Galgotias University Controversy: आमतौर पर झूठे दावों की हकीकत किसी न किसी रूप में सामने आ जाती है, लेकिन कई बार उसके नतीजे गंभीर होते हैं। दिल्ली में आयोजित ‘एआइ इम्पैक्ट सम्मेलन’ में हिस्सा लेने वाले गलगोटिया यूनिवर्सिटी के एक झूठ से न केवल उसकी फजीहत हुई, बल्कि इस आयोजन में बरती जाने वाली कोताही पर भी सवाल उठे।
यह बात समझ से बाहर है कि इस संस्थान को चीन के बनाए ‘रोबोटिक डाग’ को अपना नवाचारी उत्पाद बता कर पेश करने की क्या जरूरत थी? AI सम्मेलन में उपस्थित उसके प्रतिनिधि ने क्या सोच कर इस संबंध में अतिरेक से भरे और झूठे दावे किए? अव्वल तो भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन की गरिमा को ध्यान में रखते हुए इस तरह के फर्जी और अनैतिक दावे करने के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए था।
दूसरे, ऐसा करते हुए एक बार भी इस बात का ध्यान रखना जरूरी नहीं समझा गया कि जिस तरह की तकनीक के बारे में झूठा दावा किया गया, आज इंटरनेट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में उस झूठ को सामने आने में ज्यादा वक्त नहीं लगता है। आखिर विवाद बढ़ने के बाद संस्थान को माफी मांगनी पड़ी, लेकिन इससे उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ा है। इस विवाद को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने उचित ही सम्मेलन से वह स्थल खाली करने को कहा गया, जहां इस निजी विश्वविद्यालय ने अपनी प्रदर्शनी लगाई थी।
इस बात की पूरी संभावना है कि एआइ सम्मेलन में प्रदर्शित करने के लिए आए तमाम उत्पादों को मंजूरी पहले ही दी गई होगी। सवाल उठता है कि इस सम्मेलन में संस्थानों को जब अपने मौलिक एआइ उपकरणों को प्रस्तुत करने के लिए बुलाया गया होगा, तब गलगोटिया की ओर से लाए गए ‘रोबोटिक डाग’ और उसके बारे में बढ़-चढ़ किए गए दावों को लेकर आयोजकों की ओर से शुरू में ही जरूरी सवाल क्यों नहीं किए गए?
आज जब देश कृत्रिम मेधा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल करने की जमीन तैयार करने में लगा है, तो ऐसे में इस विवाद ने सम्मेलन में एक असहज स्थिति पैदा की। सवाल केवल किसी संस्थान की साख का नहीं, बल्कि देश की प्रतिष्ठा का है।
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बदलते दौर में भू-राजनीतिक उथल-पुथल और अनिश्चितताओं के बीच भारत आर्थिक एवं रणनीतिक स्तर पर सहयोग बढ़ाने के लिए विभिन्न देशों के साथ साझेदारी को और व्यापक बनाने की राह पर आगे बढ़ रहा है। ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों के बाद भारत ने अब फ्रांस के साथ द्विपक्षीय संबंधों को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ में बदल दिया है। इसके तहत दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार और निवेश समेत कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया है। यह भी पढ़िए…
