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संपादकीयः अमीरी का पायदान

अर्थव्यवस्था के मामले में भारत ने फ्रांस को पछाड़ दिया है और दुनिया की छठी बड़ी आर्थिक ताकत बन गया है। यह खबर वाकई खुशफहमी पैदा करती है।

Author July 13, 2018 04:16 am
विश्व बैंक की रिपोर्ट का लब्बोलुआब यह है कि भारत अब अमीर देशों की कतार में शामिल होने की दिशा में अग्रसर है।

अर्थव्यवस्था के मामले में भारत ने फ्रांस को पछाड़ दिया है और दुनिया की छठी बड़ी आर्थिक ताकत बन गया है। यह खबर वाकई खुशफहमी पैदा करती है। इससे जो माहौल बनेगा, वह गदगद करने वाला होगा। विश्व बैंक ने बताया है कि अर्थव्यवस्था के वैश्विक पैमाने पर फ्रांस अब सातवें पायदान पर खिसक गया है और उसकी जगह भारत ने ले ली है। चौंकाने वाली बात यह है कि अगले साल भारत, ब्रिटेन को भी पीछे छोड़ सकता है और पांचवें स्थान पर आ सकता है। विश्व बैंक ने भारत की तारीफ इसलिए भी की है कि नोटबंदी और जीएसटी जैसे बड़े फैसलों से विनिर्माण क्षेत्र में तेजी आई है और लोगों की खरीद क्षमता बढ़ी है। इससे अर्थव्यवस्था को ताकत मिली है। आंकड़ों का हवाला देते हुए विश्व बैंक ने बताया कि फ्रांस की अर्थव्यवस्था एक सौ सतहत्तर लाख करोड़ की रह गई है और भारत की एक सौ अठहत्तर लाख करोड़ हो गई है। विश्व बैंक के इस पैमाने से देखें तो अब भारत से ऊपर अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन ही हैं। इसलिए स्वाभाविक रूप से भारत को अपनी इस उपलब्धि पर खुश होना चाहिए कि उसने एक विकसित देश को पीछे छोड़ दिया है!

लेकिन अर्थव्यवस्था के आंकड़ों का मकड़जाल बेहद जटिल होता है। यह आम लोगों की समझ से परे होता है। दुनिया के मुकाबले हम कहां खड़े हैं, तरक्की के किस पायदान पर पहुंचे, खुशहाली के पैमाने पर कहां टिकते हैं, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, कुपोषण, भुखमरी जैसे मामलों में हमारी हकीकत क्या है, यह सब वैश्विक रेटिंग एजेंसियों, विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों से ही पता चलता है। रेटिंग एजेंसियां बताती हैं कि आर्थिक विकास के मामले में हमारी क्या हैसियत है। विकास दर का अनुमान तो सभी अपने-अपने हिसाब से लगाते हैं। किसी में राहत के संकेत होते हैं तो किसी में चेतावनी की ओर इशारा होता है। कभी भारत की आर्थिक सेहत को लेकर चिंता जताई जाती है, तो कभी सब कुछ अच्छा होता है। इसलिए कई बार रेटिंग एजेंसियां आलोचना के घेरे में भी आई हैं। लेकिन अब विश्व बैंक जैसी सबसे बड़ी संस्था ने अर्थव्यवस्था के छठे पायदान पर होने की बात कही है तो माना जाना चाहिए कि भारत आर्थिक मोर्चे पर विकसित देशों को पछाड़ने की स्थिति में पहुंच गया है।

विश्व बैंक की रिपोर्ट का लब्बोलुआब यह है कि भारत अब अमीर देशों की कतार में शामिल होने की दिशा में अग्रसर है। पर इस तथ्य पर भी गौर होना चाहिए कि फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी की कुल आबादी भारत की कुल आबादी का पांचवां हिस्सा भी नहीं है। इन तीनों देशों में प्रति व्यक्ति आय सालाना साढ़े बयालीस हजार डॉलर से साढ़े छियालीस हजार डॉलर के बीच बैठती है। इनकी तुलना में भारत में प्रति व्यक्ति आय दो हजार डॉलर से भी कम है, यानी एक हजार नौ सौ चौंसठ डॉलर। प्रति व्यक्ति आय का यह भारी अंतर बताता है कि खुशहाली और जीवन स्तर के हिसाब से हम इन तीनों देशों से दशकों पीछे हैं। हकीकत यह है कि भारत तो अमीर बनता जा रहा है, लेकिन भारत के लोग वहीं के वहीं हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे मोर्चों पर तमाम देशों से पीछे हैं। भ्रष्टाचार गहरे तक पैठा हुआ है। मलेरिया जैसी बीमारी से निपटने में हम श्रीलंका से भी पिछड़ गए। पिछले साल के वैश्विक भूख सूचकांक में एक सौ उन्नीस देशों में हमारा स्थान सौवां था। ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसी अमीरी का क्या मतलब है जो गरीबी को मात न दे पाए!

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