नशा और अपराध

पंजाब में नशे के कारोबार का फैलाव छिपी बात नहीं है। वहां नशीली दवाएं बड़े पैमाने पर दवा दुकानों के जरिए बेचने का प्रयास किया जाता है। दरअसल, कई तरह के नशीले पदार्थ दवा की गोलियों और इंजेक्शन आदि के रूप में ऐसे-ऐसे नामों से तैयार किए जाने लगे हैं, जो प्रथम दृष्टया दवा की तरह लगते हैं।

मृत महिला अधिकारी खरड स्थिति दवा एवं खाद्य रासायनिक प्रयोगशाला में तैनात थी। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पंजाब के खरड में एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी की गोली मार कर की गई हत्या से एक बार फिर जाहिर हुआ है कि नशे के कारोबार में शामिल लोग किस कदर निर्भय और निरंकुश हो चुके हैं। मृत महिला अधिकारी खरड स्थिति दवा एवं खाद्य रासायनिक प्रयोगशाला में तैनात थी। दस साल पहले उसने एक दवा की दुकान की जांच करते समय पाया कि वहां नशीली दवाएं बेची जाती हैं। सो, उसने दुकान का लाइसेंस रद्द कर दिया था। इससे नाराज दुकान मालिक ने महिला स्वास्थ्य अधिकारी के प्रति रंजिश पाल ली। शायद वह लंबे समय से मौके की तलाश में रहा होगा। फिर वह सीधा महिला अधिकारी के दफ्तर में घुसा और ताबड़तोड़ चार गोलियां दाग कर उसकी हत्या कर दी। वहां से उसने भागने की कोशिश की, पर भीड़ से घिरा पाकर खुद को भी गोली मार ली। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कानूनों का सख्ती से पालन कराने के प्रयास करने वाले अधिकारियों को किस तरह के जोखिमों से गुजरना पड़ता है।

पंजाब में नशे के कारोबार का फैलाव छिपी बात नहीं है। वहां नशीली दवाएं बड़े पैमाने पर दवा दुकानों के जरिए बेचने का प्रयास किया जाता है। दरअसल, कई तरह के नशीले पदार्थ दवा की गोलियों और इंजेक्शन आदि के रूप में ऐसे-ऐसे नामों से तैयार किए जाने लगे हैं, जो प्रथम दृष्टया दवा की तरह लगते हैं। उनके नाम भी दवाओं जैसे ही रखे जाते हैं। इस तरह उन्हें दवा की दुकानों पर आसानी से पहुंचाया और खपाया जाता है। इस कारोबार का भंडाफोड़ कुछ साल पहले हुआ था, तब इससे जुड़ी कड़ियां खुली थीं, जिसमें पंजाब के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को भी गिरफ्तार किया गया था। ताजा घटना से संबंधित दुकान पर भी वैसी ही नशीली दवाएं मिली थीं। नशे की गिरफ्त में आकर खासकर पंजाब में बहुत सारे युवा अपनी जिंदगी से हाथ धो चुके हैं, बहुत सारे लोग अपनी सेहत चौपट कर चुके हैं। नशे की गिरफ्त में आने से बहुत सारे लोगों की जमीन-जायदाद बर्बाद हो चुकी है। मगर कुछ लोगों में कमाई की भूख इस कदर समाई हुई है कि उन्हें सामाजिक सरोकार और नैतिक मूल्यों की फिक्र कतई नहीं रह गई है। ऊपर से विडंबना यह कि अगर कोई उन्हें रोकने का प्रयास करे, तो उसे जान से मार देने में भी नहीं हिचकते।

यों दवा कारोबार में इस तरह अनैतिकता का वातावरण है कि न सिर्फ दवाएं लागत मूल्य से कई सौ गुना अधिक कीमत पर बेची जाती हैं, बल्कि इसमें भारी पैमाने पर नकली दवाएं भी खपाई जाती हैं। नकली दवाओं में दवा विक्रेताओं को बेपनाह कमाई होती है, इसलिए वे उन्हें बेधड़क खरीदते-बेचते हैं। इस गोरखधंधे में उनका साथ बहुत सारे डॉक्टर भी देते हैं। नकली दवाएं न सिर्फ रोग की रोकथाम में बाधा बनती हैं, बल्कि कई बार उनके कुप्रभाव से दूसरे रोग भी पैदा हो जाते हैं, जिससे कई बार मरीज की जान पर बन आती है। दवा कारोबार में इन मनमानियों पर नकेल कसने के लिए स्वास्थ्य निरीक्षकों की तैनाती होती है। उनमें से बहुतक सारे स्वास्थ्य निरीक्षक भी दवा कारोबार के इस मकड़जाल में उलझ कर रह जाते हैं। पर कुछ ईमानदार अधिकारी सख्त रुख अपनाते हैं, तो खरड जैसी घटना को अंजाम दिया जाता है। जब तक ऐसे अधिकारियों की सुरक्षा की गारंटी नहीं होगी, तब तक दवा कारोबार को साफ-सुथरा बनाने का भरोसा नहीं बन सकता।

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