अमेरिका की ओर से शुल्क लगाए जाने और उसके बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष से उपजे संकट के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए विकल्प तलाशने तथा पहले से स्थापित साझेदारी को विस्तार देने को लेकर भारत के प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं। इस क्रम में अब भारत, फ्रांस और स्लोवाकिया के बीच आपसी संबंधों को व्यापक साझेदारी के स्तर पर ले जाने की सहमति बनी है।

फ्रांस के साथ द्विपक्षीय व्यापार को पांच वर्षों में दोगुना कर 32 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा रेल सेवा क्षेत्र में सहयोग के लिए एक घोषणा-पत्र और गोपनीय डेटा की सुरक्षा के लिए समझौते को भी अंतिम रूप दिया गया है। इसी तरह स्लोवाकिया से द्विपक्षीय व्यापार और रक्षा सहयोग समेत कई महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी के लिए ग्यारह समझौते किए गए हैं।

ये समझौते इसलिए अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि इससे अमेरिका के विकल्प के रूप में भारत की पहुंच अन्य विदेशी बाजारों तक बढ़ेगी। साथ ही इससे ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी गति मिलेगी, जो देश के आत्मनिर्भर होने के लिए बेहद जरूरी है।

गौरतलब है कि अमेरिका ने पिछले वर्ष भारत पर पचास फीसद शुल्क लगाया था, जिसका सीधा असर देश के निर्यात पर पड़ा था। हालांकि, बाद में अमेरिका ने इस शुल्क को कम कर दिया था, लेकिन भारत ने इसे एक सबक की तरह लिया और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए दुनिया के दूसरे बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के प्रयास शुरू किए। ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते इन्हीं प्रयासों का नतीजा हैं।

अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस और स्लोवाकिया दौरे के दौरान इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए दोनों देशों के साथ साझेदारी को विस्तार देने का प्रयास किया है। फ्रांस के साथ तेरह मुद्दों पर सहमति बनी है, जिनमें रक्षा, सुरक्षा, अंतरिक्ष, असैन्य परमाणु ऊर्जा, व्यापार एवं निवेश, तकनीक, नवाचार और शिक्षा के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग शामिल हैं।

इस दौरान फ्रांस से 114 रफाल लड़ाकू विमान खरीदने की भारत की योजना पर भी चर्चा हुई। खास बात यह है कि भारत ने किसी भी रक्षा मंच के मामले में इस आधार पर आगे बढ़ने पर जोर दिया, जिसमें देश की अधिक से अधिक स्थानीय सामग्री का इस्तेमाल हो और रक्षा उत्पादों का विनिर्माण भी देश की धरती पर हो।

इसी तरह भारत और स्लोवाकिया ने डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं रक्षा जैसे कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए ग्यारह समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। साथ ही दोनों देशों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को जल्द लागू करने की दिशा में काम करने पर भी सहमति जताई है। इस व्यापक साझेदारी का उद्देश्य न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है, बल्कि मौजूदा बहुपक्षीय स्तर पर भी सहयोग को और प्रगाढ़ करने के नए रास्ते तलाशना है।

इसमें दोराय नहीं कि अमेरिका की ओर से जिस तरह के मनमाने फैसले दूसरे देशों पर थोपे जा रहे हैं, उससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। अमेरिका की शुल्क नीति से भारत जैसे विकासशील देश सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। यह भी किसी से छिपा नहीं है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण पैदा हुए संकट के पीछे अमेरिका की अहम भूमिका रही है। ऐसे में भारत के लिए व्यापार के वैकल्पिक बाजार तलाशना बेहद जरूरी है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर अमेरिका की मनमानी नीतियों का प्रभाव कम किया जा सके।