ताज़ा खबर
 

संपादकीयः कूटनीतिक कामयाबी

अमेरिका ने हिज्बुल मुजाहिदीन को अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों की सूची में डाल दिया है। निश्चय ही यह भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी है। दूसरी ओर, यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका है।

Author Published on: August 18, 2017 3:17 AM
हिजबुल मुजाहिदीन का मुखिया सय्यैद सलाहुद्दीन। (फोटो- ANI)

अमेरिका ने हिज्बुल मुजाहिदीन को अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों की सूची में डाल दिया है। निश्चय ही यह भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी है। दूसरी ओर, यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका है। अमेरिका के ताजा फैसले को जहां आतंकवाद के संदर्भ में पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घेरने की भारत की कोशिशों की एक महत्त्वपूर्ण सफलता के रूप में देखा जाएगा वहीं यह रणनीतिक मामलों में अमेरिका और भारत की बढ़ती नजदीकी का भी संकेत है। गौरतलब है कि जून में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका गए थे, तो वहां के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से उनकी मुलाकात होने से पहले ही अमेरिकी सरकार ने सैयद सलाहुद्दीन को वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया था। अब उसके दो महीने बाद, सलाहुद््दीन के संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन को भी अमेरिका ने वैश्विक आतंकी संगठन मान लिया है। इसमें भी मोदी का असर प्रतिबिंबित होता है। ट्रंप ने मंगलवार को स्वाधीनता दिवस की बधाई देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को फोन किया था। इस निमित्त दोनों नेताओं के बीच और भी मुद्दों पर बात हुई, और इसके दूसरे ही दिन ट्रंप प्रशासन ने सैयद सलाहुद््दीन की बाबत अपना फैसला सुना दिया। इससे कश्मीर के संबंध में भारत के पक्ष को और मजबूती मिली है।

भारत यह दोहराता रहा है कि कश्मीर में होने वाली आतंकी घटनाएं कश्मीरियों के असंतोष की देन नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे सीमापार के आतंकी संगठनों का हाथ है, और उनकी लिप्तता के तमाम सबूत होने पर भी पाकिस्तान सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करने से कतराती है। हालांकि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा की तरह हिज्बुल का भी अड््डा पाकिस्तान में है और वहीं से मदद पाकर यह अपनी आतंकी गतिविधियां चलाता है। पर पाकिस्तान इसे कश्मीर के स्थानीय संघर्ष के तौर पर पेश करता रहा है। लेकिन सलाहुद््दीन और हिज्बुल, दोनों को अंतरराष्ट्रीय आतंकी सूची में डाल कर अमेरिका ने पाकिस्तान के प्रचार-अभियान की हवा निकाल दी है। यह सही है कि सलाहुद््दीन मूल रूप से घाटी का रहने वाला था। मगर बाद में वह सीमापार चला गया और एक आतंकी के रूप में वहीं उसका प्रशिक्षण हुआ। हिज्बुल को भी आइएसआइ ने कश्मीर में आतंकवाद फैलाने के इरादे से 1989 में खड़ा किया। तब से हिज्बुल और सलाहुद््दीन पर भारत में कई बड़ी आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के पुख्ता आरोप हैं।

बुरहान वानी भी हिज्बुल का ही कमांडर था, जिसे पिछले साल जुलाई में सुरक्षा बलों ने मार गिराया, और जिसे पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने ‘स्वतंत्रता सेनानी’ और ‘शहीद’ करार दिया था। अब अमेरिका ने हिज्बुल को कश्मीर को निशाना बना कर दहशतगर्दी मचाने वाले जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे अन्य संगठनों की कतार में रख दिया है। उसने अपना यह निर्णय ऐसे समय सुनाया है जब भारत डोकलाम-विवाद को लेकर आए दिन चीन की धमकियां झेल रहा है। अमेरिका का यह फैसला पाकिस्तान के लिए तो चेतावनी है ही, चीन को भी यह रास नहीं आएगा, जो मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के भारत के प्रस्ताव को सुरक्षा परिषद में बार-बार वीटो करता आ रहा है। आतंकवाद के मामले में पाकिस्तान का बचाव करने से चीन की हेठी ही हुई है, वह बहुत हद तक अलग-थलग ही पड़ा है। अमेरिका के ताजा फैसले ने भारत का हौसला बढ़ाया है। अब उसे अमेरिका के समर्थन तक सीमित न रह कर, सलाहुद्दीन और हिज्बुल मुजाहिदीन को संयुक्त राष्ट्र की आतंकी सूची में शामिल करवाने की कोशिश करनी चाहिए।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 दरिंदगी की इंतिहा
2 टकराव और उकसावा
3 टूट की ओर