Hardik Rathee Death Case: हरियाणा के रोहतक जिले में पिछले साल बास्केटबाल का खंभा गिरने से एक युवा राष्ट्रीय खिलाड़ी की मौत ने शासकीय लापरवाही और भ्रष्टाचार की कई परतें भी खोल दी थीं। तब इस मामले के तूल पकड़ने के बाद सरकार ने इसकी हर पहलू से जांच करने और जरूरत के मुताबिक सुधार के कदम उठाने की बात कही थी।

घटना के बाद एक जांच समिति भी गठित की गई थी, मगर हालत यह है कि अब तक उस समिति की विस्तृत रपट नहीं पेश की गई।यही वजह है कि हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने खिलाड़ी की मौत पर चिंता जताते हुए इसे मानव अधिकारों का उल्लंघन बताया है। गौरतलब है कि रोहतक के उपायुक्त की ओर से जो रपट भेजी गई, उसमें घटना के वास्तविक कारणों और सुरक्षा मानकों का ठोस ब्योरा तक नहीं है।

इसमें केवल बास्केटबाल स्टेडियम बनाने के लिए लाखों रुपए की राशि स्वीकृत किए जाने का जिक्र है। आयोग ने इसे संज्ञान में लिया है और अब पूरे मामले पर सरकार से रपट मांगी है। यह दुखद है कि खेलों के लिए पर्याप्त राशि खर्च किए जाने पर भी खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं मिलता और खेल सुविधाओं में गुणवत्ता नहीं दिखती।

बास्केटबाल मैदान में अगर खंभे में जंग लगी थी और वह कमजोर होने के कारण गिरने की स्थिति में था, तो वहां किसी खिलाड़ी को अभ्यास करने या खेलने से रोकना और खंभा तुरंत बदलना किसकी जिम्मेदारी थी? अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि बार-बार की शिकायत के बावजूद उस खंभे की न मरम्मत की गई और न उसे हटाया गया।

सच यह है कि खेल के मैदान में नियमित रखरखाव होता, तो अभ्यास के दौरान बास्केटबाल खिलाड़ी की जान नहीं जाती। आयोग ने साफ तौर कहा है कि यह संबंधित अधिकारियों की घोर लापरवाही और उनके कर्तव्यों में चूक है।

ऐसा लगता है कि राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और चिंता का कारण बनने के बावजूद इस मसले पर राज्य सरकार की उदासीनता और अनदेखी एक अघोषित नीति है! वरना जांच रपट में देरी न करना और इस मसले पर जरूरी कदम उठाना उसकी नजर में प्राथमिक दायित्व होता।

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न्यायपालिका 9प्रतीकात्मक तस्वीर0

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