भारत और कनाडा के बीच हुए अहम समझौतों को कूटनीतिक एवं आर्थिक संबंधों के एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों ने सोमवार को यूरेनियम और दुर्लभ खनिजों की दीर्घकालिक आपूर्ति समेत कई ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इस कदम को द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती के लिए संजीवनी की तरह माना जा रहा है, क्योंकि रिश्तों में आए लंबे गतिरोध के बाद सहयोग के रास्ते खुले हैं। ये समझौते इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि दोनों देशों के संबंध अब अस्थिरता के दौर से बाहर निकलकर अधिक परिपक्व और भविष्य की जरूरतों को समझकर साझेदारी को आगे बढ़ाने के चरण में प्रवेश कर चुके हैं।

कनाडा से यूरेनियम की आपूर्ति होने से जहां भारत के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए ईंधन की निरंतरता सुनिश्चित होगी, वहीं दोनों देशों में निवेश और व्यापारिक गतिविधियों के नए प्रवाह से आर्थिक विकास को गति मिलने के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। वर्तमान में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार तेरह अरब डालर के आसपास है, जिसे चौगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।

गौरतलब है कि भारत और कनाडा के संबंधों में वर्ष 2023 में उस वक्त खटास पैदा हो गई थी, जब तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में भारतीय एजंट की संलिप्तता के आरोप लगाए गए थे। भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था, लेकिन इस घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। उस समय उपजी तल्खी ने व्यापारिक और कूटनीतिक संवाद को लगभग बाधित कर दिया था।

हालांकि, पिछले वर्ष मार्च में मार्क कार्नी के कनाडा के प्रधानमंत्री बनने के बाद से दोनों पक्षों ने संबंधों के पुनर्निर्माण और विश्वास बहाली के लिए उपायों की एक निरंतर शृंखला शुरू की, जिसका नतीजा अब ऐतिहासिक समझौतों के रूप में सामने आया। इस रणनीतिक साझेदारी के केंद्र में इस वर्ष के अंत तक ‘व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते’ को संपन्न करने और वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय वार्षिक व्यापार को बढ़ाकर पचास अरब डालर के पार ले जाने का संकल्प व्यक्त किया गया है।

कनाडा से यूरेनियम की आपूर्ति से संबंधित समझौते को भारत की ऊर्जा सुरक्षा की लिहाज से अत्यंत महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके अंतर्गत वर्ष 2027 से 2035 के बीच भारत को लगभग 2.2 करोड़ पाउंड यूरेनियम की आपूर्ति कनाडा से की जाएगी। इससे भारत के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए ईंधन की जरूरत को पूरा कर पाना संभव हो पाएगा। यही नहीं, दुर्लभ खनिजों पर हुआ समझौता भारत के स्वच्छ ऊर्जा अभियान और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को गति एवं नई दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकता है।

कनाडा में दुर्लभ खनिजों का विशाल भंडार है और यह समझौता भारत के लिए एक मजबूत एवं सुरक्षित आपूर्ति शृंखला सुनिश्चित करने में मददगार होगा। इसी तरह रक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग के नए आयाम खोले हैं और द्विपक्षीय रक्षा संवाद स्थापित करने का निर्णय लिया है, जो रक्षा उद्योगों के एकीकरण और सैन्य साजो-सामन के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के साथ ही समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा के साझा प्रयासों को मजबूती से आगे बढ़ाएगा। इन समझौतों के बाद उम्मीद की जा रही है कि दोनों देश साझा हितों को लेकर भविष्य में सहयोग के नए आयाम स्थापित करेंगे।