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संपादकीय: प्रवासी पर प्रहार

कुछ दिनों पहले अमेरिका ने अपने वीजा नियमों में बदलाव किया था, जिसके चलते बहुत सारे भारतीय नागरिकों के रोजगार जाने का संकट पैदा हो गया। अब खबर है कि कुवैत सरकार भी अपने यहां से विदेशी कामगारों को बाहर निकालने के लिए कानून बना रही है। कुवैत में करीब सत्तर फीसद विदेशी नागरिक रहते हैं, जो वहां के सरकारी और निजी उपक्रमों में काम करते हैं।

kuwait , expat in kuwait, jobs,कुवैत सरकार के फैसले से लाखों भारतीयों की नौकरियां जा सकती हैं। (फाइल फोटो)

कोरोना संकट की वजह से दुनिया भर में कामगारों के सामने रोजगार का संकट गहरा हुआ है। बहुत सारे लोगों ने अपने रोजगार खोए हैं। ऐसे लोगों की भी बड़ी संख्या है, जो सुरक्षा की दृष्टि से विदेशों से लौट कर अपने देश गए या लाए गए थे, पर अब उनके अपने काम पर लौटने का रास्ता बंद हो गया है। इनमें सबसे बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की है। अब कई देश अपने यहां से विदेशी नागरिकों को बाहर निकालने के मकसद से नियम-कायदों में बदलाव कर रहे हैं।

कुछ दिनों पहले अमेरिका ने अपने वीजा नियमों में बदलाव किया था, जिसके चलते बहुत सारे भारतीय नागरिकों के रोजगार जाने का संकट पैदा हो गया। अब खबर है कि कुवैत सरकार भी अपने यहां से विदेशी कामगारों को बाहर निकालने के लिए कानून बना रही है। कुवैत में करीब सत्तर फीसद विदेशी नागरिक रहते हैं, जो वहां के सरकारी और निजी उपक्रमों में काम करते हैं। नए कानून में विदेशी नागरिकों की संख्या घटा कर तीस फीसद तक करने का प्रस्ताव है।

अगर यह कानून पारित होता है, तो करीब आठ लाख भारतीय नागरिकों की छंटनी हो सकती है। जाहिर है, ये लोग यहां आएंगे, तो उनके लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना बड़ी चुनौती साबित होगी। फिर वे वहां से जो विदेशी मुद्रा भेजते थे, वह भी बंद हो जाएगी।

खाड़ी देशों में भारतीय नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर आसानी से उपलब्ध हैं। वहां न सिर्फ डॉक्टर, इंजीनियर जैसे तकनीकी रूप से दक्ष लोगों की मांग अधिक है, बल्कि बिजली के उपकरण सुधारने, पानी के नल ठीक करने वालों की भी बहुत जरूरत है। यहां तक कि वहां के कल-कारखानों, खेती-बाड़ी और घरेलू कामों में अनपढ़ लोगों को भी काम आसानी से मिल जाता है। कुवैत सरकार के अनुसार वहां रह रहे साढ़े तैंतीस लाख विदेशियों में से करीब तेरह लाख अनपढ़ हैं या फिर बहुत कम पढ़ना-लिखना जानते हैं। ऐसे देशों में रोजगार के रास्ते बंद होंगे, तो बहुत सारे भारतीय नौजवानों के सामने रोजगार का संकट और बढ़ेगा।

ये लोग खाड़ी देशों में जाकर न सिर्फ अपने परिवार के भरण-पोषण का जरिया बनते थे, बल्कि यहां बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा भी भेजते थे। विदेशी मुद्रा के मामले में कुवैत से सबसे ऊपर है। 2018 में वहां से भारतीय नागरिकों ने 4.8 अरब डॉलर भेजे थे। इस वक्त भारत की अर्थव्यवस्था काफी खराब है, विदेशी मुद्रा की आवक घटने से उस पर और मार पड़ेगी।

आशंका है कि विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों के रोजगार पर संकट गहराने का मामला केवल कुवैत तक सीमित नहीं रहने वाला। अमेरिका पहले ही छंटनी का मन बना चुका है। कोरोना संक्रमण के चलते दुनिया के तमाम देशों के रोजगार पर संकट गहरा हुआ है। खर्चों में कटौती का सिलसिला जारी है। हर देश अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है।

नए रोजगार सृजन की संभावना काफी क्षीण हो चुकी है। ऐसे में इन देशों की देखादेखी दूसरे देश भी बाहरी लोगों को वापस भेजने का कदम उठाते हैं, तो भारत पर उसकी मार गहरी पड़ सकती है। बाहर से आए लोगों के लिए रोजगार के अवसर जुटाने का दबाव सरकार पर बढ़ेगा। इसके अलावा, दूसरे देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों में बड़ी संख्या कोरोना संक्रमितों की भी है। उनके आने से कोरोना संक्रमण का प्रसार रोकने की भी चुनौती बढ़ेगी।

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