Cancer in North India: हाल के वर्षों में भारत में कैंसर का रोग जिस पैमाने पर बढ़ता देखा जा रहा है, उसने समूचे चिकित्सा जगत में चिंता पैदा कर दी है। विडंबना यह है कि चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में तमाम प्रगति के बावजूद देश में कैंसर के मामलों में खासी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। आमतौर पर इसके उपचार पर तो ध्यान केंद्रित किया जाता है, लेकिन बचाव की दिशा में नहीं सोचा जा रहा है। नतीजतन, कैंसर के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है।
पिछले दिनों राज्यसभा में केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तुत भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम के आंकड़ों ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। इसके मुताबिक, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश में पिछले पांच वर्षों के दौरान कैंसर के मामलों और इससे होने वाली मौतों में निरंतर वृद्धि हुई है। इस अवधि में इन चारों क्षेत्रों में कुल चार लाख सत्रह हजार से अधिक मरीजों के आने का अनुमान है।
आंकड़ों के हिसाब से चंडीगढ़ में ही प्रतिदिन दो लोगों की मौत हो रही है। बीते पांच वर्षों में करीब दो लाख पैंतीस हजार से अधिक लोगों की मौत से स्थिति की गंभीरता का पता चलता है। गौरतलब है कि हर साल कैंसर के करीब पंद्रह लाख नए मरीज सामने आते हैं। अगले बीस वर्षों में यह संख्या पच्चीस लाख पहुंचने का अंदेशा है। महज दवाओं को सस्ता करने और कैंसर अस्पताल खोल देने भर से यह समस्या दूर नहीं होगी। सच यह है कि मरीजों को इस समय सस्ता और सुलभ उपचार की जरूरत है।
मगर समस्या को जड़ से मिटाने के लिए कैंसर की रोकथाम पर काम करने के साथ नागरिकों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना होगा। फिलहाल लक्ष्य यह होना चाहिए कि पहले चरण में ही मर्ज की पहचान कर ली जाए और जिन कारणों से मामले बढ़ रहे हैं, उनको जड़ से खत्म किया जाए।
पंजाब और हरियाणा सहित सभी राज्यों में कीटनाशकों के बेलगाम इस्तेमाल पर रोक लगाना होगा, क्योंकि कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे इसे भी एक बड़ी वजह माना गया है। औद्योगिक कचरों के सख्ती से निपटान के साथ वायु और भू-जल प्रदूषण पर भी अंकुश लगाने की तत्काल जरूरत है।
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