महंगाई का ईंधन

एक बार फिर रसोई गैस के घरेलू सिलिंडर की कीमत पच्चीस रुपए बढ़ गई।

रसोई गैस के मूल्‍य बढ़़ने से परेशानी। फाइल फोटो।

एक बार फिर रसोई गैस के घरेलू सिलिंडर की कीमत पच्चीस रुपए बढ़ गई। हालांकि अब हर महीने घरेलू गैस की दरों की समीक्षा होती है और उसी के मुताबिक कीमतें बढ़ाई जाती हैं। पिछले महीने भी सिलिंडर महंगा किया गया था। अब दिल्ली में रसोई गैस के घरेलू सिलिंडर की कीमत आठ सौ चौरासी रुपए पचास पैसे हो गई है। उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों में इसके लिए लोगों को नौ सौ सैंतालीस रुपए चुकाने पड़ेंगे। इसी तरह वाणिज्यिक सिलिंडर की कीमत में पचहत्तर रुपए की बढ़ोतरी की गई है।

यानी वाणिज्यिक सिलिंडर के लिए दिल्ली में सोलह सौ तिरानबे रुपए और चेन्नै में अठारह सौ इकतीस रुपए चुकाने पड़ेंगे। इस साल के शुरू से लेकर अब तक रसोई गैस की कीमत एक सौ नब्बे रुपए से अधिक बढ़ चुकी है। इसी तरह पाइपलाइन के जरिए घरों में सीधे पहुंचाई जाने वाली रसोई गैस यानी पीएनजी की कीमत में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से लोग पहले ही परेशान हैं। रसोई गैस की कीमतें बढ़ने से उन पर महंगाई की दोहरी मार पड़ रही है। मगर लगता है, सरकार को र्इंधन की बढ़ती कीमतों की कोई परवाह नहीं है।

अपने पिछले कार्यकाल में भाजपा सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत हर गरीब परिवार को मुफ्त गैस सिलिंडर उपलब्ध कराए थे। तब इस योजना का बढ़-चढ़ कर श्रेय लेने का प्रयास किया गया और दावा किया गया था कि अब इससे गृहिणियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर नहीं पड़ेगा। उसी दौरान प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की थी कि वे स्वेच्छा से रसोई गैस पर मिलने वाली सबसिडी छोड़ें, ताकि गरीब परिवारों को उसका लाभ पहुंचाया जा सके। उनकी अपील पर लाखों लोगों ने सबसिडी छोड़ दी थी।

इस तरह ज्यादातर परिवार अब सबसिडी वाले सिलिंडर नहीं लेते। जब सिलिंडर की कीमत साढ़े पांच सौ रुपए थी, तब तक तो सबसिडी मिला करती थी, पर अब सरकार उसके बोझ से मुक्त है। उधर जिन गरीब परिवारों को उज्ज्वला योजना के तहत सिलिंडर उपलब्ध कराए गए थे, उनकी क्षमता उनमें गैस भराने की नहीं रह गई है। कोरोना काल में काम-धंधे बंद हो जाने, रोजगार छिन जाने की वजह से बहुत सारे लोगों के लिए दो वक्त का भोजन जुटाना मुश्किल है, मुफ्त सरकारी राशन पर निर्भर हो गए हैं, वे भला रसोई गैस खरीदने की हिम्मत कैसे जुटा पाएंगे। इस तरह रसोई गैस की मांग भी कोई खास नहीं बढ़ी है, फिर भी सरकार इसकी कीमत पर काबू नहीं पा रही।

रसोई गैस की कीमत बढ़ने से न केवल परिवारों का मासिक खर्च बढ़ जाता है, बल्कि बहुत सारी चीजों की कीमत पर भी इसका असर पड़ता है। वाणिज्यिक सिलिंडर का उपयोग बहुत सारे होटल, रेस्तरां, रेहड़ी-पटरी पर कारोबार करने वाले लोगों के अलावा कल-कारखाने भी करते हैं। जब गैस की कीमत बढ़ती है, तो वस्तुओं की उत्पादन लागत भी बढ़ जाती है। पेट्रोल, डीजल की कीमतें बढ़ने से पहले ही माल ढुलाई महंगी हो गई है। ऐसे में वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण पाना मुश्किल बना हुआ है। मगर पिछले दिनों जिस तरह वित्तमंत्री ने र्इंधन की बढ़ती कीमतों का दोष कांग्रेस सरकार के ऊपर मढ़ दिया, उससे जाहिर हो गया कि उनकी चिंता के केंद्र में महंगाई कहीं नहीं है। अगर सरकार इसी तरह व्यावहारिक उपाय तलाशने के बजाय अपनी जिम्मेदारी से बचती रहेगी, तो आने वाले दिनों में ये समस्याएं और बढ़ेंगी।

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