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संपादकीय: एहतियाती बंदी

दुनिया भर में कोरोना के कहर से घबराए बहुत सारे लोग भाग कर अपने घर लौटने लगे। इस तरह उन देशों से हजारों लोग भारत में आ गए, जहां कोरोना का संक्रमण बड़े पैमाने पर फैला हुआ था। वे हवाई जहाजों, रेलों और बसों से सफर करते हुए विभिन्न शहरों, कस्बों और गांवों तक पहुंच चुके हैं। उनमें से कई संदिग्ध पाए गए, तो कई में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है।

Author Published on: March 26, 2020 1:40 AM
कोलकाता में हावड़ा स्टेशन पर लाक्डडाउन के दौरान स्टेशन पर खड़ा एक सुरक्षाकर्मी। (फोटोः पीटीआई)

कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने बंदी की अवधि इक्कीस दिन और आगे बढ़ा दी है। पूरी दुनिया में तेजी से पांव पसार रहे इस विषाणु का चक्र तोड़ने के लिए सबसे अहम कदम लोगों का एक-दूसरे से दूर रहना और घरों से बाहर न निकलना माना गया है। पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री ने इस कदम के तहत रविवार को बंदी की अपील की थी, उस दिन लोगों ने उसका पालन किया और सुबह सात बजे से रात के नौ बजे तक अपने घरों में सिमटे रहे। मगर देखा गया कि रात नौ बजे के बाद फिर घरों से बाहर निकल कर सड़कों पर समूह में घूमना-फिरना शुरू कर दिया। इस तरह कोरोना संक्रमण का चक्र तोड़ने का मकसद खटाई में पड़ता दिखा। इसलिए सार्वजनिक परिवहन सेवाओं, हवाई जहाजों, रेलों के संचालन और लोगों के घर से बाहर निकलने पर इकतीस मार्च तक रोक लगा दी गई।

मगर कोरोना संक्रमितों की संख्या जैसे-जैसे बढ़नी शुरू हुई, वैसे-वैसे सरकारों की चिंता भी स्वाभाविक रूप से बढ़ने लगी। महाराष्ट्र, पंजाब, हिमाचल जैसे राज्यों ने पूरे राज्य में कर्फ्यू की घोषणा कर दी, ताकि लोग घरों से बाहर न निकलें और संक्रमण का चक्र टूटे। इसका सकारात्मक असर भी दिखा। उन अनुभवों को देखते हुए प्रधानमंत्री ने पूरे देश में अगले इक्कीस दिनों तक यानी पंद्रह अप्रैल तक पूर्णबंदी की घोषणा कर दी।

दरअसल, कोरोना विषाणु हाथों में चिपक कर मुंह और नाक के जरिए मानव शरीर के भीतर प्रवेश करता और फिर फेफड़ों को अपनी जकड़ में ले लेता है। समय पर रोकथाम न हो पाने की वजह से यह जानलेवा भी साबित होता है। सार्वजनिक परिवहन के साधनों, दफ्तरों, सार्वजनिक स्थानों, मॉलों, दुकानों आदि में इसके फैलने का खतरा अधिक रहता है। इसलिए ऐसी जगहों पर लोगों की आवाजाही रोक देने से विषाणु का चक्र टूटता है। अभी तक इस विषाणु का कोई कारगर टीका नहीं खोजा जा सका है, इसलिए दुनिया के जिन देशों में इस विषाणु के संक्रमण से सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं, उनके अनुभवों को देखते हुए फिलहाल सबसे कारगर उपाय सामाजिक दूरी बनाए रखना ही माना जा रहा है। ऐसे में समय रहते एहतियाती उपाय के तौर पर प्रधानमंत्री की अपील पर अमल बड़ी रोकथाम साबित होगी।

दुनिया भर में कोरोना के कहर से घबराए बहुत सारे लोग भाग कर अपने घर लौटने लगे। इस तरह उन देशों से हजारों लोग भारत में आ गए, जहां कोरोना का संक्रमण बड़े पैमाने पर फैला हुआ था। वे हवाई जहाजों, रेलों और बसों से सफर करते हुए विभिन्न शहरों, कस्बों और गांवों तक पहुंच चुके हैं। उनमें से कई संदिग्ध पाए गए, तो कई में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है।

वे कितने लोगों को संक्रमित कर गए, अभी तक इसकी पहचान नहीं हो पाई है। इसलिए जितने लोग इस विषाणु के संपर्क में आए हैं वे दूसरों तक उसे न फैलाने पाएं इसका यही तरीका है कि जो जहां है उसे वहीं रोक दिया जाए। यह सही है कि बहुत सारे लोग दिहाड़ी मजदूरी या छोटे-मोटे काम करके अपना परिवार पालते हैं, बंदी से उन पर बुरा असर पड़ रहा है, इसलिए कई लोग काम पर निकलने का प्रयास करते देखे गए। पर जीवन की कीमत पर ऐसा करने को उचित नहीं माना जा सकता। इसके लिए सरकारें गुजारा भत्ते आदि का इंतजाम कर रही हैं। इसलिए घरों में बंद रह कर इस विषाणु के चक्र को तोड़ने का दृढ़ संकल्प जरूरी है।

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