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सरहद पर बाड़बंदी

अब केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भरोसा दिलाया है कि अगले साल तक पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी सीमाओं को पूरी तरह सील कर दिया जाएगा।

Author March 27, 2017 4:37 AM
प्रतीकात्मक चित्र

पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी भारतीय सीमा पर मुकम्मल बाड़बंदी न होने की वजह से अक्सर घुसपैठिए अपने मंसूबों में कामयाब हो जाते हैं। पाकिस्तान की तरफ से आतंकी घुसपैठ पर लगाम लगाना इसीलिए चुनौती बना हुआ है। इसी तरह बांग्लादेश के रास्ते आतंकियों की घुसपैठ और अलगाववादी संगठनों को पहुंचने वाली मदद पर नजर रखना कठिन होता है। करीब दो साल पहले बांग्लादेश के साथ हुए समझौते से भूमि अधिग्रहण विवाद सुलझ चुका है। एक-दूसरे की सीमाओं में रह रहे एक सौ इकसठ बस्तियों के लोगों ने अपनी इच्छा से भारत या बांग्लादेश की नागरिकता चुन ली है। इस तरह सीमा पर निशानदेही की मुश्किलें खत्म हो चुकी हैं। वहां बाड़बंदी करना आसान हो गया है। अब केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भरोसा दिलाया है कि अगले साल तक पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी सीमाओं को पूरी तरह सील कर दिया जाएगा।

इसके लिए अधिकारियों को जिम्मेदारियां भी सौंपी जा चुकी हैं। गृहमंत्री का दावा है कि पिछले एक साल में नक्सली गतिविधियों में करीब पचास फीसद की कमी आई है। ऐसे में सीमाओं पर बाड़बंदी का काम पूरा हो जाने के बाद नक्सली और दूसरी अलगाववादी गतिविधियों पर नकेल कसना और आसान हो जाएगा। बांग्लादेश से लगी सीमा पर करीब छह किलोमीटर तक बाड़बंदी न होने और बस्तियों के दोनों देशों की सीमाओं में बिखरे होने का फायदा न सिर्फ अलगाववादी उठाते थे, बल्कि मादक पदार्थों और मानव तस्करी करने वालों के लिए भी इन रास्तों से गुजरना ज्यादा आसान था। वहां की सीमा सील हो जाने से इन गतिविधियों पर विराम तो लगेगा ही, संगठित अपराध करने वालों पर नजर रखना भी आसान होगा। पाकिस्तान सीमा पर चौकसी बढ़ाने की जरूरत लंबे से रेखांकित की जाती रही है।

हालांकि पहाड़ी इलाकों में बाड़बंदी बहुत मुश्किल काम है, पर कई जगह समतल सीमा पर भी अवरोध नहीं हैं। कई जगह कंटीले तारों को काट कर लोगों ने रास्ते बना लिए हैं। अब भी कुछ जगहों पर भारतीय गांवों के लोगों के खेत बाड़ के पार के हिस्से में हैं, जिनमें उन्हें काम करने जाना पड़ता है। अक्सर इन्हीं जगहों से आतंकी घुसपैठ की कोशिश करते हैं। पठानकोट वायुसेना ठिकाने पर हमले के बाद सीमा पर ऐसी जगहों की तरफ खासकर लोगों का ध्यान गया, जहां बाड़बंदी और चौकसी शिथिल है। गृहमंत्री का कहना है कि सीमाओं को सील करने के साथ-साथ उन पर चौकसी बढ़ाने और अत्याधुनिक उपकरण लगाने की दिशा में भी काम चल रहा है। सीमाओं पर बाड़बंदी और मुस्तैद निगरानी आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से बहुत जरूरी होता है। खासकर जिस देश के साथ तनातनी का रिश्ता हो, उससे लगी सीमा पर अधिक सतकर्ता की जरूरत होती है। भारत के साथ तीन देशों के सीमा विवाद चल रहे थे।

बांग्लादेश के साथ वह मुश्किल दूर हो गई, पर पाकिस्तान और चीन के साथ बड़े हिस्सों को लेकर अब भी विवाद गहरे हैं। पाकिस्तान अक्सर आतंकवाद पर अंकुश लगाने का मुद्दा उठते ही पहले सीमा विवाद निपटाने की मांग आगे बढ़ा देता है। चीन की सेना जब-तब अरुणाचल के इलाके वाली भारतीय सीमा में घुस आती है। वह पाकिस्तान के समर्थन में खुल कर खड़ा है, इसलिए इन देशों के साथ लगी सीमा के विवादित हिस्सों में बाड़बंदी फिलहाल संभव नहीं है। पर जहां तक मुमकिन है, सीमाओं को सील करने और निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने से काफी हद तक आंतरिक सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

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