पाकिस्तान की ओर से भारतीय सीमा में घुसपैठ और इससे जुड़ी आतंकवाद की समस्या ने भारत को किस स्तर तक नुकसान पहुंचाया है, यह छिपा नहीं है। हालांकि सीमा पर तैनात सुरक्षा बल के जवान अपनी ओर से पूरी कोशिश करते हैं कि पाकिस्तानी ठिकानों से भारत में घुसपैठ करने वालों को रोकें, गिरफ्तार करें या फिर जरूरत पड़ने पर उन्हें निशाना बनाया जाए। विडंबना यह है कि आज भी सीमा पर भारत को अक्सर घुसपैठ और आतंकी हमलों का सामना करना पड़ता है।
इसकी एक बड़ी वजह सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था के तार और निगरानी का तंत्र अपेक्षित स्तर पर मजबूत न होने को माना जाता रहा है। फिर सीमा पर स्थित रिहाइशी इलाकों में भी कई बार आतंकी सूत्रों से जुड़े लोगों की पहचान नहीं पाने के अपने जोखिम हैं। शायद यही वजह है कि गृहमंत्री अमित शाह ने साफ लहजे में पाकिस्तान सीमा के आसपास सुरक्षा के लिहाज से सख्त नीति अपनाने को कहा है।
गौरतलब है कि राजस्थान के सीमावर्ती इलाके के आसपास के जिलों में सुरक्षा को लेकर गृहमंत्री अमित शाह ने उच्चस्तरीय बैठक में भारत और पाकिस्तान सीमा के आसपास चौतरफा सुरक्षा योजना के तहत कई अहम निर्देश दिए हैं। इसके मुताबिक, अब सीमा से पंद्रह किलोमीटर तक के क्षेत्र में हर अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और शून्य सहनशीलता की नीति के तहत ऐसे निर्माणों को ध्वस्त किया जाएगा।
इस सख्ती की वजह मुख्य रूप से राजस्थान के सीमाई इलाके के जिलों में घुसपैठ, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाना है। यह छिपा नहीं है कि सीमा से सटे क्षेत्र में पाकिस्तान की ओर से अलग-अलग रूप में होने वाली घुसपैठ अंतिम तौर पर भारत में आतंकवाद की जड़ों को मजबूत करती है।
खासतौर पर सीमावर्ती इलाकों में अवैध रूप से रहने वाले कुछ लोग कई बार आतंकियों के लिए अप्रत्यक्ष सहायक के रूप में काम करते हैं। इनमें से कई लोग भ्रष्टाचार का सहारा लेकर न केवल स्थानीयता का फर्जी दस्तावेज बनवा लेते हैं, बल्कि संदिग्ध वित्तीय लेनदेन, अवैध गतिविधियों और सीमा पार से मादक पदार्थों की तस्करी में भी लिप्त होते हैं।
यह अकारण नहीं है कि आतंकवाद के खिलाफ चलने वाले अभियान के सामने अक्सर आंतरिक मोर्चों पर खड़ी जटिलताएं एक बड़ी चुनौती होती हैं। दरअसल, पाकिस्तान स्थित ठिकानों से अपनी गतिविधियां संचालित करने वाले आतंकी संगठनों ने सीमावर्ती इलाकों में अपना नेटवर्क खड़ा करने के लिए स्थानीय आबादी में घुसपैठ करके अपनी जगह बनाने को एक ढांचे के रूप में विकसित किया है। इसके अलावा, वे कारोबारी प्रतिष्ठानों से संपर्क साध कर भी आतंकी संगठनों के वित्तपोषण का एक संजाल खड़ा करते हैं।
पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को शह देने का मुद्दा कई बार अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भी उठ चुका है। भारत की ओर से लगातार चेतावनी और सख्ती के बावजूद सीमा पर घुसपैठ और आतंकवादी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगा पाना अब तक संभव नहीं हो सका है। पिछले वर्ष पहलगाम में पर्यटकों पर हमले से लेकर आतंकी वारदात की एक लंबी श्रृंखला रही है। इस लिहाज से देखें, तो सीमावर्ती इलाकों में आतंकी तत्त्वों या उनके लिए सहयोगी के रूप में काम करने वाले तंत्र के खिलाफ सख्ती एक जरूरी कार्रवाई है।
यह भी पढ़ें: राजौरी के जंगलों में घिर रहे आतंकी, छठे दिन और तेज हुआ ऑपरेशन शेरूवाली; सेना ने कसा सुरक्षा घेरा
जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में चल रहा ‘ऑपरेशन शेरूवाली’ अब निर्णायक चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। डोरीमल और गंभीर मुगलान के घने जंगलों में छिपे पाकिस्तानी आतंकी कमांडरों की तलाश में सुरक्षाबलों ने अपना घेरा और मजबूत कर दिया है। गुरुवार को पूरे इलाके में कई घंटों तक भारी गोलीबारी और धमाकों की आवाजें गूंजती रहीं, जिससे पहाड़ी क्षेत्र दहल उठा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
