उत्तर और पश्चिमी भारत में गर्मी ने अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू कर दिया है। कई राज्यों में तापमान 46 डिग्री के पार पहुंच गया है। हाल में कुछ राज्यों में आंधी के साथ बारिश और ओलावृष्टि से तापमान में गिरावट आई थी, लेकिन अब आसमान से फिर आग बरसने लगी है। दिन में लू चल रही है और रात में भी लोग गर्मी से बेहाल हैं।

कृत्रिम उपकरणों के जरिए राहत पाने के लिए बिजली की मांग में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। भारतीय मौसम विभाग ने जून तक के मौसम का जो पूर्वानुमान जारी किया है, उसके अनुसार पूर्वी-मध्य, उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिण-पूर्वी प्रायद्वीप में इस बार अधिक गर्मी पड़ेगी। जाहिर है कि आने वाले दिनों में तापमान और ज्यादा बढ़ने से आम लोगों की परेशानी भी बढ़ेगी।

मगर सवाल है कि हर साल गर्मी, सर्दी और आंधी-बारिश के क्रम में इतना ज्यादा उतार-चढ़ाव क्यों आ रहा है? मौसम चक्र में इस बदलाव की वजह क्या है? क्या इसके पीछे प्राकृतिक कारण हैं या फिर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली मानव गतिविधियां इसके लिए जिम्मेदार हैं।

मौसम विभाग के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी Delhi में बीते मंगलवार को पारा 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया, जो सामान्य से 4.7 डिग्री अधिक था। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से उत्तर-पश्चिमी हवाएं राजस्थान के थार रेगिस्तान और मध्य पाकिस्तान के कुछ हिस्सों से दिल्ली की ओर बह रही हैं। विशाल शुष्क क्षेत्रों से गुजरते हुए ये हवाएं दिल्ली पहुंचते-पहुंचते बेहद शुष्क हो जाती हैं, जिससे गर्मी सतह के करीब बनी रहती है।

इस बीच दिल्ली में बिजली की अधिकतम मांग 7,776 मेगावाट से ज्यादा हो गई है, जो हाल के वर्षों की तुलना में मई में तेज वृद्धि को दर्शाती है। लोग गर्मी से राहत पाने के लिए पंखे, कूलर और एसी यानी एयर कंडीशनर का इस्तेमाल करते हैं। मगर इस बात पर गौर नहीं किया जाता कि एसी से निकलने वाली हानिकारक गैसों से जहां पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, वहीं इनकी वजह से स्थानीय तापमान में भी बढ़ोतरी होती है। यानी जिन उपकरणों से घर को ठंडा रखने की कोशिश की जाती है, वही तापमान बढ़ने का कारण भी बनते हैं।

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्मी, सर्दी, बारिश और बाढ़ की चरम स्थितियां जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापवृद्धि की वजह से पैदा हो रही हैं। इससे मौसम का प्राकृतिक चक्र प्रभावित हो रहा है। वनों की कटाई, शहरों में कंक्रीट के जंगलों का बढ़ता दायरा, प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन और जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल से पर्यावरण में लगातार बदलाव हो रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप तापमान सामान्य से अधिक हो रहा है। ऐसे में जरूरी है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली मानव गतिविधियों को सीमित करने और चरम मौसमी घटनाओं से निपटने के लिए ठोस उपाय किए जाएं।

हाल में उत्तर प्रदेश में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि की वजह से जैसे हालात पैदा हुए, उसने एक बार फिर यही दर्शाया कि मौसम की मार से बचाव के लिए एहतियात बरतने और सटीक पूर्वानुमान को लेकर अभी बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है। राज्य में इस दौरान चौबीस घंटों के भीतर सौ से अधिक लोगों की जान चली गई। बहरहाल, अभी गर्मी से कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि मौसम विभाग का अनुमान है कि उत्तर और पश्चिमी भारत के कई हिस्सों में 24 मई तक लू की स्थिति बनी रहेगी।

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राजधानी दिल्ली इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। तेज धूप और झुलसाने वाली गर्म हवाओं ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया है। मंगलवार को दिल्ली ने इस मौसम का सबसे गर्म दिन दर्ज किया, जब अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। दिनभर चलने वाली लू ने लोगों को घरों में रहने पर मजबूर कर दिया। दोपहर के समय सड़कें सूनी नजर आईं और जरूरी काम से बाहर निकले लोग भी गर्मी से बचने के लिए छांव तलाशते दिखाई दिए। मौसम विभाग ने अगले छह दिनों तक दिल्ली और एनसीआर में लू चलने की ऑरेंज चेतावनी जारी की है। विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में गर्मी का असर और बढ़ सकता है तथा तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक