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तेजाबी कहर

पुलिस महकमे की संवेदनशीलता का आलम यह है कि अस्पताल में पीड़ित महिला की सुरक्षा के लिए तैनात तीन महिला कांस्टेबल सेल्फी लेने में मशगूल थीं।

Author March 27, 2017 4:51 AM
प्रतीकात्मक चित्र

पिछले हफ्ते लखनऊ में एक महिला को जबरन तेजाब पिलाने की घटना कई मायनों में स्तब्ध कर देने वाली है। यों इस तरह की कई और घटनाएं भी गिनाई जा सकती हैं, और चेहरे या शरीर के किसी अन्य हिस्से पर तेजाब फेंकने की तो ढेरों। लेकिन लखनऊ का यह वाकया कई और भी मुसीबतों को बयान करता है, जिनमें जमीन पर अवैध कब्जे से लेकर सामूहिक बलात्कार, पुलिस-प्रशासन से बार-बार गुहार लगाए जाने के बावजूद कोई सुनवाई न होने से लेकर राजकीय रेलवे पुलिस के अपने कर्तव्य में लापरवाही बरतने तक, बहुत कुछ शामिल है। पीड़ित महिला रायबरेली की रहने वाली है। वह गुरुवार को गंगा गोमती एक्सप्रेस ट्रेन से चारबाग रेलवे स्टेशन पर उतरी थी। वह बोल नहीं पा रही थी, सो उसने पुलिस को लिखित शिकायत दी, जिसके मुताबिक दो लोगों ने उसे ट्रेन में तेजाब पीने को मजबूर किया। मगर यह उस पर गुजरी त्रासदी का नवीनतम सिरा भर है।

खबर है कि वह कोई आठ साल पहले सामूहिक बलात्कार का शिकार हो चुकी है। यह भी गौरतलब है कि बलात्कार के आरोपियों ने ही नए अपराध को अंजाम दिया। यही नहीं, ये लोग पहले उस पर कई बार तेजाब फेंक चुके थे। अनुमान लगाया जा सकता है, जो कि तथ्यात्मक रूप से भी सही है कि, पीड़िता के परिवार ने अपराधियों के खिलाफ कई अफसरों के दरवाजे खटखटाए होंगे, अर्जियां दी होंगी। पर पीड़िता और उसका परिवार हमेशा असुरक्षित रहे। आरोपी धमकियां देते और हमले करते रहे। पुलिस महकमे की संवेदनशीलता का आलम यह है कि अस्पताल में पीड़ित महिला के निकट तीन महिला कांस्टेबल सेल्फी लेने में मशगूल थीं, जिन्हें पीड़ित महिला की सुरक्षा की खातिर वहां तैनात किया गया था। ट्रेन में जीआरपी के जवान क्या कर रहे थे? यह भी सूचना उभर कर आई है कि पीड़ित महिला दलित है और उसके परिवार का आरोपियों के साथ जमीन संबंधी कोई विवाद बरसों से चला आ रहा है।

आरोपी मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाते रहते थे और उसके लिए किसी भी हद तक चले जाते थे। देश में ऐसे न जाने कितने मामले होंगे, जिनमें संपत्ति विवाद बरसों-बरस घिसटते रहते हैं और इस दौरान सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर पक्ष को डर-डर कर जीना पड़ता है, उसे तरह-तरह की धमकियां मिलती रहती हैं। जैसा कि, इस मामले से भी जाहिर है, कई बार कमजोर पक्ष की स्त्रियों की आबरू पर भी हमला होता है। इस मामले में तो धमकियों का कोई अंत नहीं था। पीड़िता लखनऊ स्थित शिरोज हैंगआउट कैफे में काम करती है। एसिड हमले की शिकार महिलाओं द्वारा संचालित इस संस्था को भी आरोपियों की तरफ से धमकियां मिलती थीं। उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री ने जबरन तेजाब पिलाने की घटना का पता चलते ही अफसरों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। वे पीड़िता का हालचाल लेने अस्पताल भी पहुंचे। पर सिर्फ एक लाख रुपए की राहत-राशि बहुत कम है।

फौरन अस्पताल पहुंच कर और जल्द से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी का निर्देश देकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने, जिनके पास गृह मंत्रालय भी है, उचित ही यह संदेश देना चाहा है कि उनकी सरकार कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा के मोर्चे पर खासी मुस्तैद है। पर इस वाकये से उन्हें यह भी अहसास हो जाना चाहिए कि महिला सुरक्षा की असल चुनौती बहुत व्यापक और बहुत विकट है और इससे ‘एंटी रोमियो’ जैसे छिछले अभियान के जरिए पार नहीं पाया जा सकता।

रहस्मय परिस्थितियों में परिवार के चार सदस्य मृत पाए गए

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