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संपादकीय: मौत के अस्पताल

हैरानी की बात यह है कि महामारी से सामना करने के लिए समूचे देश में हर स्तर पर चौकसी बरतने के दावे किए जा रहे हैं और बिना किसी जांच-पड़ताल के लिए किसी व्यक्ति के लिए एक से दूसरी जगह तक जा पाना भी संभव नहीं है। ऐसे समय में अस्पताल जैसी जगहों को आग लगने के हालात में छोड़ देने को किस तरह देखा जाएगा!

आंंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा के कोविड केयर सेंटर में लगी आग।

आंध्र प्रदेश में विजयवाड़ा के एक कोविड केयर सेंटर में लगी आग और उसमें दस लोगों की मौत ने एक बार फिर यह साबित किया है कि सरकार और प्रबंधन इस संवेदनशील समय में भी किस हद तक लापरवाह हैं! गौरतलब है कि इस अस्पताल में चालीस मरीज भर्ती थे। कई लोगों की किसी तरह जान बच सकी। अगर एक ही तरह की घटना बार-बार सामने आ रही हो तो उसे केवल लापरवाही मानने के बजाय आपराधिक कोताही कहा जाना चाहिए।

दरअसल, एक हफ्ते के भीतर कोरोना मरीजों के इलाज के लिए तैयार किए गए विशेष अस्पताल में आग लगने और लोगों के मारे जाने की यह दूसरी घटना है। बीते छह अगस्त को गुजरात के अमदाबाद में भी कोविड के मरीजों के इलाज के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए एक अस्पताल में आग लग गई थी और आठ लोगों की जान चली गई। उसके बाद तीखे सवाल उठे थे कि जब कोरोना महामारी से जुड़े मामलों में इस स्तर की संवेदनहीनता और लापरवाही बरती जा रही है तो दूसरे सामान्य अस्पतालों और वहां के इंतजामों से क्या उम्मीद की जाए!

हैरानी की बात यह है कि महामारी से सामना करने के लिए समूचे देश में हर स्तर पर चौकसी बरतने के दावे किए जा रहे हैं और बिना किसी जांच-पड़ताल के लिए किसी व्यक्ति के लिए एक से दूसरी जगह तक जा पाना भी संभव नहीं है। ऐसे समय में अस्पताल जैसी जगहों को आग लगने के हालात में छोड़ देने को किस तरह देखा जाएगा! विजयवाड़ा के जिस कोविड केयर सेंटर में आग लगी, उसमें शुरुआती कारण के शॉर्ट सर्किट बताया गया। लेकिन बाद में खबरें आर्इं कि जिस होटल को कोविड केयर सेंटर के रूप में तैयार किया गया था, उसमें आग लगने की स्थिति में बचाव के इंतजाम तक नहीं थे और उसे अग्नि शमन महमके की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र भी नहीं मिला था। यही हकीकत अमदाबाद में कोविड अस्पताल के बारे में भी सामने आई थी।

सवाल है कि जिन भवनों या इमारतों में आग लगने जैसे हादसे से बचाव के प्राथमिक इंतजाम भी नहीं किए गए हों, उन्हें कोविड केयर सेंटर या कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए किसने स्वीकृति दी? अस्पताल के रूप में काम करने से पहले भी किसी बहुमंजिला इमारत में अग्नि शमन विभाग की जांच और हर स्तर पर सुरक्षित होने से संबंधित अनापत्ति प्रमाण पत्र अनिवार्य होता है। यह सुनिश्चित करना किसकी जिम्मेदारी थी?

विडंबना यह है कि ऐसी हर घटना के बाद ऐसे सवालों पर जवाब देने के बजाय मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए मुआवजे की घोषणा करके अपनी जिम्मेदारियों को पूरा मान लिया जाता है। लेकिन शायद ही कभी ऐसे हादसों से उपजी त्रासदी का ठोस हल निकालने की सुचिंतित योजना पर काम करने की जरूरत समझी जाती है। हालत यह है कि विजयवाड़ा में कोविड मरीजों के इलाज के लिए तय किए गए बीस अन्य होटलों या भवनों में भी सुरक्षा मानकों और आग से बचाव के इंतजाम के लिए अग्नि शमन विभाग की ओर जारी होने वाला अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं पाया गया।

अगर इस स्थिति में फिर कोई हादसा होता है, तो क्या कोई विभाग या अधिकारी उसकी जवाबदेही लेगा? किसी भी हादसे का मुख्य सबक यह होना चाहिए कि वे तमाम इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में वैसी घटना से बचाव हो सके। लेकिन ऐसा लगता है कि यह सबक हमारे संबंधित महकमों और लोगों के लिए एक हाशिये का विषय है। यह बेवजह नहीं है कि एक ही तरह के हादसे बार-बार सामने आते रहते हैं और उनमें नाहक ही लोग मारे जाते हैं।

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