ईरान पर अमेरिका और इजराइल के साझा हमले के बाद समूचे मध्यपूर्व के इलाके में जैसे जटिल हालात पैदा हुए हैं, उसका स्वाभाविक असर वैश्विक पैमाने पर ऊर्जा की आपूर्ति पर पड़ा। हालांकि जब दोनों पक्षों के बीच चौदह दिनों के युद्धविराम की घोषणा हुई थी, तब उम्मीद जगी थी कि अब शायद ईरान होर्मुज जलमार्ग को भी खोल दे और कच्चे तेल तथा प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बहाल हो। मगर उसके बाद ईरान और अमेरिका के बीच हुई शांति वार्ता नाकाम रही और इसी के साथ होर्मुज जलमार्ग की बहाली की उम्मीद एक बार फिर मंद पड़ गई।

आज हालत यह है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और आपूर्ति शृंखला बाधित होने का जिन देशों पर ज्यादा असर पड़ा है, वे अब ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर विचार कर रहे हैं। गौरतलब है कि होर्मुज जलमार्ग बाधित होने के बाद तेल और गैस की व्यापक कमी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को मंत्रिपरिषद की बैठक में कहा कि रसोई गैस के विकल्प के रूप में बायोगैस सहित अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को हर हाल में बढ़ावा दिया जाए।

दरअसल, होर्मुज जलमार्ग से वैश्विक जरूरत के बीस से पच्चीस प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति होती है। भारत भी उन देशों में शामिल है, जिनकी खासी निर्भरता वहां से आने वाले ऊर्जा स्रोतों पर है। यही वजह है कि ईरान ने जब से होर्मुज जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाई है और उसके बाद अमेरिका ने नाकाबंदी की, तब से देश घरेलू गैस और पेट्रोल-डीजल की व्यापक कमी का सामना कर रहा है।

यों इस बीच सरकार ने रूस से तेल खरीद के रास्ते तैयार करने की कोशिश की, लेकिन अमेरिका के रुख की वजह से उसमें भी कई अड़चनें पेश आ रही हैं। ऐसे में फिलहाल सबसे बेहतर उपाय यही है कि दूसरे देशों पर निर्भरता को कम करने के लिए देश में ही वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का ढांचा तैयार किया जाए। इस लिहाज से देखें तो देश में बायोगैस सहित अन्य ऊर्जा स्रोतों की जमीन मजबूत होती है, तो यह न केवल तात्कालिक स्तर पर समस्या का सामना करने के लिहाज से महत्त्वपूर्ण होगा, बल्कि यह दूरगामी स्तर पर देश के व्यापक हित में होगा।

पश्चिम एशिया में एक ओर अमेरिका के रुख तो दूसरी ओर ईरान के जवाबी रवैये की वजह से न केवल भारत, बल्कि दुनिया के बहुत सारे देशों के सामने संकट धीरे-धीरे गहरा रहा है। शायद इसीलिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के कार्यकारी निदेशक ने दुनिया को यह चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज जलमार्ग पूरी तरह और बिना किसी शर्त के जल्द नहीं खुला, तो दुनिया जल्दी ही ‘रेड जोन’ में प्रवेश कर सकती है, जहां तेल आपूर्ति सामान्य मांग को भी संभालने में पूरी तरह असमर्थ हो जाएगी। समस्या यह है कि एक ओर अमेरिका और इजराइल का सामना करने के क्रम में ईरान होर्मुज जलमार्ग को बाधित करने को एक कारगर रणनीति के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है और इसे खोलने के लिए अमेरिका के कदम पीछे हटाने की शर्त रख रहा है।

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पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है। इस क्षेत्र में तनाव की वजह से जहाजरानी गतिविधियों में लगातार मुश्किलें आ रही हैं। एक अधिकारी ने बताया कि होर्मुज जलमार्ग में अभी भी 14 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। अधिकारी ने बताया कि अधिकारी होर्मुज और उसके आसपास की सुरक्षा स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, इसी रास्ते से दुनिया की तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारी ने कहा, “हम होर्मुज जलमार्ग में लोडिंग के लिए टैंकर भेजने के संबंध में विदेश मंत्रालय से बातचीत कर रहे हैं।” अधिकारी के अनुसार, भारत इस क्षेत्र में जहाज तभी भेजेगा जब यह आकलन कर लिया जाएगा कि वहां परिचालन के लिए स्थितियां पूरी तरह सुरक्षित हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक