार भारी पड़ता है।
माना जाता है कि दिसंबर से फरवरी तक की अवधि में बाजार में सब्जियों की आवक ज्यादा होने की वजह से महंगाई काबू में रहेगी। मगर सरकार की ओर से जारी ताजा आंकडोÞं के मुताबिक, देश में खुदरा महंगाई फरवरी में बढ़ कर 3.21 फीसद हो गई। हालांकि जनवरी में यह 2.74 फीसद के स्तर पर रही थी। जाहिर है, सिर्फ एक महीने के भीतर जरूरी वस्तुओं की कीमतों में तेज इजाफा हुआ और यह पिछले दस महीने के सबसे उच्च स्तर पर दर्ज किया गया।
कहा जा सकता है कि फरवरी के आंकड़े के मुताबिक महंगाई दर चार फीसद से नीचे है, लेकिन यह भी देखने की जरूरत है कि कीमतों के संदर्भ में जरूरी सामान तक आम लोगों की पहुंच किस हद तक आसान है। यह छिपा नहीं है कि रोजगार और आय की कसौटी पर देश की ज्यादातर आबादी के लिए स्थिति अब भी संतोषजनक नहीं है। लंबे समय से स्थिर आमदनी और कमजोर क्रयशक्ति की स्थिति में जब सबसे जरूरी चीजों पर लोगों का खर्च थोड़ा भी बढ़ता है, तो उसके लिए मुश्किलें पैदा होती हैं।
फरवरी में महंगाई के आंकड़ों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण दरअसल खाने-पीने की चीजों के दामों में बढ़ोतरी रहा। खुदरा महंगाई से इस बात का पता चलता है कि ग्राहकों की खपत और खर्च की स्थिति क्या है। इसी वजह से रिजर्व बैंक अपनी नीति तय करते समय खुदरा महंगाई को ही अपना आधार बनाता है। अगर खुदरा महंगाई की दर उसके तय दायरे यानी चार फीसद के बाहर चली जाती है तो फिर कर्ज के सस्ता होने की उम्मीद भी कम हो जाती है।
महंगाई के ताजा आंकड़े फरवरी के हैं, जब पश्चिम एशिया में युद्ध के हालात नहीं थे। अब पिछले कुछ दिनों से जिस तरह ईरान के खिलाफ इजराइल और अमेरिका की साझा जंग चल रही है, उसका बाजार में थोक और खुदरा महंगाई पर क्या असर पड़ेगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। दरअसल, युद्ध की वजह से तेल की सहज आपूर्ति को लेकर पहले ही कई तरह की आशंकाएं उभर रही थीं कि इस बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के समुद्री मार्ग को बाधित कर दिया।
इसके बाद उस रास्ते से भारत में भी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति व्यापक पैमाने पर बाधित हुई है और इसका असर बाजार पर पड़ना तय माना जा रहा है। फिलहाल खाना पकाने वाले गैस की कीमत में इजाफा और गैस सिलेंडरों की कमी की आशंका में लोगों के बीच मची अफरा-तफरी देखी जा सकती है। ऐसे में इस बात की आशंका गहरा रही है कि अगर युद्ध लंबा खिंचा और कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित रही, तो भारत में भी पेट्रोल-डीजल के दाम पर भी इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
इसके बाद माल ढुलाई में बढ़ोतरी के साथ स्वाभाविक रूप से बाजार में मौजूद सभी चीजें महंगी होंगी। जाहिर है, सरकार को आने वाले दिनों में हालात का आकलन कर महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने की जरूरत है।
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