India-Brazil Relationship: मौजूदा दौर में दुनिया भर में भू-राजनीति के स्वरूप में जिस तेजी से उतार-चढ़ाव देखे जा रहे हैं, उसमें सभी देशों के सामने अपने भविष्य और विकास की राह सुरक्षित करने की चुनौती दिख रही है। खासतौर पर जिन कारकों पर आने वाले वर्षों में विकास की दिशा निर्भर करेगी, उसके मद्देनजर अलग-अलग देशों के बीच साझेदारी के नए अध्याय तैयार हो रहे हैं, विकल्प की राह खोजी जा रही है।
भारत और ब्राजील के बीच हुए समझौते को इसी की एक कड़ी के रूप में देखा जा सकता है, जिसमें मुख्य रूप से उन बिंदुओं पर सहमति बनी है, जिसमें सहयोग के क्षेत्र में विकल्प के नए रास्ते तैयार हों। आज दुनिया भर में यह चिंता सतह पर देखी जा रही है कि आने वाले वर्षों में विकास का आधार बनने वाले अहम कारकों को लेकर कैसे एक नई आपूर्ति शृंखला बनाई जाए।
20 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य
भारत-ब्राजील के बीच हुआ समझौता इसी संदर्भ में महत्त्वपूर्ण हो जाता है कि इसके जरिए दोनों को अन्य मजबूत देशों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि इस समझौते में अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को बीस अरब डालर से ज्यादा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसे एक मजबूत आपूर्ति शृंखला बनाने की दिशा में काफी महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। समझौते में सबसे अहम सहमति दुर्लभ खनिजों और भू-धातुओं को लेकर बनी है, जो आने वाले वर्षों में समूची दुनिया में विकास के सबसे अहम कारक बनने वाले हैं।
इससे तकनीक के क्षेत्र में आदान-प्रदान, नई संभावनाओं की खोज, अनुसंधान और विकास को बढ़ावा मिलेगा। यह जगजाहिर तथ्य है कि आज लीथियम और कोबाल्ट जैसे अन्य दुर्लभ खनिज तथा भू-धातु विकास के संचालक तत्त्व बन रहे हैं। वैश्विक स्तर पर जिस तरह इलेक्ट्रिक वाहनों, ऊर्जा क्षेत्र, आधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण और रोबोटिक्स उत्पादन के क्षेत्र में सभी देश अपनी स्थिति मजबूत करना चाहते हैं और इस संबंध में ज्यादा बेहतर अवसरों की तलाश में हैं। ऐसे में दुर्लभ खनिजों की मांग में काफी तेजी आने की उम्मीद है।
चीन पर कम होगी निर्भरता
फिलहाल वैश्विक स्तर पर दुर्लभ खनिज प्रसंस्करण के सबसे बड़े हिस्से पर चीन का नियंत्रण है। भारत-ब्राजील के बीच हुए समझौते का एक मुख्य उद्देश्य आधुनिक उद्योग और तकनीक के लिए आवश्यक सामग्री की दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करना है और साथ ही इस क्षेत्र के प्रमुख आपूर्तिकर्ता और खासतौर पर चीन पर निर्भरता को कम करना है। भारत के लिए यह समझौता इसलिए महत्त्वपूर्ण है कि ब्राजील को चीन के बाद दुर्लभ खनिजों से समृद्ध दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश माना जाता है। ब्राजील के साथ नए करार के बाद भारत को इन खनिजों को सीधे हासिल करने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को लेकर एक सहमति बनी है। इसका असर छोटे कारोबारियों पर भी पड़ेगा और उन्हें नई तकनीकों के साथ-साथ ब्राजील के बाजार और उसकी नीतियों के अनुकूल अपना रुख तय करने का मौका मिलेगा। साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल क्षेत्र में विकास के अन्य अहम बिंदुओं पर भी सहयोग के नए आयाम खुले हैं। दोनों देशों के बीच साझेदारी ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिका व्यापार समझौते में भारत के सामने अपने फायदे में शर्तें सामने रख रहा है।
हालांकि यह ध्यान रखने की जरूरत है कि बहुध्रुवीय विश्व में अगर कोई विकसित देश अपने हित में विकासशील देशों पर दबाव को औजार बनाता है, तो आज एक बेहतर कूटनीति विकल्प की राह तैयार कर सकती है।
यह भी पढ़ें: AI बदलेगा विकास का भविष्य, दिल्ली समिट से उभरीं संभावनाएं और चुनौतियां

स्वास्थ्य, कृषि, जलवायु परिवर्तन, शासन और आर्थिक विकास के मामले में खड़ी होने वाली बाधाओं का हल निकालने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को आगे बढ़ाने की जमीन तैयार करने की कोशिश की जा रही है। पढ़िए पूरा लेख…
