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संपादकीयः कातिल और मकतूल

राजस्थान के अलवर शहर में राष्ट्रीय राजमार्ग पर खुलेआम हरियाणा के एक दुग्ध व्यापारी को स्वघोषित गोरक्षकों के एक दल ने जिस तरह से पीट-पीट क र मार डाला और उसके बेटे समेत कु छ को अधमरा क र दिया, वह स्तब्ध क र देने वाली घटना है।

Author April 8, 2017 5:09 AM
अल्वर के इस हत्याकांड की बाबत कार्रवाई को तार्कि क परिणति तक पहुंचाने के बजाय सच्चाई पर परदा डालने में दिखती है

राजस्थान के अलवर शहर में राष्ट्रीय राजमार्ग पर खुलेआम हरियाणा के एक दुग्ध व्यापारी को स्वघोषित गोरक्षकों के एक दल ने जिस तरह से पीट-पीट क र मार डाला और उसके बेटे समेत कु छ को अधमरा क र दिया, वह स्तब्ध क र देने वाली घटना है। हद तो यह हो गई कि सरकार का दिलचस्पी इस हत्याकांड की बाबत कार्रवाई को तार्कि क परिणति तक पहुंचाने के बजाय सच्चाई पर परदा डालने में दिखती है। लोक सभा में कें द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नक वी ने क हा, ‘हकीक त में ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं।’ यह अलग बात है कि राज्यसभा के उपसभापित पीजे कु रियन ने मामले की जांच क रके सही तथ्यों को सदन के सम्मुख प्रस्तुत क रने का निर्देश दिया है। लोक सभा में भी कंग्रेसी सांसद मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे को उठाया, जिस पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने क हा कि राजस्थान सरकार ने मामले का संज्ञान लिया है और कें द्र भी न्यायसंगत कार्रवाई क रेगा। इस बीच शुक्र वार को एक याचिका के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने भी क थित गोरक्षकों के बारे में चार राज्यों से रिपोर्ट तलब की है। गौरतलब है कि 31 मार्च को हरियाणा का दुग्ध व्यापारी पहलू खां अपने बेटे और कु छ अन्य लोगों के साथ जयपुर से दो गाय खरीद क र लौट रहा था। अलवर में कु छ युवकों ने उसके ट्रक को रोका और नाम पूछा। ट्रक ड्राइवर ने अपना नाम अर्जुन बताया जिसे क थित गोरक्षकों ने भगा दिया। पहलू खां ने गायों की खरीद के संबंध में कागजात भी दिखाए, जिन्हें हमलावरों ने फ ाड़ क र फें क दिया। इसके बाद पहलू खां समेत उन लोगों की लाठी-डंडों से पिटाई की।

थोड़ी देर में पुलिस के आने पर हमलावर भाग गए, लेकि न अस्पताल पहुंच क र घायल पहलू खां की मौत हो गई। उसके बेटे समेत तीन- चार लोग अब भी बुरी तरह जख्मी हैं। मीडिया में जारी एक वीडियो में पहलू खां को सड़क पर घसीट-घसीट क र मार रहे जींस और शर्ट पहने क ई युवक दिखाई दे रहे हैं। राजस्थान सरकार ने फि लहाल तीन हमलावरों को गिरμतार क रने का दावा कि या है। लेकिन असल सवाल यह है कि इस तरह की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं? अगस्त 2016 में गुजरात में ऊ ना कांड हुआ था, जब कुछ लोगों ने चार दलित भाइयों पर गोहत्या का झूठा आरोप लगा कर रस्सी से बांध कर उन्हें सरेआम पीटा था। देश भर में इस पर तीखी प्रतिक्रि या हुई थी। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क हा था कि कुछ असामाजिक तत्त्व गोरक्षा के नाम पर अपनी दुकानदारी चला रहे हैं; ऐसे लोगों के विरु द्ध कानून अपना काम क रेगा। इसके एक साल पहले, सितंबर 2015 में उत्तर प्रदेश के दादरी में मोहम्मद अखलाक
को घर में गोमांस रखने का आरोप लगा क र पीट-पीट क र मार डाला गया था। अलवर की घटना से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या प्रधानमंत्री के वक्तव्य को उनके समर्थकों ने ही गंभीरता से नहीं लिया? राजस्थान में खुद उनकी पार्टी की सरकार है। फि र भी, गोरक्षा के नाम पर अपनी दुकानदारी चलाने वाले ही नहीं, कानून का मखौल बनाने वाले भी खुलेआम सक्रिय हैं। फि र राजस्थान सरकार का रवैया भी चिंताजनक है, जिसका अंदाजा उसके गृहमंत्री के इस बयान से लगाया जा सक ता है कि ‘गलतियां दोनों तरफ से हुर्इं हैं।’ इस बयान का भला क्या मतलब निक ला जाए, सिवाय इस

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