किसी भी देश में सरकारी तंत्र में वित्तीय अनुशासन का अपना महत्त्व है। सरकारी खजाने की राशि सावधानी से और प्राथमिकता के आधार पर ही खर्च की जानी चाहिए। मगर यह राशि जब कल्याणकारी योजनाओं में लगाने या विकास के लिए संसाधन जुटाने के बजाय सरकारी दौरे तथा आतिथ्य प्रबंधन में बर्बाद होने लगे, तो जनता का भरोसा टूटता है। आज एक ओर भारत के दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक शक्ति बनने के दावे किए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर देश के कुछ अधिकारी और नेता फिजूलखर्ची से बाज नहीं आ रहे।
भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के एक वरिष्ठ अधिकारी के प्रस्तावित सरकारी दौरे में पद और सार्वजनिक संसाधनों के बेजा इस्तेमाल का मामला सामने आने से एक बार फिर यही जाहिर हुआ है कि पद और रसूख के प्रभाव के पीछे सामंती सोच का ढांचा किस तरह काम करता है। अधिकारी की यात्रा के लिए जिस तरह से पचास अन्य अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपने की खबर आई, वह चौंकाने वाली है। इसमें उनको तौलिया-कंघी और तेल से लेकर अंत:वस्त्र तक जुटाने की हिदायत दी गई थी।
सरकारी यात्रा से जुड़े इन आतिथ्य इंतजामों का ब्योरा चर्चा में आने के बाद संचार मंत्री ने इसे ‘बेहद ही बेतुका’, ‘स्तब्ध कर देने वाला’ तथा अस्वीकार्य बताया। इस तरह के आतिथ्य प्रबंधन संबंधी आदेश से बीएसएनएल की तो फजीहत हुई ही, वहीं यह सच्चाई भी सामने आई कि कई सरकारी दौरे में कैसे जम कर फिजूलखर्ची होती है।
एक ओर, जनहित की योजनाओं को लागू करने में देरी के सवाल पर धन की कमी को कारण बताया जाता है, वहीं सरकारी तंत्र में पसरी फिजूलखर्ची पर लगाम लगाना जरूरी नहीं समझा जाता। यह छिपा नहीं है कि सरकारी गाड़ियों के दुरुपयोग से लेकर कई तरह के भत्तों पर बेतहाशा खर्च के साथ-साथ अधिकारियों के अनावश्यक दौरों और सरकार के विज्ञापनों पर किस तरह करोड़ों रुपए बहाए जाते हैं। जबकि जनता का यह धन अनेक तरह के करों के जरिए जुटाया गया होता है।
इस मामले में बेशक तत्काल कार्रवाई की गई हो, लेकिन सरकारी तंत्र में धन की बर्बादी कैसे हो रही है, यह उसकी यह बानगी भर है। इसे गंभीरता से लेने और इस तरह की प्रवृत्ति पर सख्ती से लगाम लगाने की जरूरत है।
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केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बीएसएनएल के निदेशक विवेक बंजल के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यह कदम उनके उत्तर प्रदेश के प्रयागराज दौरे के दौरान दिए गए प्रोटोकॉल को लेकर उठे विवाद के बीच उठाया गया है। निदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। प्राप्त जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
