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संपादकीयः संघर्ष अविराम

जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर पाकिस्तान की ओर से रोजाना जिस तरह की गोलीबारी हो रही है, उससे यही लगता है कि पाकिस्तान को इसके नतीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता।

Author Published on: April 3, 2019 1:54 AM
राजौरी और पुंछ जिले में सीमावर्ती इलाकों को निशाना बनाने वाले पाकिस्तानी सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए भारतीय सैनिकों ने सीमा पार नियंत्रण रेखा से लगी पाकिस्तान की सात चौकियां तबाह कर दी।

जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर पाकिस्तान की ओर से रोजाना जिस तरह की गोलीबारी हो रही है, उससे यही लगता है कि पाकिस्तान को इसके नतीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता। अगर इस पर भारत भी वैसी ही प्रतिक्रिया देगा तो हालात जटिल होंगे। पूरे जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान से लगने वाली सीमा पर ऐसे हालात गंभीर चिंता का विषय इसलिए हैं कि इसका सबसे ज्यादा नुकसान इन इलाकों में रहने वालों को उठाना पड़ रहा है और निर्दोष लोग पाकिस्तानी फौज की गोलीबारी का शिकार हो रहे हैं। सोमवार को पाकिस्तान की ओर से दिन भर हुई गोलीबारी में सीमा सुरक्षा बल का एक इंस्पेक्टर शहीद हो गया और एक बच्ची सहित एक महिला की मौत हो गई। अभी तक माना जा रहा था कि पुलवामा के आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को जो सबक सिखाया, उसका कुछ असर होगा। लेकिन लगता है पाकिस्तान अब खिसियाहट की स्थिति में ऐसी गतिविधियां जारी रखे हुए है जिनसे भारत को उकसाया जा सके।

हालांकि इस तरह की हरकतें करना पाकिस्तान के लिए नई बात इसलिए नहीं है कि संघर्ष विराम के दौरान भी वह सीमा क्षेत्र में गोलीबारी करने से बाज नहीं आता। ऐसा लगता है कि उसके लिए संघर्षविराम अर्थहीन है। पिछले चार साल के आंकड़े बता रहे हैं कि पाकिस्तान की ओर से नियंत्रण रेखा के उल्लंघन और गोलीबारी की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। वर्ष 2015 में नियंत्रण रेखा के उल्लंघन की चार सौ पांच, 2016 में चार सौ उनचास, 2017 में सात सौ इकहत्तर बार और 2018 में दो हजार तीन सौ छत्तीस यानी औसतन छह से सात बार रोजाना उल्लंघन और गोलीबारी की घटनाएं हुर्इं। इसके अलावा, सोमवार तड़के पंजाब से सटी सीमा के पास पाकिस्तान के एफ-16 विमानों ने उड़ान भर कर दहशत पैदा करने की कोशिश की। ये विमान खेमकरण सेक्टर के काफी करीब तक आ गए थे। माना जा रहा है कि भारतीय लड़ाकू विमानों की तैनाती के बारे में टोह लेने के मकसद से यह किया गया था। पिछले महीने भी भारतीय सेना ने बीकानेर सेक्टर में एक पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराया था। ये घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि पाकिस्तान ने भारत के प्रति कोई रुख नहीं बदला है, बल्कि वह भारत को अशांत करने में लगा है।

दूसरी ओर, हिज्बुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन घाटी में अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए हैं। हाल में पुलवामा आतंकी हमले जैसा ही सीआरपीएफ के काफिले पर एक और आत्मघाती हमला करने की तैयारी थी। लेकिन जिस कार में जिलेटिन की छड़ें, अमोनियम नाइट्रेट, सल्फर, यूरिया जैसे विस्फोटक रखे थे, हमलावर से उसका ट्रिगर नहीं दब पाया और हादसा होने से बच गया। यह साजिश हिज्बुल की थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस हमले की साजिश के बारे में भी पहले कोई खुफिया सूचना नहीं मिल पाई। इसे संयोग ही कहा जाएगा कि कार में आग लगने के बाद आतंकी भाग निकला, जिसे तीन दिन बाद पुलिस ने पकड़ा। इससे पता चलता है कि घाटी में आतंकियों के खिलाफ सुरक्षा बलों और सेना का अभियान भले ही जारी हो, लेकिन आतंकी ताकत के साथ अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। आतंकी संगठन सुरक्षा बलों को लगातार निशाना बनाने की साजिश रच रहे हैं। उनकी रणनीति सेना और सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचा कर मनोबल तोड़ने की है। पुलवामा हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल ने इस बात को माना था कि खुफिया तंत्र की चूक की वजह से वह आतंकी हमला हुआ। जाहिर है, घाटी में आतंकियों की बढ़ती गतिविधियां कहीं न कहीं खुफिया तंत्र की कमजोरी का भी नतीजा हैं।

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