देश के आठ प्रमुख बुनियादी क्षेत्रों की उत्पादन वृद्धि दर पिछले माह जनवरी में गिरकर चार फीसद पर आ गई, जो समूची अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं है। इन क्षेत्रों का देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक और सकल घरेलू उत्पाद में महत्त्वपूर्ण योगदान है, इसलिए इनकी उत्पादन गति धीमी होने से देश की आर्थिक वृद्धि प्रभावित होती है। इन क्षेत्रों से जुड़े उद्योगों को देश की अर्थव्यवस्था का स्तंभ माना जाता है, जो बुनियादी ढांचे के विकास, रोजगार सृजन और समग्र औद्योगिक वृद्धि को गति देते हैं।

पिछले दिनों सरकार की ओर से जारी आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया था इस वर्ष की शुरुआत थोक और खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी के साथ हुई है। अब बुनियादी क्षेत्रों की वृद्धि दर में गिरावट यह दर्शाती है कि देश की अर्थव्यवस्था को कई मोर्चे पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि वस्तुओं के उत्पादन में कमी से मांग और आपूर्ति के बीच पैदा होने वाले अंतर की वजह से महंगाई के और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

गौरतलब है कि देश के आठ प्रमुख बुनियादी क्षेत्र- कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में लगभग चालीस फीसद की हिस्सेदारी रखते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों की वृद्धि दर में गिरावट का समग्र अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2025 में बुनियादी क्षेत्रों की वृद्धि दर 5.1 फीसद और दिसंबर में 4.7 फीसद थी।

मगर, इस साल जनवरी में कच्चा तेल एवं प्राकृतिक गैस तथा कोयला एवं सीमेंट क्षेत्र के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, उर्वरक, इस्पात और बिजली उत्पादन में थोड़ी वृद्धि ने स्थिति को और कमजोर होने से रोका है। यह विचित्र बात है कि एक ओर निर्यात के जरिए अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के दावे किए जाते हैं, तो दूसरी तरफ बुनियादी क्षेत्रों में उत्पादन की गति धीमी पड़ती जा रही है। सरकार को चाहिए कि इन क्षेत्रों में चुनौतियों से निपटने के लिए कारगर कदम उठाए जाएं।