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नया अध्याय

2015 में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और 2016 में विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने भी इजराइल के साथ-साथ फिलस्तीन की भी यात्रा की थी।
Author July 5, 2017 03:55 am
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू। (File Photo: PTI)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन दिन की इजराइल यात्रा से दोनों देशों के रिश्तों में नए अध्याय की शुरुआत हुई है। साथ ही यह भारतीय विदेश नीति का भी एक नया मुकाम है। मोदी की इस यात्रा को काफी अहम माना जा रहा है तो इसकी वजहें जाहिर हैं। इजराइल की यात्रा पर जाने वाले वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। यह संयोग मात्र नहीं है। दरअसल, उनकी इस यात्रा ने इजराइल को लेकर भारत के राजनीतिक नेतृत्व में लंबे अरसे से चली आ रही हिचक या रूढ़ि को तोड़ा है। चूंकि भारत हमेशा फिलस्तीनियों के संघर्ष का समर्थन करता आया है, इसलिए काफी समय तक इजराइल से दूरी दिखाने का एक चलन रहा। उससे पूर्ण राजनयिक संबंध बहुत बाद में, 1992 में कायम हुए, जब नरसिंह राव प्रधानमंत्री थे। पर इजराइल की तरफ से कभी कोई हिचक नहीं थी, बल्कि वह भारत से संबंध बढ़ाने के लिए हमेशा उत्सुक रहा। वर्ष 2003 में एरियल शेरोन भारत आने वाले इजराइल के पहले प्रधानमंत्री थे। इजराइल से दोस्ती का हाथ बढ़ाने में संकोच केवल भारत को नहीं था, यह उन सभी देशों को रहा है जहां की राजनीति में मुसलिम वोट मायने रखता है।

पर इससे पहले कोई प्रधानमंत्री तेल अवीव भले नहीं गया था, इजराइल से पूर्ण राजनयिक संबंध बनने के बाद मंत्रियों के स्तर पर आना-जाना होता रहा। अलबत्ता यह सावधानी जरूर बरती जाती रही कि तेल अवीव से पहले या बाद में रामल्ला भी हो लें। 2015 में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और 2016 में विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने भी इजराइल के साथ-साथ फिलस्तीन की भी यात्रा की थी। पूर्ण राजनयिक रिश्ता कायम होने के बाद इजराइल से रक्षा खरीद शुरू हुई और वह बढ़ती गई। दूसरे क्षेत्रों में भी आदान-प्रदान बराबर बढ़ता रहा है। अलबत्ता सर्वोच्च स्तर पर इजराइल के नजदीक न दिखने का रुख थोड़ा-बहुत बना रहा। मोदी को ऐसी कोई हिचक नहीं है तो इसकी वजह भी जाहिर है। बहरहाल, उनकी यात्रा को लेकर इजराइल ने अपार उत्साह दिखाया है। वहां के प्रधानमंत्री नेतन्याहू प्रोटोकॉल की परवाह न करते हुए मोदी की अगवानी करने के लिए खुद हवाई अड््डे पर पहुंचे, अपने ग्यारह मंत्रियों समेत। प्रधानमंत्री मोदी का ऐसा भव्य स्वागत हुआ जैसा वहां अमेरिका के राष्ट्रपति या पोप का होता आया है। मोदी ने अपनी प्रतिक्रिया में इस भव्य स्वागत के लिए शुक्रिया कहा तो नेतन्याहू ने कहा कि इजराइली और भारतीय स्वाभाविक दोस्त हैं।

तेल अवीव पहुंचने से पहले ही मोदी एक ट्वीट के जरिए इजराइल को भारत का बहुत खास साथी कहते हुए नेतन्याहू के साथ होने वाली व्यापक वार्ता के प्रति अपनी उत्सुकता का इजहार कर चुके थे। उनकी इस तीन दिन की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच आतंकवाद की चुनौती समेत बहुत सारे मसलों पर विस्तार से बात होनी है। आपसी व्यापार तथा संपर्क बढ़ाने और रक्षा सहयोग संबंधी कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। लेकिन जिस क्षेत्र में इजराइल का अनुभव अनूठा है और भारत के बहुत काम का है वह है खेती तथा बागवानी की ऐसी प्रणाली और विधियां जो कम पानी में भी संभव हैं और जो भरपूर पैदावार दे सकती हैं। जल संरक्षण तथा कृषि के क्षेत्र में इजराइल की प्रगति भारत के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकती है। इसलिए यह मुद््दा जरूर हमारी प्राथमिकता में होना चाहिए।

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